50 साल के शाहरुख़ का 'बिज़नेस सेंस बेस्ट'

- Author, आयुष देशपांडे
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बॉलीवुड के 'बादशाह' और 'रोमांस किंग' शाहरुख़ ख़ान का आज 50वां जन्मदिन हैं.
बीते 25 सालों से शाहरुख़ ने 80 से भी ज़्यादा फ़िल्मों और टीवी शो में काम किया है. उनके इस करियर पर बीबीसी ने डाली एक नज़र.
इस बात से तो सभी वाक़िफ़ हैं कि बॉलीवुड में क़दम रखने से पहले किंग ख़ान ने छोटे पर्दे से अपने अभिनय की शुरुआत की थी.

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साल 1989 में शाहरुख़ ख़ान ने दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक 'फ़ौजी' से अपने टीवी कैरियर की शुरुआत की. 'लेफ़्टिनेंट अभिमन्यु सिंह' का किरदार निभाते हुए शाहरुख़ ने इस धारावाहिक के 13 एपिसोड में काम किए.
फ़ौजी की सफलता के बाद शाहरुख़ को अज़ीज़ मिर्ज़ा ने अपने धारावाहिक 'सर्कस' में काम करने का न्यौता दिया.
अज़ीज़ मिर्ज़ा और कुंदन शाह निर्देशित इस धारावाहिक में काम करने के बाद शाहरुख़ को अभिनेता के तौर पर एक नई पहचान मिली.
साल 1989 में ही शाहरुख़ खान ने अपने मित्र कुंदन शाह के निर्देशन में एक और धारावाहिक 'वागले की दुनिया' में अभिनय किया.

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मशहूर कार्टूनिस्ट आर के लक्षमण के बनाए इस धारावाहिक में शाहरुख़ अतिथि भूमिका में नज़र आए थे.
इन धारावाहिकों के सफल होने पर फ़िल्म आलोचक भी शाहरुख़ खान को एक उभरते हुए कलाकार की तरह देख रहे थे लेकिन शाहरुख़ शुरुआती दिनों में फ़िल्मों में अभिनय नहीं करना चाहते थे.
बाद में फ़िल्मों में काम करने के बाद भी उन्होंने कई टेलीविज़न शो जैसे 'कौन बनेगा करोड़पति' और 'क्या आप पांचवी पास से तेज़ हैं' जैसे शो को होस्ट किया.

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फ़िल्मों में उनका सफ़र साल 1992 में आई फ़िल्म 'दीवाना' से हुई. अगले साल प्रदर्शित बाज़ीगर और डर ने शाहरुख़ को सिनेमा की दुनिया का नया स्टार बना दिया, एंटी हीरो पर सुपरस्टार.
एंटी हीरो वाली उनकी छवि ज़्यादा दिनों तक नहीं रही. 1995 की दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे ने शाहरुख़ को रोमांस की दुनिया का बादशाह बनाया.

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साल 1997 में दिल तो पागल ने भी शाहरुख़ की स्टारडम को बरक़रार रखा.
साल 1998 में आई करण जौहर की बतौर निर्देशक डेब्यू फ़िल्म 'कुछ-कुछ होता है' शाहरुख़ ख़ान की पिछली फ़िल्मों से कई गुना ज़्यादा सफल रही.
इसके बाद मोहब्बतें, कभी ख़ुशी कभी गम और देवदास जैसी फ़िल्मों ने शाहरुख़ को बॉलीवुड का बादशाह बना दिया.

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साल 2012 में यशराज बैनर तले बनी फ़िल्म 'जब तक हैं जान' जिसका निर्देशन ख़ुद स्वर्गीय यश चोपड़ा ने किया था.
साल 2013 में रेहित शेट्टी निर्देशित फ़िल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' ने बॉक्स ऑफ़िस पर कलेक्शन के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे .

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फ़िलहाल शाहरुख़, रोहित शेट्टी के साथ अपनी अगली फ़िल्म 'दिलवाले' में व्यस्त हैं जो इस साल दिसंबर में रिलीज़ होगी.
अपने 23 सालों के करियर में शाहरुख खान ने कई असफल फ़िल्में भी दी हैं और जिस समय को शाहरुख़ का सबसे मुश्किल दौर भी माना जाता हैं.

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साल 1995 में आई फ़िल्म 'गुड्डू' प्रेम ललवानी निर्देशित थी. इस फ़िल्म में शाहरुख के साथ अभिनेत्री मनीषा कोईराला भी थीं जो उस समय बॉलीवुड में सफल अभिनेत्रियो में गिनी जाती थी.
यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई थी.

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प्रवीण निश्चल निर्देशित साल 1996 में रिलीज़ हुई फ़िल्म 'इंगलिश बाबू देसी मेम' बॉक्स ऑफिस पर कलेक्शन करने में असफल रही और इसी वजह से सिनेमा घरों से चंद दिनों में ही बाहर हो गई थी.
1995 में राजीव मेहरा निर्देशित फ़िल्म 'राम जाने' शाहरुख़ की असफल फ़िल्मों में से एक हैं.
शाहरुख़ की इन फ़िल्मों के ना चलने के पीछे के कारण के बारे में फ़िल्म समीक्षक मयंक शेखर बीबीसी से कहते हैं, "यह वह समय था जब अभिनेता एक साथ कई फ़िल्में साइन कर लिया करते थे जिस वजह से उनका ध्यान एक फ़िल्म पर नहीं रह पाता था."

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1993 में रिलीज़ हुई केतन मेहता की फ़िल्म 'माया मेमसाब' से शाहरुख़ को फ़िल्म समीक्षकों से काफी आलोचना सुननी पड़ी थी.
फ़िल्म में दिखाए गए न्यूड सीन की वजह से यह फ़िल्म काफी विवादों से घिरी रही.
इस फ़िल्म में शाहरुख़ के साथ दीपा शाही और फ़ारुख़ शेख़ ने भी अभिनय किया था.

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साल 2001 में संतोष सिवान के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'अशोका' को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ किया गया लेकिन यह फ़िल्म भारत के दर्शकों को भी लुभाने में असफल रही.
शाहरुख़ ने इस फ़िल्म में अभिनय के साथ इस फ़िल्म को प्रोड्यूस भी किया था. जिस वजह से कुछ फ़िल्म व्यापार से जुड़े विश्लेषक शाहरुख़ को एक बुरे निर्माता के रुप में देख रहे थे.
शाहरुख़ को एक प्रोड्यूसर की बजाए एक व्यापारी कहते हुए मंयक शेखर बताते हैं, "शाहरुख़ के जैसा 'बिज़नेस सेंस' किसी और अभिनेता में नहीं है उन्हें पता हैं की किस फ़िल्म को किस तरह से बेचना चाहिए."

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हालांकि शाहरुख़ जोख़िम भी उठाते रहे हैं, साल 2011 में आई फ़िल्म 'रा.वन' एक साइंस फिक्शन फ़िल्म थी. शाहरुख़ ने इस फ़िल्म को बनाने में काफ़ी पैसा खर्च किया, हालांकि बॉक्स ऑफ़िस पर फ़िल्म उम्मीद के मुताबिक नहीं चली.
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