किसानों की मुश्किलें दूर करते व्हाट्स ऐप ग्रुप

- Author, श्वेता पांडेय
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
देश में इन दिनों कृषि को आगे लाने के लिए कुछ व्हाट्स ऐप ग्रुप सामने आए हैं, ताकि तकनीक की मदद से वे किसानों को फ़ायदा पहुंचा सकें और उपज भी बढ़ा सकें.
डिज़िटाइजेशन के दौर में देश के किसान भी अब पीछे नहीं हैं. ख़ुद को आगे लाने के लिए संचार क्रांति से जुड़ गए हैं. देश के कई इलाक़ों में अलग-अलग नाम से किसानों के व्हाट्स ऐप ग्रुप बन गए हैं.
ये ग्रुप किसानों को खेती में आने वाली दिक्क़तों से बचाने के साथ ख़ेती के नए तरीक़े भी बता रहे हैं.
इंजीनियरिंग के बाद खेती

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद खेती में रमने वाले अनिल बांडवाने ने भी इस साल की शुरुआत में ‘बलीराजा’ नाम का एक व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाया.

अपने ग्रुप के बारे में अनिल बताते हैं, “बलीराजा महाराष्ट्र में अनाज के राजा को कहा जाता है और किसान ही अनाज के राजा होते हैं."
अनिल ने आगे बताया, “अब तक हमने 10 ग्रुप बना लिए हैं और हर ग्रुप में क़रीब 100 लोग हैं. मुझे लगा कि किसान और तकनीक के बीच दूरी की वजह से वे उस तरह की पैदावर नहीं दे पाते, जो वो दे सकते हैं. ”
वो बताते हैं कि उनके साथ महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान भी जुड़े हैं. किसानों के अलावा इस ग्रुप में कई विशेषज्ञ भी मैजूद है.
अनिल बताते हैं कि ये ग्रुप नए तरीके की खेती की भी जानकारी देते हैं. अब किसानों को विदेशी सब्ज़ियां, जैसे ब्रॉकली, ज़ुकिनी आदि भी उगाने के तरीक़े बताए जा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश

आईसीएआर कानपुर के वैज्ञानिक डॉ. पुरुषोत्तम ने भी ‘पल्स क्रॉप’ नाम से व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाया है. उन्होंने इस ग्रुप को वर्ष 2014 में शुरू किया था, तब से लेकर आज तक वे छह सौ लोगों को इस ग्रुप से जोड़ चुके हैं.
बीबीसी से उन्होंने इसके बारे में बताया, "पहले किसानों के पास फोन ही नहीं हुआ करता था, लेकिन अब युवा पीढ़ी के पास स्मार्ट फ़ोन हैं, इसलिए सोचा कि क्यों न इसका सदुपयोग ही किया जाए."

लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए पुरुषोत्तम ने एक ओर तकनीक का सहारा लिया.
वे बताते हैं, “मैंने अपने फेसबुक पेज पर अपना मोबाइल नंबर डाला और यह मैसेज भी डाला कि मैं किसानों के लिए एक व्हाट्स ऐप ग्रुप शुरू करने जा रहा हूं, जो लोग इससे जुड़ना चाहते हैं, वो मेरे नंबर पर मैसेज करें."
इस दौरान उन्हें कई दिक्क़तें भी आईं. वो बताते हैं, "भारत के अलग-अलग राज्यों की भाषाएं अलग-अलग हैं, किसी को हिंदी समझ आती है, तो कोई अंग्रेजी में ही समझ पाता है. इससे निपटने के लिए मैंने पांच अलग-अलग ग्रुप बनाए. ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुंचा सकूं."
पंजाब

पंजाब के युवाओं को खेती में छुपी संभावनाओं से जोड़ने के लिए अमरीक सिंह ने ‘पंजाबी यंग इनोवेटिव फारर्मस एंड एग्रीप्रेन्योर्स’ नाम का व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाया है.
गुरुदासपुर के एडीओ (एग्रीकल्चर डेवलेपमेंट ऑफ़िसर) अमरीक सिंह कहते हैं कि पंजाब की ज़मीन ख़ेती के लिहाज़ से बहुत अच्छी है. लेकिन इसके बाद भी युवा पीढ़ी विदेशों की ओर जा रही है. इसके अलावा वे यह भी बताते हैं कि कृषि विभाग में भी ज़रूरत से कम लोगों को रखा गया है.

इस समस्या से निकलने के लिए उन्होंने व्हाट्स ऐप ग्रुप के बारे में सोचा. अमरीक इस ग्रुप में आब तक तीन सौ लोगों को जोड़ चुके हैं.
गुजरात

लक्ष्मण गांडवी गुजरात के कच्छ में कपास की खेती करते हैं. वे भी एक ऐसे ही ग्रुप का हिस्सा हैं, इस तरह के ग्रुप किसानों के लिए कितने फ़ायदेमंद साबित हो सकते हैं, इसके जवाब में वे कहते हैं, "फ़ायदा तो ज़रूर होता है, जहां एक समय समझ नहीं आता था कि अपनी समस्या के हल के लिए किसके पास जाएं, अब वो समस्या मोबाइल पर हल हो जाती है."

वहीं मध्यप्रदेश के शिवपुरी के किसान चंद्रशेखर पंडा का कहना है, “बदलाव के लिए शुरुआत ज़रूरी है. छोटी ही सही.” उन्होंने आगे कहा कि वे भी अब एक व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाएंगे.
लेकिन भारत के कई इलाक़ों में अभी भी किसान मोबाइल और इंटरनेट से जुड़े नहीं है. उन सबके लिए यह सुविधा दूर की कौड़ी है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













