कनिका, कैलाश जैसे हज़ारों जो आ रहे भारत

- Author, सुशांत एस मोहन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
भारत दुनिया की तेज़ रफ़्तार से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. इसका मतलब यह है कि नौकरी और करियर ग्रोथ के अवसर भी बढ़ रहे हैं.
इसके चलते ऐसे अप्रवासी युवा भारत की और लौट रहे हैं जो विदेश में बसने का मन बना चुके थे.
बीबीसी हिंदी ने भारत लौटे ऐसे ही कुछ अप्रवासी भारतीयों से बात की.
कनिका राजदेव
2 साल पेरिस और अन्य यूरोपीय देशों में काम कर चुकी कनिका राजदेव बीते साल भारत लौट आईं.

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यहां वह एक ऑनलाइन वाहन बिक्री वेबसाइट में बतौर वाइस प्रेज़ीडेंट काम कर रही हैं. कनिका रूमानिया में पेटीएम नाम की वेबसाइट के लिए काम करती थीं.
भारत आने पर न सिर्फ़ उनकी तनख्व्वाह में 20 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ बल्कि उन्हें पदोन्नति भी मिली.
वह कहती हैं, “जब मैं भारत से गई थी तो यहां मौके कम थे और प्रतियोगिता ज्यादा लेकिन आज मुझे मालूम है कि यहां मुझे करियर में अच्छा ख़ासा ग्रोथ मिलेगा.”
कैलाश साहनी
कनिका की ही तरह ख़ाड़ी देशों से बैंकिंग सेक्टर की नौकरी छोड़कर वापिस लौटे कैलाश साहनी भी हैं.

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उन्होंने भारत में अपना बिज़नेस शुरू किया है.
वह कहते हैं, “साल 2006 में जब में भारत छोड़ रहा था तब यहां पैसा लगाना रिस्की था लेकिन आज यह बाज़ार परिपक्व हो गया है और हमें अच्छे रिटर्न मिल रहे हैं.”
लेकिन क्या वाकई विदेश जाकर काम करना अब युवाओं की पहली पसंद नहीं रहा?
आंकड़े कहते हैं कि यह अब भी है. बीते कुछ सालों से भारत से विदेश जाने वालों की दर लगभग 13 फ़ीसदी बढ़ी है, लेकिन प्रवासी भारतीयों के वापिस आने के मामले भी तेजी से बढ़े हैं.
'100% बढ़ी नौकरियां'

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मुंबई में प्रवासी भारतीयों को जॉब आफ़र्स देने वाली कंपंनी सूत्रा एचआर के सीईओ वक़ार मानते हैं कि देश में नौकरियों का प्रतिशत 100 फ़ीसदी तक बढ़ा है और यह सिर्फ़ आईटी नहीं फ़ार्मा, बैंकिंग, टेक्सटाईल जैसे क्षेत्रों में है.
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ शंकर अय्यर कहते हैं, “मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि एक रिवर्स लहर चल पड़ी है लेकिन हां भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति बाहर काम कर रहे लोगों को आकर्षित कर रही है.”
वह कहते हैं, “ये करीब करीब 92 लाख़ करोड़ की अर्थव्यवस्था है जिसमें ऐसे लोगों के लिए सबसे ज्यादा मौके हैं जो खुद बिज़नेस करना चाहते हैं. भारत खुद एक बड़ा बाज़ार है और जब आपको अपने देश में अपनों के बीच मौका मिल रहा है तो कोई क्यों न अपनाए.”
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