एनआरआई को मिलेगा वोट का अधिकार

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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) को डाक मतपत्र का इस्तेमाल कर वोट करने का अधिकार दिए जाने की चुनाव आयोग की सिफ़ारिश उन्हें मंज़ूर है.
चीफ़ जस्टिस एचएल दत्तू और एके सीकरी की खंडपीठ ने केंद्र से कहा है कि वो ''इन सुझावों को लागू करने के लिए की जाने वाली कार्रवाई'' के बारे में सूचित करते रहें.
फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आठ हफ़्तों का वक़्त दिया है.
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने कहा, ''सुझाव और सिफ़ारिशें मान ली गई हैं अब उन्हें इससे जुड़े काम पूरा करने देने चाहिए. उन्हें जल्द ही इस काम को करने के लिए एक प्रक्रिया से होकर गुज़रना होगा.''
संशोधन

सरकार की स्थिति को एडिशनल सोलिसिटर जनरल पीएल नरसिम्हा ने स्पष्ट किया और कहा कि मौजूदा क़ानून में कुछ संशोधन किए जाने हैं जिसपर क़ानून मंत्रालय काम कर रहा है. चुनाव आयोग की सिफ़रिश को ध्यान में रखते हुए ये संशोधन किए जा रहे हैं.
पिछले साल नवंबर की 14 तारीख़ को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से चुनाव आयोग के सुझाव पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा था. जिसमें एनआरआई को ई-बैलेट या प्रॉक्सी वोटिंग के ज़रिए भारत में वोट करने के अधिकार की बात कही गई थी.
तब अदालत ने केंद्र को 12 सदस्यों वाली समिति की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए चार हफ़्तों का वक़्त दिया था. इस समिति की अध्यक्षता चुनाव उपायुक्त विनोद ज़ुत्शी ने की थी. जिसका मक़सद था 'प्रवासी मतदाताओं द्वारा मतदान के लिए वैकल्पिक विकल्पों की व्यावहारिकता की खोज'.
इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर ये प्रक्रिया व्यावहारिक, उपयोगी, मुक्त और माक़ूल मतदान के मक़सद को पूरा कर पाई तो इसे संसदीय चुनावों में परखा जाएगा.
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