आई विल बी बैकः अनुराग कश्यप

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'बॉम्बे वेलवेट' फ़िल्म सिनेमाघरों में बिल्कुल नहीं चली है. लगभग हर आलोचक ने फ़िल्म को ख़राब बताया है.
इस बीच अनुराग कश्यप ने फ़ेसबुक पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
पढ़िए अनुराग की प्रतिक्रिया :
समय आ गया है कि किताब को बंद किया जाए और आगे बढ़ा जाए. ये एक स़फर रहा मानो कि 'बॉम्बे वेलवेट' के साथ एक ज़िंदगी पूरी हुई.
कई लोग इससे कनेक्ट नहीं कर पाए और एक छोटी संख्या में लोग इससे जुड़ सके.
शायद कहानी कहने के तरीके से जो सदमा लगा है वो कम होगा और लोग अपने घरों के शांत वातावरण में फिर से इस फ़िल्म के बारे में सोचें तो उन्हें ज्यादा अच्छा लगे.
अफ़सोस नहीं

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हो सकता है कि कहानी कहने के तरीके के साथ हमने जो प्रयोग किए वो अधिकतर लोगों के लिए ठीक नहीं रहा लेकिन मैं अपनी फ़िल्म में पूरा यकीन रखता हूं.
ये फ़िल्म मैं बनाना चाहता था और मैं खुश हूं कि मैंने ये फ़िल्म बनाई.
मैं बहुत खुश हूं कि जो लोग इस फ़िल्म के बनाने के दौरान मुझसे जुड़े रहे वो आज भी मेरे साथ हैं.
मैं न तो डिप्रेशन में हूँ और न ही छुप रहा हूँ. इस फ़िल्म ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है और ये मेरी बेहत पसंदीदा फ़िल्मों में से है.
इस फ़िल्म को लेकर मुझे कोई अफ़सोस नहीं है.
मैं फॉक्स स्टार,फैंटम, विकास बहल और कई अन्य लोगों का शुक्रिया अदा करता हूं. (इस सूची में कई नाम हैं. सारे नाम यहां नहीं दिए गए हैं. अनुराग के मूल पोस्ट के लिए <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="https://www.facebook.com/anuragkashyap1972/posts/10154874883016515" platform="highweb"/></link> जाएं.)

मैं उन सभी लोगों का भी शुक्रिया अदा करता हूं जिन्हें मैं यहां अपने फ़ेसबुक पर खोज नहीं पा रहा हूं. आप सभी का शुक्रिया हमने मिल कर जो किया उसके लिए.
अगली मंज़िल की ओर
फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया बेहद सुंदर थी और हम इससे बेहतर ही होकर लौटे हैं. मैं समझता हूं कि मैं बहुत अमीर हूं क्योंकि मेरी ज़िंदगी में मेरे पास कई दोस्त और लोग हैं.
अब चला जाए अगली मंज़िल की तरफ़ और कुछ ज़बरदस्त किया जाए.
फ़िल्में मेरी सांसें हैं. मैं फ़िल्मों के लिए जीता हूं. मैं कहां जाता हूं और कहां रहता हूं इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, मैं फ़िल्में ही बनाऊंगा.
और हां, अभी मैंने फ़िल्में बनाने से हाथ खड़े नहीं किए हैं, अपने देश में अपने देश के बारे में. बाकी सब बस कुछ घुमाव हैं जीवन के.

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आप में से किसी को मेरी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. हमने बहुत कुछ देखा है.
फ़ैसलों के लिए स्वतंत्र
22 साल तक मुश्किल हालात और रिजेक्शन देखने के बाद मैं अब भी स्वतंत्र हूं अपने फ़ैसलों के लिए.
'बॉम्बे वेलवेट' बनाने में जो कुछ परेशानी हुई वो कुछ भी नहीं. वो एक याद है जीवन भर की.
मुझे आप सब से प्यार है और मैं आपका प्यार भी महसूस करता हूं. मेरी चुप्पी से परेशान न हों. मैं बिल्कुल ठीक हूं. हम सब मज़बूत लोग हैं.
तारीफें और आलोचना से मुझे फ़र्क नहीं पड़ता. फर्क पड़ता है कि मैदान में कौन खड़ा है.

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ये हम लोग हैं जो मैदान में उतरते हैं रिस्क लेते हैं. ये हम लोग हैं जो आसान रास्ता नहीं अपनाते.
ये हम लोग हैं जो खड़े रहकर शेरों का सामना करते हैं. हम लोग थे और हम हैं अपने ज़माने के ग्लैडियेटर्स. तो फिर खेल चलने दिया जाए.
जारी रखा जाए ख़ुद को बार-बार साबित करने का खेल, अपना सबसे बेहतर किया जाए और जैसा कि स्वार्जनेगर ने कहा था.....I WILL BE BACK.
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