मैं 'एंटी फ़ेमिनिस्ट' हूँ: अनुराग कश्यप

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- Author, वैभव दीवान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
एक ऐसा समय जब महिलाओं के सशक्तिकरण की बात ज़ोर शोर से की जाती हो और 'फ़ेमिनिज़्म' के नाम पर महिलाओं के हितों को मज़बूती से रखने का दावा किया जाता है.
ऐसे समय में किसी का ये कहना की मैं 'एंटी फ़ेमिनिस्ट' हूँ, इसे समझदारी कहना शायद मुश्किल ही हो.
लेकिन जाने-माने फ़िल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप ने ऐसा ही कहा और इसके पीछे उन्होनें तर्क भी दिया, "महिला सशक्तिकरण सिर्फ़ कोरी बातें हैं जब तक लोग इसे अपनाएँ नहीं. मैं इसे जिंदगी में अपनाना चाहता हूं क्योंकि बिना अपनाए और अपनी सोच में बदलाव लाए ये हो ही नहीं सकता".
अपनी बेटी का उदाहरण देते हुए अनुराग बताते हैं, "मेरी बेटी 13 साल की है लेकिन ज़िन्दगी के लिए उसे किसी सशक्तिकरण की ज़रुरत नहीं है. मैंने उसे सशक्त बनाया है और वो सब करने के लिए स्वतंत्र है."
अनुराग कहते हैं, "उसे अपने पिता (अनुराग) से कोई भी सवाल पूछने की आज़ादी है चाहे वो सवाल समाज के लिए कितना भी वर्जनीय क्यों न हो. इस खुलेपन से उसे आज़ादी और सशक्तिकरण दोनों मिलते हैं".
फ़िल्म 'फ़ेमिनिस्ट' है

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अनुराग भारत में एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म को प्रस्तुत कर रहे हैं जिसका नाम है 'वर्ल्ड बिफ़ोर हर'.
ये फ़िल्म भारत के परिदृश्य में बनी है और इस फ़िल्म के केंद्र में दो महिलाओं के किरदार हैं जो दो अलग-अलग समाजों का प्रतिनिधित्व करती हैं.
जहां एक तरफ मिस इंडिया बनने का ख़्वाब देखने वाली और मॉडर्न जिंदगी जीने वाली लड़कियों की जिंदगी का चित्र है तो दूसरी ओर भारत के छोटे शहर में एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन दुर्गावाहिनी के उसूलों पर चलती वॉलंटियर्स का नज़रिया.
फ़िल्म में एक ही देश के दो विरोधी समाजों को एक साथ पनपते दिखाया गया है.
(<link type="page"><caption> अनुराग के साथ रिश्ते पर चुप हुमा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/01/140106_huma_qureshi_rs.shtml" platform="highweb"/></link>)
महिलाओं की आकांक्षाओं पर आधारित ये फ़िल्म क्या स्त्रीवादी नहीं है?
अनुराग इसका जवाब देते हैं, "नहीं ये फ़िल्म स्त्रीवाद पर नहीं, सच्चाई पर आधारित है. हमारे समाज में दो विरोधी धाराएं एक साथ जी रही हैं और वही मैं दिखाना चाहता हूं. ये स्त्री की नहीं हमारी और हमारे खोखले समाज की कहानी है."
संघ से कोई रिश्ता नहीं है
फ़िल्म में दुर्गावाहिनी का ज़िक्र है तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जिक्र भी आना था. क्या ये फ़िल्म संघ पर आधारित या उसके ख़िलाफ़ है?
अनुराग इसकी संभावना से भी इनकार करते हैं, "ये पहली बार ज़रुर है कि किसी फ़िल्म में दुर्गावाहिनी कैंप के अंदर दी जाने वाली ट्रेनिंग को दिखाया गया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम इसके ख़िलाफ़ हैं. हर इंसान को उसके मनपसंद तरीके से जीने का अधिकार है और उन तरीकों को जज करने वाले हम कौन होते हैं. बस हम तो इन तरीकों को दिखा रहे हैं."
लेकिन ये पूछे जाने पर कि अब केंद्र में संघ की करीबी सरकार होने के बाद क्या उनको इस फ़िल्म की रिलीज़ पर ख़तरा मंडराता नज़र नहीं आता?
इस पर अनुराग कहते हैं, "फ़िलहाल तो मैं इस फ़िल्म को प्रस्तुत कर रहा हूं. इस फ़िल्म को पूरे विश्व में सराहा गया है. मैंने तीन दिन में तीन बार ये फ़िल्म देखी है और मुझे ये अच्छी लगी है तो बाकियों को भी लगेगी ऐसा मैं कह नहीं सकता हूं".
फ़िल्में असहज हैं लेकिन ग़लत नहीं

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अनुराग कश्यप की इस डॉक्यूमेंट्री को विवादित तो नहीं कह सकते लेकिन ये फ़िल्म जोखिम भरी ज़रूर है. अनुराग से पहले इस फ़िल्म को भारत में लॉन्च करने के लिए कोई निर्माता तैयार नहीं था.
लेकिन विवादित फ़िल्मों से अनुराग का लंबा रिश्ता है, उनकी फ़िल्म 'अग्ली', 'गैंग्स ऑफ़ वासेपुर', 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' जैसी फ़िल्में विवाद का विषय रही हैं और अब 'वर्ल्ड बिफ़ोर हर' भी विवादास्पद विषय पर है.
ऐसे में क्या वो सिर्फ़ विवादित फ़िल्मों से ही खुद को जोड़ना चाहते हैं?
(<link type="page"><caption> अनुराग-कल्कि के बीच दरार ?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2013/11/131114_mumbai_diary_anurag_kalki_pkp.shtml" platform="highweb"/></link>)
अनुराग कहते हैं, "नहीं मैं अपनी फ़िल्म में वो दिखाता हूं जो हमारे लिए सामान्य नहीं होता. थोड़ा असहज होता है और हमारे समाज कि एक खासियत है कि जो हमें असहज लगता है उसे हम ग़लत मान लेते हैं. लेकिन मैं इसी असहजता को तोड़ना चाहता हूं."
अनुराग अपनी जिंदगी में भी एक असहज दौर से गुज़र रहे हैं. वो और उनकी पत्नी कल्कि कोचलीन अलग-अलग रह रहे है.
लेकिन इस मुद्दे पर भी वो काफ़ी सहजता से बोले कि अब वो और कल्कि सिर्फ़ अच्छे दोस्त हैं.
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