'कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना'

इमेज स्रोत, BHIM RAJ GARG
- Author, श्वेता सिंह
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
फ़िल्म 'बहार' के गाने 'सैंया दिल में आना रे' में ख़ूबसूरत वैजयंती माला की अदाएं अगर लोगों को भूली नहीं तो साथ-साथ इस गाने में खनकती शमशाद बेगम की आवाज़ भी लोगों के ज़ेहन में बसी है.
23 अप्रैल को शमशाद बेगम की दूसरी पुण्यतिथि है और इस मौक़े पर बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत करते हुए वैजयंती माला ने कहा, "फ़िल्म बहार में उनकी आवाज़ और मेरे नृत्य का कॉम्बिनेशन लोगों को बड़ा पसंद आया था. मुझे बहार का एक और गीत, दुनिया का मज़ा ले लो बहुत पसंद है. मुझे अफ़सोस है कि इस फ़िल्म के बाद शमशाद जी की आवाज़ में मुझे पर्दे पर नृत्य करने का मौक़ा नहीं मिला."
नौशाद के साथ हिट जोड़ी

इमेज स्रोत, Shemaroo
1930 के दशक से शुरू होकर 1970 तक अपने बेहतरीन गीतों के जरिए शमशाद बेगम ने सिने प्रेमियों के दिलों पर राज किया.
उनकी खनकती हुई आवाज़ के ओ पी नैय्यर और नौशाद जैसे संगीतकार भी कायल थे.
नौशाद के साथ शमशाद बेगम ने बाबुल, मुग़ल-ए-आज़म, आन, बैजू बावरा और मदर इंडिया जैसी फ़िल्मों में गाने गाए.
नर्वस वहीदा को शमशाद का सहारा

इमेज स्रोत, WAHEEDA REHMAN
फ़िल्म सी आई डी में शमशाद बेगम का गाया गाना, 'कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना' बेहद मशहूर हुआ.
इस गाने को वहीदा रहमान पर फ़िल्माया गया.
वहीदा रहमान उस दौर को याद करते हुए कहती हैं, "उस समय मैं हिंदी सिनेमा में बुलकुल नई थी. इस गाने से पहले मैं बहुत नर्वस थी कि कैसे डांस करूँगी. लेकिन शमशाद बेगम ने जिस तरीके से उस गीत को गाया तो मुझे लिपसिंक करने में बिलकुल परेशानी नहीं हुई. इस गीत को शमशाद बेगम जी के लिए याद किया जाना चाहिए. मुझे इस बात का अफ़सोस है कि कभी उनसे मिल नहीं पाई. उनकी आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहेगी."
कामिनी कौशल
अभिनेत्री कामिनी कौशल अपनी फ़िल्म 'शबनम' के गाने 'ये दुनिया रूप की चोर' को याद करते हुए कहती हैं, "मुझे लगता है कि शमशाद बेगम जी अपने सुरों के माध्यम से जो दिखाना चाहती थी मैं उसे पर्दे पर सही तरीके से ट्रांसफर नहीं कर पाई. मेरे लिए उन्होंने बहुत गाने गाए. शमशाद जी ने उन गानों को बेहतरीन तरीके से गाकर ख़ूबसूरत बना दिया."

इमेज स्रोत, BHIM RAJ GARG
चार दशकों तक शमशाद बेगम की आवाज़ फिल्मी संगीत पर छाई रही. उन्हें संगीत में योगदान के लिए पद्मभूषण सम्मान दिया गया.
23 अप्रैल 2013 को वो दुनिया छोड़कर चली गईं.
<bold>(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












