मैं बेहद ख़राब अभिनेता हूं- ऋतिक रोशन

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अपनी पहली ही फ़िल्म कहो ना प्यार से ज़बरदस्त कामयाबी का स्वाद चखने वाले और फिर कोई मिल गया, क्रिश, धूम, जोधा अकबर और ज़िंदगी ना मिलेगी में बेहतरीन अभिनय के लिए वाहवाही पाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन अपने आपको अच्छा अभिनेता नहीं मानते.
ऋतिक कहते हैं, "मैं बेहद ख़राब अभिनेता हूं. किसी भी किरदार में अपने आपको ढालने के लिए मुझे ख़ासी मेहनत करनी पड़ती है. मुझे वो चरित्र ही बनना पड़ता है वर्ना मैं बिलकुल भी अभिनय नहीं कर पाता हूं."
ऋतिक ने बताया कि यही वजह है कि वे वही फ़िल्में चुनते हैं जो उनके व्यक्तित्व में निखार ला सकें, जो उन्हें नई चुनौतियों के लिए तैयार कर सकें. फ़िल्म जोधा अकबर भी उन्होंने इसलिए की.
"फ़िल्म जोधा-अकबर के वक्त मेरा व्यक्तित्व बिलकुल भी राजाओं जैसा नहीं था, मुझे शहंशाह अकबर का वज़नदार रोल करना था जो मेरी शख़्सियत से बिलकुल जुदा था. इसलिए मैंने एक चुनौती मानकर इस रोल को स्वीकार किया."
मुंबई स्थित अपने घर में अपनी आने वाली फ़िल्म अग्निपथ के सिलसिले में पत्रकारों से बात करते हुए ऋतिक ने ये बातें कहीं.
ऋतिक ने ये भी कहा कि वो अवॉर्ड्स के बारे में ज़्यादा नहीं सोचते और अपने परफॉर्मेंस से अगर वो लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकें तो इसे ही वो अपना पुरस्कार समझते हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि कई बार लोगों के और उनके सोचने में काफ़ी अंतर होता है.
ऋतिक ने बताया कि संजय लीला भंसाली की फ़िल्म ग़ुज़ारिश में उन्हें अपना अभिनय काफ़ी पसंद आया लेकिन फ़िल्म नहीं चली. उन्हें इसके लिए कोई अवॉर्ड भी नहीं मिला. जबकि कई ऐसी फ़िल्मों के लिए उन्हें अवॉर्ड्स मिले जो कि उनकी नज़र में उनका सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन नहीं था.
साल 2011 में ऋतिक रोशन की फ़िल्म ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा को अच्छी कामयाबी मिली थी.
ऋतिक कहते हैं, "ये फ़िल्म पूरी तरह से व्यवसायिक सिनेमा नहीं थी. फिर भी लोगों ने इसे पसंद किया. इसकी कहानी मुझे बहुत अच्छी लगी." ऋतिक रोशन कहते हैं कि लोगों की रुचियां बदल रही है. और दर्शक अलग तरह का सिनेमा भी स्वीकार कर रहे हैं जिसकी वजह से फ़िल्मकारों के पास अब बेहतर सिनेमा बनाने के ज़्यादा विकल्प हैं.
ऋतिक रोशन की फ़िल्म अग्निपथ 26 जनवरी को रिलीज़ हो रही है. जो 1990 की अमिताभ बच्चन अभिनीत अग्निपथ का रीमेक है. फ़िल्म में संजय दत्त ने खलनायक की भूमिका निभाई है.












