लता ने किया ओपी नैयर को याद

ओपी नैयर
इमेज कैप्शन, ओपी नैयर ने 50 और 60 के दशक में कई हिट फ़िल्मों में संगीत दिया

हिंदी सिनेमा के जाने-माने संगीतकार ओपी नैयर को उनके साथी बड़ी चाहत और इज़्ज़त से याद करते हैं.

फ़िल्म इंडस्ट्री में उन्होंने अपनी साख आर-पार, नया दौर, मेरे सनम और कश्मीर की कली जैसी फ़िल्मों से जमाई.

गायिका लता मंगेशकर से हुई बातचीत के अंश

ओपी साहब अब दुनिया में नहीं हैं. कैसे याद करती हैं उनको?

मुझे उनके चले जाने पर बहुत अफ़सोस हुआ. हमारे फ़िल्म जगत के बड़े जाने-माने नाम थे. उनका संगीत आज भी लोकप्रिय है.

ओपी नैयर की कौन सी धुनें आपको सबसे ज़्यादा याद आती हैं?

मुझे उनकी पहली फ़िल्म तो याद नहीं, उनकी बाद की फ़िल्मों के गाने बड़े अच्छे लगते हैं. मेरे सनम फ़िल्म का गाना जाइये आप कहाँ जाएँगे सुनने में बहुत अच्छा लगता है. आशा का गाया हुआ 'ये है रेश्मी ज़ुल्फ़ों का अंधेरा' भी बेहद लाजवाब है. उन्होंने न सिर्फ़ अच्छे गाने बनाये, वो गाए भी बहुत अच्छे गए. चाहे वो मोहम्मद रफ़ी हों, गीता दत्त या आशा भोंसले, सभी ने उनके गानों के साथ बहुत न्याय किया.

व्यक्तिगत तौर पर कैसे इंसान थे?

मैं उनको बहुत ज़्यादा नहीं जानती थी. कम ही मुलाक़ात हुई. हमने साथ काम भी नहीं किया. लेकिन ये ज़रूर है कि जब भी मिलते थे मुझसे बहुत प्यार से बात करते थे. एक बार उनके लिए गाने का मौका मिला तो मैं बीमार पड़ गई. तो उन्हें किसी और से गवाना पड़ा. उसके बाद न उन्होंने कभी बुलाया न मैं कभी गई.

क्या वजह है कि एक ही फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए आप दोनों ने कभी साथ काम नहीं किया?

उन्हें ये लगता था कि जिस तरह के गाने वो बनाते हैं मेरी आवाज़ में ठीक नहीं बैठते. मुझे भी ऐसा ही लगता था कि उनकी तरह के गाने मेरे गले से ठीक नहीं निकलते. उनका एक अलग ही अंदाज़ था. आशा और गीता ही उनके गाने अच्छे गाती थीं.

आपकी बहन आशा ने उनके लिए बहुत गाने गाए.

जी हाँ, आशा ने उनके लिये बहुत अच्छे गाने गाये. आशा ओ पी नैयर का स्टाइल समझ गई थी और उसी तरह गाती थी.

कैसे याद करना चाहेंगी ओपी साहब को?

इस फ़िल्म इंडस्ट्री में बहुत दिग्गज संगीतकार हुए हैं. ओपी नैयर का भी नाम उनमें बेशक आता है. उनको लोग कभी भूल ही नहीं सकते. मुझे लगता है जिस कलाकार का काम अच्छा होता है वो कभी ख़त्म नहीं होता है, वो हमेशा जीवित रहता है.