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83 विश्व कप को कैसे याद करती हैं स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर
- Author, वंदना
- पदनाम, भारतीय भाषाओं की टीवी एडिटर
सुरों की मलिका लता मंगेशकर में संगीत के अलावा जिस चीज़ के लिए जुनून है, वो है उनका प्रिय खेल क्रिकेट.
1983 का भारत-वेस्ट इंडीज़ क्रिकेट विश्व कप फ़ाइनल मैच लता मंगेशकर ने लॉर्डस के मैदान में देखा था. वो उस गौरवशाली पल की साक्षी बनी थीं. मैच से पहले पूरी टीम को लताजी ने खाने पर बुलाया था.
बाद में टीम के लिए पैसा जुटाने के लिए उन्होंने विशेष कॉन्सर्ट भी किया था जिसमें सब खिलाड़ियों ने उनके साथ गाना गाया था.
लता मंगेशकर ने विश्व कप से जुड़ी अपनी यादें बीबीसी के साथ बाँटी.
सवाल: 25 साल पहले लॉर्ड्स मैदान में आप भारत-वेस्टइंडीज़ फ़ाइनल की साक्षी थीं. आप लंदन में ही थीं उस समय. किस तरह का मंज़र था उस दिन?
जवाब: माहौल तो कमाल का था. हम लोग तो बहुत ज़्यादा तनाव में थे कि कौन जीतेगा, मैच किस तरफ़ जाएगा. मैंने पूरा मैच देखा था. फ़ाइनल मैच से एक दिन पहले मैंने भारतीय टीम को लंदन में ही अपने यहाँ बुलाया था, खाना खिलाया था और शुभकामनाएँ दी थीं.
सवाल: आपने कहा कि उस वक्त माहौल काफ़ी तनावपूर्ण था. आपको कब लगने लगा कि भारत मैच जीत सकता है?
जवाब: जैसे-जैसे मैच का आखि़री दौर आया, मुझे लगने लगा कि हम जीत सकते हैं. लेकिन आप तो जानती हैं कि क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. आप कुछ कह नहीं सकते हैं कि किस वक़्त पासा पलट जाए. लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं और हम लोग जीत गए
सवाल: मैच से पहले पूरी टीम आपसे मिली थी. उस समय टीम का मनोबल कैसा था?
जवाब: उस दिन टीम यही कह रही थी कि वे लोग जीतेंगे. मुझे याद है कि मैंने उनसे पूछा भी था कि आपको क्या लगता है. तब भी टीम को विश्वास था कि वो जीत जाएगी. आख़िरकर वो जीत भी गए, ये बहुत बड़ी बात थी.
सवाल: विश्व कप में जीत के बाद आपने खिलाड़ियों के लिए भारत में विशेष कॉन्सर्ट किया था पैसे जुटाने के लिए क्योंकि क्रिकेट बोर्ड के पास शायद उस समय इतने पैसे नहीं थे. उस कॉन्सर्ट की कोई यादें हैं?
जवाब: दरअसल मैं छुट्टियाँ मनाने के लिए 1983 के मई महीने में लंदन में थी और मेरे घर के लोग भी साथ में थे. लंदन में ही मेरी मुलाकात एनकेपी साल्वे साहब से हुई. जब भारतीय टीम जीत गई तो साल्वे जी ने मुझसे कहा कि वे लोग इस जीत पर एक बड़ा प्रोग्राम करना चाहते हैं और क्या मैं वो प्रोग्राम करुँगी. मैंने कहा ज़रूर करूंगी.
17 अगस्त को मैं दिल्ली गई और मैंने वो स्पेशल शो किया. उस शो में मुकेश भैया का बेटा नीतिन मुकेश था और सुरेश वाडेकर भी थे शायद. राजीव गांधी भी वहां उपस्थित थे. बड़ा अच्छा शो हुआ था. सबसे अच्छी बात थी कि एक गाना जो मेरे भाई ने बनाया था, मेरे साथ सारे क्रिकेट खिलाड़ियों ने वो गाना गाया था.
सवाल: उसी कॉन्सर्ट में सबने ये गानागाया था?
जवाब: हाँ. कॉन्सर्ट का अंत ही उस गाने से हुआ था.
सवाल: उन खिलाड़ियों में से वाकई में कोई अच्छा गाता था या फिर उनका कमाल बल्ले और गेंद पर ही चलता था?
जवाब: गाते हैं, क्यों नहीं. हमारे पुराने क्रिकेट खिलाड़ियों में से कई ऐसे हैं जो अच्छा गाते थे. विश्व कप जीतने वाली टीम में से भी कई गाते हैं. अभी मुझे ठीक से याद नहीं है पर मेरे पास सब फ़ोटो पड़े हुए हैं. सुनील गावस्कर थे, सब लोगों ने मेरे साथ खड़े होकर गाना गाया था.
सवाल: आपका पंसदीदा क्रिकेट खिलाड़ी कौन है?
जवाब: सभी खिलाड़ी अच्छे हैं लेकिन सचिन मुझे सबसे अच्छा लगता है. उस टीम में से सुनील गावस्कर सबसे अच्छे लगते थे और साथ ही कपिल देव भी. वैसे तो हमारे यहाँ सारे क्रिकेटर अच्छे हैं. द्रविड़ भी अच्छे हैं. हाँ, सबसे पंसदीदा सचिन है इसमें कोई शक़ नहीं. सबको पसंद है सचिन तो मैं क्यूँ पीछे रहूँ?
सवाल: अभी तो 20-20 का दौर है. आईपीएल के बारे में आपका क्या विचार है?
जवाब: ठीक है, मतलब हम तो उस ज़माने के लोग हैं जो टेस्ट क्रिकेट पसंद करते हैं या ज़्यादा से ज़्यादा वनडे क्रिकेट. अभी ये बीस ओवर वाला क्रिकेट निकला है. वैसे मैच देखते तो हैं हम लोग. चाहे बीस ओवर का खेल हो या फिर पांच ओवर का, मैच तो घर के सभी लोग देखते हैं. हमारे घर में जितने बच्चे हैं वो सब तो कहते हैं कि सचिन क्रिकेट के भगवान हैं. इतना प्यार करते हैं वो सचिन से.
(यह इंटरव्यू साल 2008 में लंदन में रिकॉर्ड किया गया था. उस साल भारत को पहला विश्व कप जीते 25 साल पूरे हुए थे.)
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