सोनू निगम के म्यूज़िक माफ़िया वाले बयान पर बंटी बॉलीवुड की म्यूज़िक इंडस्ट्री

सोनू निगम

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    • Author, मधु पाल
    • पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिन्दी के लिए

फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज़्म का मुद्दा एक बार फिर से उठा है. बॉलीवुड से जुड़े कई लोगों ने सामने आकर अपनी बात रखी है. कई सितारों और निर्देशकों ने गुटबाज़ी की बात कही है. सोशल मीडिया के ज़रिए भाई-भतीजावाद के आरोप भी लगाए गए हैं.

ये मुद्दा उस वक़्त और गरमाया गया जब जाने-माने सिंगर सोनू निगम ने कहा, "म्यूज़िक इंडस्ट्री में भी अगर गुटबाज़ी ख़त्म नहीं हुई तो यहां से भी कोई बुरी ख़बर आ सकती है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर वीडियो ज़ारी कर कहा कि फ़िल्मों से बड़ा है म्यूज़िक माफ़िया. म्यूज़िक इंडस्ट्री में जो नए बच्चे आए हैं, वो परेशान हैं. म्यूज़िक इंडस्ट्री के दो लोगों के हाथों में ताक़त है, जिनकी कंपनी है, जो फ़ैसला करते हैं कि इस सिंगर को लो, दूसरों को नहीं. आप लोग ऐसा मत करो. बददुआ बुरी चीज़ होती है."

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उनके इस वीडियो के बाद म्यूज़िक इंडस्ट्री से कई बड़े नामों ने उनका समर्थन किया जैसे अदनान सामी, सोना महापात्रा, मोनाली ठाकुर, गीतकार समीर, संगीतकार और पार्श्वगायक सलीम मर्चेंट और अलीशा चिनॉय. लेकिन वहीं, कुछ लोगों ने इस बात से इनकार भी किया कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में म्यूज़िक माफ़िया जैसी कोई चीज़ भी काम करती है.

सोनू निगम ने टी-सीरीज के मालिक भूषण कुमार पर जो इलज़ाम लगाए हैं, उन्हें नकारते हुए भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला कुमार ने भी एक वीडियो ज़ारी कर अपना पक्ष रखा है.

दिव्या खोसला कुमार ने कहा, "कुछ दिनों से सोनू निगम जी टी-सीरीज और भूषण कुमार के ख़िलाफ़ कैंपेन चला रहे हैं. मैं कहना चाहती हूं कि टी-सीरीज ने आज तक हजारों कलाकारों को ब्रेक दिया है, जो बाहरी हैं, इंडस्ट्री से नहीं जुड़े हैं. मैंने खुद अपनी फिल्म यारियां में 10 न्यूकमर्स को मौका दिया था, जिनमें से रकुलप्रीत, नेहा कक्कड़ और हिमांशु कोहली बड़े कलाकार हो चुके हैं."

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समीर की शिकायत

सोनू निगम की शिकायत को जाने-माने गीतकार समीर वाजिब बताते हैं.

वो कहते हैं, "जी हाँ, ये होता है. मैं कई सालों से काम कर रहा हूँ. पहले बहुत सारी म्यूज़िक कम्पनियां हुआ करती थीं लेकिन अभी गिनकर सिर्फ दो ही कंपनियाँ हैं जिसका प्रभाव लोगों पर पड़ने लगा है. पहले ये प्रभाव समझ नहीं आता था. टिप्स, बालाजी, वीनस और सोनी जैसी और भी कंपनी थी लेकिन अब वो म्यूज़िक में इतना काम नहीं कर रही हैं."

"इसलिए ये बात पूरी तरह से सही है कि एक गुट है जो माफ़िया की तरह काम कर रहा है और उन्हें जो पसंद है वो वही कर रहे हैं. वो मौका भी उन्हीं को देते हैं जिन्हें वो पसंद करते हैं. इसकी वजह से अच्छा टैलेंट वहां नहीं पहुंच पाता है, जहां उन्हें पहुंचना चाहिए."

समीर
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गीतकारों की ये शिकायत रही है कि अच्छे और हिट गीत लिखने के बाद भी उन्हें वो मौके नहीं मिलते, जिसके वो हकदार होती है. ऐसे में ये सवाल उठने लाज़िम हैं कि इसकी वजह क्या है?

समीर कहते हैं, "यही तो दुर्भाग्य है, इसी का रोना है, एक बार जिसने अच्छा काम किया है, वो हज़ार बार भी अच्छा ही काम करेगा. मजरूह सुल्तानपुरी, हरसत जयपुरी और भी कई बड़े लोग आख़िरी सांस तक लिखते रहे लेकिन आज जब मौका ही नहीं दिया जाएगा तो काम कैसे करेंगे?"

"जबकि ये लोग मेरे कई गाने उठा कर रीक्रिएट कर रहे हैं, अँखियों से गोली मारे... या दिलबर दिलबर..., दुर्भाग्य ये है कि अभी हम हैं, उसके बाद भी हमसे ना लिखवाकर हमारे ही गाने को किसी और से लिखवाया जा रहा है. जिस आदमी ने पूरा गाना लिखा तो क्या रीक्रिएट करते वक़्त वो और नई चार लाइन नहीं लिख सकता क्या? पता नहीं उन्हें क्या तकलीफ़ है. उन्होंने हमें बॉयकॉट ही कर दिया है. काम ही नहीं करना उनको हमारे साथ."

"हमारे यहाँ एकता की सबसे बड़ी समस्या है. आज भी कुछ लोग उनके समर्थन में खड़े हैं और ये वो ही चार लोग हैं जो उनके साथ काम करते आ रहे हैं. लेकिन अगर हर बार उन्हीं चार लोगों को काम देते रहेंगे तो चार हज़ार लोग कहाँ जाएंगे. आप काम सबके साथ करो, आपकी पसंद के ऊपर है. आपको पसंद आए तो करो, मगर आप सुनने को ही तैयार नहीं हैं और ना ही काम देने को. अगर आपको मेरा गाना पसंद है तो फिर काम देने में क्या परेशानी है."

म्यूज़िक इंडस्ट्री पर कंट्रोल

सलीम मर्चेंट, सुलेमान मर्चेंट

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सोनू निगम का पक्ष लेते हुए संगीतकार और पार्श्वगायक सलीम मर्चेंट कहते हैं, "इसमें कोई शक नहीं है. ये बिलकुल सही है कि बॉलीवुड में म्यूज़िक माफिया काम करती है. मेरे साथ हो चुका है, इसलिए मैं इस बात को स्वीकार करता हूँ. "

"दो साल पहले मैं एक निर्देशक के लिए काम कर रहा था. मैं उस निर्देशक का नाम नहीं लेना चाहता क्योंकि वो अभी एक बड़ी फ़िल्म कर रहा है. मैं नहीं चाहता कि मेरे वजह से उसका काम छीन लिया जाए. जब वो मेरे पास आए थे तो मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी थी. बहुत अच्छी फ़िल्म लिखी थी लेकिन उनके पास म्यूज़िक का बजट नहीं था. उसकी कहानी में दम था और वो मेरा अच्छा दोस्त है इसलिए मैंने उसके साथ काम शुरू किया और चार गाने बनाए और तीन गाने तो रिकॉर्ड भी कर लिया था. उस फ़िल्म में एक बड़े एक्टर को छोटा सा किरदार निभाना था. उस बड़े एक्टर को गाने बहुत पसंद आए."

सलीम मर्चेंट का कहना है कि इसके बाद एक्टर और उनके डायरेक्टर दोस्त फिल्म को प्रोड्यूस कराने के लिए एक म्यूज़िक कंपनी के पास ले गए. लेकिन वहां जाकर तस्वीर बदल गई.

वे कहते हैं, "उन्होंने हाँ भी किया लेकिन फिर उन्होंने मुझे हटा कर अपने आर्टिस्ट को रख लिया. ये उन्हीं के पांच-छह म्यूज़िक डायरेक्टर हैं और वो हमेशा उन्ही को मौका देते आए हैं."

लेकिन कभी-कभी इन बाधाओं के बावजूद भी मौके मिल जाते हैं पर इसकी वजहें कुछ और होती हैं.

सलीम मर्चेंट आगे कहते हैं, "कई बार जब कोई बड़ा एक्टर या डायरेक्टर चाहता है कि वो किसी और से गाने बनवाए या गवाये तो फिर ये लोग उनकी बात टाल नहीं पाते हैं और बिना किसी छेड़खानी के काम करने देते हैं."

"ये माफ़िया और भी ताकतवर और मजबूत हो चुका है जिसके चलते वो बहुत सी चीज़ें कंट्रोल करते हैं. मैं उनका शिकार हुआ. मेरे गाने उन्होंने निकाल दिए. मेरा फिल्ममेकर दोस्त बेचारा बहुत पछतावा करने लगा. हमारे साथ हुआ है तो उन लोगों के साथ भी ज़रूर हुआ होगा जिन्होंने अभी इंडस्ट्री में ज़्यादा काम नहीं किया है."

'ये एक खूबसूरत इंडस्ट्री है...'

लेकिन ऐसा नहीं है कि म्यूज़िक इंडस्ट्री के सभी लोग सोनू निगम, समीर या फिर सलीम मर्चेंट की बात से सहमत ही हैं. इनसे अलग राय रखने वाले दूसरे लोग भी हैं.

गीतकार मनोज मुंतशिर फ़िल्म 'एक विलेन' में 'गलियां...', 'रुस्तम' के लिए 'तेरे संग यारा....', 'एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' में 'कौन तुझे...', 'केसरी' के लिए 'तेरी मिट्टी...' जैसे कई सफल गीतों के बोल लिख चुके हैं.

मनोज कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि म्यूज़िक इंडस्ट्री में कोई म्यूज़िक माफ़िया जैसी चीज़ भी काम करती है. जिस तरह से कई चीज़ों को पेश किया जा रहा है, यहां उतना अंधेरा नहीं है, जितना कि बताया जा रहा है. रही बात टैलेंट के स्ट्रगल की तो ये स्ट्रगल शुरू से ही था और हमेशा से रहेगा.

"ये एक अफवाह है कि जो लोग बाहर से आते हैं, उन्हें काम नहीं मिलता है. जो लोग बाज़ी हार चुके हैं, वो ही ऐसा कहते हैं. इस तरह की अफवाहों से हमें ही नुक़सान हो रहा है. ये सब करके हमने लोगों के बीच एक डर पैदा कर दिया है. "

मनोज मुंतशिर

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"परेशानी ये है कि हमने अब लोगों को डरा दिया है, ये कहकर कि यहाँ आप आओगे तो मर जाओगे, फांसी लगा लोगे. ये कोई जहन्नुम इंडस्ट्री नहीं है. ये एक खूबसूरत इंडस्ट्री है और अगर आपके पास प्रतिभा है तो आपको मौक़ा ज़रूर दिया जाएगा."

मनोज मुंतशिर कहते हैं, "अगर कोई कहता है कि मैंने बहुत कुछ झेला है. मझे इस बात का दुःख है लेकिन ये तकलीफ तो हर क्षेत्र में है. संघर्ष भी हर क्षेत्र में है. इसका मतलब ये नहीं कि बाहर के लोगों के लिए दरवाज़े बंद हैं. ये एक बिज़नेस है. मान लो मैं एक प्रोडूसर हूँ और म्यूज़िक कंपनी का मालिक भी हूँ और मुझे ज़रूरत है अच्छे टैलेंट की तो मैं क्यों नहीं लूंगा. मैं ज़रूर लूंगा."

"छोटे शहरों से आप मुंबई ट्रेन पकड़ कर आते हो और आपके पास है कुछ देने के लिए तो लोग खड़े हैं, उसे लेने के लिए. इंडस्ट्री में आज भी टैलेंट की कमी है. बस दिक्कत ये है कि आप टैलेंट लेकर नहीं आते हो, आप अपने आपको मानसिक तौर पर मज़बूत नहीं करते हो. आपको किसने बोला कि आप यहाँ आओ और आपके कदमों के लिए फूल बिछा दिए जाएंगे. "

"मुंबई में भूखा तो सोना पड़ेगा, फुटपाथ पर भी रहना पड़ेगा. ये सब तो मैंने भी किया है. इसका मतलब ये नहीं कि मैं भी उठकर बोलने लगूं कि इंडस्ट्री ने फुटपाथ पर रखा. हाँ रखा है तो आज यही इंडस्ट्री मुझे ऑडी से भी घुमा रही है. सब कुछ रातों रात नहीं बदलता. वक़्त लगता है."

"मैं 1999 में आया था मुंबई, लेकिन 2014 में मेरा पहला गाना फिल्म 'एक विलेन' का हिट हुआ. तो क्या मैं इन 15 सालों की शिकायत करूं या संघर्ष करूं, ये आपकी अपनी व्यक्तिगत राय है कि आप किसे चुनते हैं और मैंने संघर्ष को चुना है, शिकायतें नहीं."

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