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मतभेदों के बीच जी-20 की बैठक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शनिवार को दक्षिण लंदन के हॉरशैम में होने वाली धनी और विकासशील देशों के संगठन जी-20 की बैठक से पहले वित्त मंत्रियों के बीच मतभेद उभर आए हैं. अगले महीने लंदन में ही जी-20 की शीर्षस्तरीय बैठक होने वाली है. सदस्य देशों के वित्त मंत्री इस बैठक के लिए एजेंडा तय करेंगे. लेकिन सदस्य देशों के वित्त मंत्री आर्थिक गिरावट से निपटने पर मतभेदों के बीच मुलाक़ात कर रहे हैं. अमरीका विकास को बढ़ाने के लिए और ज़्यादा ख़र्च करने पर ज़ोर दे रहा है जबकि कुछ यूरोपीय देश वित्त बाज़ार को चलाने वाले नियमों के बदलाव पर ज़ोर दे रहे हैं. बीबीसी संवाददाता मार्क गिरिगोरी का कहना है कि अमरीका और ब्रिटेन दूसरे देशों ख़ासकर यूरोपीय देशों से और अधिक पहल की उम्मीद रखते हैं ताकि उनकी अर्थव्यवस्था को इस मंदी से बाहर निकाला जा सके. हमारे संवाददाता का कहना है कि यूरोपीय देशों की सरकारों ने यह संकेत दिया है कि वह और अधिक ख़र्च करके अपनी वित्तीय प्रणाली पर बोझ डालने को उस वक़्त तक राज़ी नहीं हैं जब तक कि वह अपने पहले दौर के सुधार लाने की योजनाओं का नतीजा नहीं देख लेते. ब्रितानी प्रतिनिधि अलिस्टेयर डार्लिंग ने जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले के मतभेदों को ख़ारिज कर दिया है. डार्लिंग ने बीबीसी से बात करते हुए कहा “मेरे विचार से हम लोग सारे मुद्दों पर आम तौर से सहमत हैं.” उन्होंने कहा अगर एक कमरे में 20 लोग होंगे तो उन्में मतभेद भी होंगे. हर देश को अपनी अर्थव्यवस्था कै बारे में फ़ैसला करना है.” जी-20 में दुनिया की बड़े औद्योगिक और विकासशील देश शामिल हैं जो विश्व की 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था बनाते हैं. आईएमएफ़ में बढ़ोतरी संवाददाताओं का कहना है कि जी-20 देशों के वित्त मंत्री यह संकेत देना चाहते हैं कि वे एक साथ मिलकर पिछले 80 वर्ष में आने वाले सबसे गहरे आर्थिक संकट ने निपटने जा रहे हैं. जापानी वित्तमंत्री काउरू योसानो ने कहा “वर्तमान संकट को कोई देश अकेला हल नहीं कर सकता. सबको मिलकर वित्तीय सेक्टर का पुनर्निर्माण करना है और आर्थिक प्रोत्साहन देना है.” इस बैठक में बैंकों में कड़े नियम लाने पर भी ज़ोर डाले जाने की उम्मीद है. इस सिलसिले में कुछ पहल भी हुई है. स्विटज़रलैंड, ऑस्ट्रिया और लक्ज़ेम्बर्ग ने शुक्रवार को कहा है कि वे अपने बैंकों के गुप्त नियमों में कुछ ढ़ील दे रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की फ़ंडिंग में बढ़ोतरी भी इस एजेंडे में शामिल है. अमरीकी वित्त मंत्री टिम गाइथनर ने आईएमएफ़ के ख़ज़ाने को तीनगुना कर के 750 अरब अमरीकी डॉलर करने का प्रस्ताव रखा है ताकि इस संकट में घिरे देशों की सहायता सुनिश्चित की जा सके. जापान ने पहले ही 100 अरब डॉलर की पेशकश कर दी है. यूरोपीय यूनियन ने 500 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी की बात कही है और वह 100 अरब डॉलर के क़र्ज़े पर विचार कर रहा है. बहरहाल, ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन जिन्हें ब्रिक देश के तौर पर जाना जाता है उन्होंने कहा है कि वे और अधिक नक़द नहीं देंगे जब तक कि उन्हें और वोटिंग शक्ति नहीं दी जाती है. याद रहे कि आईएमएफ़ के वोटिंग ढांचे में अमरीका और यूरोप को ज़्यादा हक़ हासिल है. | इससे जुड़ी ख़बरें स्विस बैंकों के खाते अब 'गोपनीय नहीं'13 मार्च, 2009 | कारोबार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट गहराया09 मार्च, 2009 | कारोबार 'सरकार आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाए'27 जनवरी, 2009 | कारोबार कई बड़ी कंपनियों में कटौतियां26 जनवरी, 2009 | कारोबार महंगाई दर छह फ़ीसदी से कम हुई 09 जनवरी, 2009 | कारोबार आर्थिक संकट पर चर्चा करेगा जी-20 15 नवंबर, 2008 | कारोबार 'थोड़ी प्रगति हुई, बहुत बाक़ी है'15 नवंबर, 2008 | कारोबार मंदी से निपटने की कार्ययोजना बनेगी15 नवंबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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