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सोमवार, 09 मार्च, 2009 को 10:42 GMT तक के समाचार
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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट गहराया
बैंक
चिंता की बात ये है कि आर्थिक गतिविधियों के लिए कर्ज़ मिलना मुश्किल हो गया है
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार वैश्विक औद्योगिक उत्पादन घटेगा और मंदी का भारत समेत अन्य विकासशील देशों पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा.

विश्व बैंक का अनुमान है कि विश्व का सकल आर्थिक उत्पाद यानी जीडीपी संभावित क्षमता से पांच प्रतिशत नीचे रहेगा.

बैंक का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का विकासशील देशों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा.

विश्व बैंक के पूर्वानुमान के अनुसार विकासशील देशों को इस साल 270 अरब डॉलर से 700 अरब डॉलर के कर्ज़ की कमी महसूस होगी.

इसका कारण यह है कि निजी क्षेत्र की वित्तीय संस्थाएं उभरते हुए बाज़ारों को कर्ज़ देने से बचने लगी हैं.

बैंक का कहना है कि वित्तीय संकट का समाना कर रहे कमज़ोर देशों में केवल एक-चौथाई देश ऐसे है जो अपने यहां गरीबी बढ़ने से रोकने के लिए संसाधन जुटा सकते हैं.

वैश्विक स्तर पर 116 विकासशील देशों में से 94 देशों की आर्थिक वृद्धि दर गिरी है.

इसमें से 43 देशों में गरीबी अधिक है. हाल के समय में मंदी से अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र मूल रूप से शहरी इलाक़ों में केंद्रित हैं. इनमें निर्यात, निर्माण और खनन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

भविष्य और ख़राब

रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर के देशों के बीच परस्पर व्यापार भी अस्सी वर्षों के निचले स्तर पर पहुँच सकता है.

विश्व बैंक के पूर्वानुमानों के मुताबिक 2009 के मध्य तक वैश्विक औद्योगिक उत्पादन वर्ष 2008 के स्तर से 15 फ़ीसदी कम हो सकता है.

यह रिपोर्ट शनिवार को जी 20 देशों के वित्तमंत्रियों और इन देशों के केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक में पेश की जाएगी.

रिपोर्ट में भारत में बेरोज़गारी का ज़िक्र किया गया है. पिछले वर्ष अक्तूबर से दिसंबर के बीच भारत में पाँच लाख लोगों की नौकरियाँ जा चुकी हैं.

ज़्यादातर नौकरियाँ रत्न-आभूषण, ऑटो औक कपड़ा उद्योगों में गई हैं.

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