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ब्रिटेन में ब्याज दर 0.5 फ़ीसदी हुई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने ब्याज दर घटाकर 0.5 फ़ीसदी कर दी है. बैंक की ये अब तक की सबसे कम दर है. जबकि यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) ने ब्याज दर दो फ़ीसदी से घटाकर 1.5 फ़ीसदी कर दी है. अक्तूबर के बाद से बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने ब्याज दर छह बार घटाई है. फ़रवरी में इसे घटाकर एक फ़ीसदी किया गया था. मंदी का दौर शुरू होने से पहले पिछले वर्ष अक्तूबर में ब्याज दर पाँच प्रतिशत थी. अर्थशास्त्री इयन मैकफ़र्टी का कहना है, "ब्याज दर घटाने से अब अर्थव्यवस्था पर असर ख़ास नहीं हो रहा है. दर 0.5 फ़ीसदी करने से उपभोक्ताओं का भरोसा थोड़ा बढ़ेगा लेकिन उससे कोई बहुत बड़ा असर पड़ने वाला नहीं है."
उधर बिज़नेस गुटों ने बार-बार ब्याद दर घटाने की आलोचना की है. उनका कहना है कि बैंक अब भी उधार देने को ख़ास उत्सुक नहीं है वहीं वो लोग जो पैसे को बैंकों में बचत के लिए रखे हुए हैं, उन पर बुरा असर पड़ रहा है. बैंक ऑफ़ इंग्लैंड का कहना है कि अर्थव्यवस्था में नई जान फूँकने के लिए वो पैसे की सप्लाई बढ़ाएगा. बैंक का कहना है कि वो करीब 75 अरब पाउंड प्रणाली में डालेगा ताकि बाकी बैंक उधार दे सकें. इसे क्वांटिटेटिव इज़िंग कहा जाता है, ब्रिटेन में इसे कभी आज़माया नहीं गया है. शुरु में तो बैंक 75 अरब पाउंड डालेगा लेकिन वित्त मंत्री एलिस्टन डार्लिंग ने 150 अरब पाउंड तक पैसा डालने की अनुमति दी है. क्वांटिटेटिव इज़िंग को कभी-कभी प्रिटिंग मनी भी कहा जाता है जो ग़लत है क्योंकि बैंक ऑफ़ इंग्लैंड पैसी की सप्लाई नए बैंकनोट छापकर नहीं बढ़ाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें आर्थिक संकट से निपटने पर सहमति01 मार्च, 2009 | कारोबार ब्रिटेन में बैंकों के कामकाज की जाँच08 फ़रवरी, 2009 | कारोबार ब्रिटेन में ब्याज दर न्यूनतम स्तर पर08 जनवरी, 2009 | कारोबार ब्रिटेन में भी आर्थिक पैकेज की घोषणा24 नवंबर, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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