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रविवार, 01 मार्च, 2009 को 17:55 GMT तक के समाचार
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आर्थिक संकट से निपटने पर सहमति
यूरोपीय नेता
यूरोपीय नेताओं ने लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था सुधरने का भरोसा जताया
वैश्विक वित्तीय संकट पर यूरोपीय देशों की एक अहम बैठक में आर्थिक प्रोत्साहन जारी रखने पर सहमति बनी है और भरोसा दिलाया गया है कि लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर लौटेगी.

ब्रुसेल्स में ख़त्म हुई इस बैठक में पूर्वी और मध्य यूरोप के देश दोहरे संदेश के साथ शामिल हुए.

एक तरफ़ तो इस आर्थिक मंदी से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए हंगरी और लातविया जैसे देशों ने अपने साथी देशों को विश्वास दिलाया कि उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह मज़बूत है.

वहीं दूसरी ओर उन्हें पश्चिमी यूरोप और यूरोपीय संघ से ये आश्वासन चाहिए था कि अगर ये आर्थिक तूफ़ान अनुमान से लंबे समय तक चलता है या और बुरा होता है तो उन्हें उन देशों का पूरा समर्थन मिलेगा.

हंगरी के प्रधानमंत्री फ़ेरेंट्ज़ ज़्यूराचानी ने इस बैठक की पूर्व संध्या पर अपने देशवासियों को इस बात का भरोसा दिलाया था कि उनके पास 40 अरब यूरो का कोष है.

मगर ब्रसेल्स में उन्होंने पूर्वी यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था के लिए 180 अरब यूरो के प्रस्ताव की माँग की और ये राशि अभी प्रस्तावित राशि का दस गुना है.

मदद की माँग

हंगरी के प्रधानमंत्री का कहना था कि इसका इस्तेमाल बैंकों को धन मुहैया कराने के लिए किया जाएगा जिससे इस पूरे क्षेत्र में देशों को फ़ायदा हो और उन्हें धन उपलब्ध हो सके.

इस बैठक में यूरोपीय नेताओं ने आर्थिक संकट से बचने के लिए संरक्षणवाद की नीति को ग़लत ठहराया.

 बेहतर नियमन होना चाहिए, बैंकिंग प्रणाली पर नज़र रखी जानी चाहिए मगर संरक्षणवाद नहीं होना चाहिए.
गॉर्डन ब्राउन

ब्रितानी प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने यूरोपीय संघ के सदस्य देशों से बैंकिंग क्षेत्र और विश्व अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास क़ायम करने के लिए क़दम उठाने पर ज़ोर दिया.

उनका कहना था, " बेहतर नियमन होना चाहिए, बैंकिंग प्रणाली पर नज़र रखी जानी चाहिए मगर संरक्षणवाद नहीं होना चाहिए. आर्थिक पैकेज दिए जाने चाहिए मगर हमारे वित्तीय संस्थानों में यथास्थिति बनाए रखने जैसी चीज़ स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए."

अक्तूबर में जब से इस आर्थिक संकट का असर व्यापक हुआ है पूर्वी यूरोपीय देशों में नगदी का संकट बढ़ा है.

चेक गणराज्य या पोलैंड जैसी मज़बूत अर्थव्यवस्थाएँ ख़ुद को अपेक्षाकृत कमज़ोर अर्थव्यवस्थाओं के साथ नहीं जोड़ना चाहतीं.

मगर इस क्षेत्र से बाहर के विश्लेषकों का मानना है कि दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाएँ एक साथ ही देखी जाएँगी और एक व्यापक कार्यक्रम से मज़बूत और कमज़ोर दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं को एक जैसा फ़ायदा होगा.

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