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मंदी के असर पर चर्चा के लिए सम्मेलन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया में छाई आर्थिक मंदी का विकासशील देशों पर पड़ने वाले प्रभाव के विश्लेषण के लिए सोमवार को लंदन में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है. उल्लेखनीय है कि दुनिया के धनी और विकासशील देशों के समूह, G-20 की भी बैठक अगले महीने लंदन में होने वाली है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सामानों की घटती क़ीमत, कारोबार में कमी और बाज़ार में नक़दी का अभाव विशेष रूप से अफ़्रीका में विकास के लिए ख़तरा बन गया है. सम्मेलन के दौरान संभव है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन उस पहल के प्रति ब्रिटेन की प्रतिबद्धता की बात करें जिसमें विकसित देशों ने बैकों को बदहाली से निकालने के लिए जो सरकारी सहायता पैकेज राशि दी है उसका एक हिस्सा ग़रीब देशों के लिए अलग से रखने की बात है. उधर विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का भारत समेत अन्य विकासशील देशों पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा. वैश्विक स्तर पर 116 विकासशील देशों में से 94 देशों की आर्थिक वृद्धि दर गिरी है. | इससे जुड़ी ख़बरें आर्थिक संकट से निपटने पर सहमति01 मार्च, 2009 | कारोबार 'ग़रीब देशों पर मंदी की मार शुरु'04 मार्च, 2009 | कारोबार वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट गहराया09 मार्च, 2009 | कारोबार बढ़ी बेरोज़गारी, गिरे बाज़ार06 मार्च, 2009 | कारोबार '20 हज़ार भारतीयों ने नौकरियाँ गँवाईं'26 फ़रवरी, 2009 | कारोबार 'नए साल का तोहफ़ा भयानक था'06 मार्च, 2009 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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