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अब दान-पुण्य पर ज़्यादा ध्यान देंगे गेट्स | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के शीर्ष धनकुबेरों में शुमार बिल गेट्स कम्प्यूटर सॉफ़्टवेयर बनाने वाली अपनी कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट की बजाय अब दान-पुण्य के काम में ज़्यादा समय देंगे. वे कंपनी के चेयरमैन हैं और इस पद पर बने भी रहेंगे लेकिन रोज़-रोज़ के काम की बजाय अब वे ख़ास तकनीकी परियोजनाओं को ही समय देंगे. धरती के धनकुबेरों के बीच लंबे समय तक पहले पायदान पर रहे गेट्स की तरह ही उनकी कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट भी दुनिया भर की सॉफ़्टवेयर बनाने वाली कंपनियों में सबसे ऊपर है. व्यक्तिगत कम्प्यूटरों के लिए सॉफ़्टवेयर बनाकर अपनी तक़दीर बनाने वाले गेट्स की योजना है कि इससे निकलने वाला समय वे अब समाजसेवा के कार्यों में लगाएँगे. गेट्स पहले भी दान-पुण्य का काम करते रहे हैं और इसके लिए विधिवत उनके नाम पर एक संस्था 'बिल एंड मेलिंडा गेट्स फ़ाउंडेशन' काम भी करती है. जवानी की दहलीज़ के दिनों में गेट्स ने सपना देखा था कि हर घर में हर टेबल पर एक व्यक्तिगत कम्प्यूटर हो. वे कहते हैं कि उन्हें भविष्य की रोशनी यहीं से दिखी और उन्होंने जो देखा, उसे पूरा किया. सिएटल के एक सफल वकील परिवार में पैदा हुए गेट्स ने महज 13 साल की उम्र में कम्प्यूटर के लिए पहला सॉफ़्टवेयर तैयार कर दिया था. हार्वर्ड विश्वविद्यालय में दो साल तक अपनी पढ़ाई के दौरान गेट्स ने अपना ज़्यादातर समय सॉफ़्टवेयर तैयार करने (प्रोग्रामिंग) में दक्षता हासिल करने में बिताया. हाँ, रात में दोस्तों के साथ ताश के पत्ते खेलना इस दौरान उनके मनोरंजन का ज़रिया रहा. इसके बाद वे न्यू मेक्सिको चले गए और वहाँ अपने बचपन के दोस्त पॉल एलेन के साथ मिलकर माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी की नींव रखी. बड़ी जवाबदेही
गेट्स की ज़िंदगी में बड़ा मोड़ 1980 में आया जब उन्होंने आईबीएम कंपनी के साथ कम्प्यूटर चलाने वाली प्रणाली (ऑपरेटिंग सिस्टम) बनाने का करार किया. इस ऑपरेटिंग सिस्टम को एमएस-डॉस का नाम दिया गया. इसके छह साल बाद 1986 में माइक्रोसॉफ़्ट ने लोगों के बीच शेयर जारी किया और 31 साल की उम्र में अपने उद्यम के दम पर गेट्स अरबपति बन चुके थे. माइक्रोसॉफ़्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम 'विंडोज़' और कम्प्यूटर पर काम करने वाले पैकेज 'माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस' का बाज़ार में ख़ासा दबदबा है. अब वे 52 साल के तो हो चुके हैं लेकिन दुनिया के सबसे अमीर शख़्स नहीं रह गए. अमरीकी निवेशक वारेन बफ़ेट और मेक्सिको के टेलीकॉम दिग्गज कार्लोस स्लिम ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है. अब कंपनी के रोजाना के काम को देखने की बजाय गेट्स की योजना है कि समाजसेवा के काम में ज़्यादा समय लगाया जाए. गेड्स कहते हैं कि बहुत सारा पैसा अपने साथ ढेर सारी जवाबदेही लाती है. विकासशील दुनिया में नए टीकों की खोज़ और परियोजनाओं में निवेश करना गेट्स की भावी योजना है. |
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