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माइक्रोसॉफ़्ट ने इंडोनेशिया को रियायत दी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सॉफ़्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ़्ट ने सरकारी दफ़्तरों में अपने जाली उत्पादों के इस्तेमाल के मामले में इंडोनेशिया के ख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं करने का फ़ैसला किया है. माइक्रोसॉफ़्ट और इंडोनेशिया सरकार के बीच सहमति बन गई है. सरकारी सूत्रों ने कहा कि माइक्रोसॉफ़्ट ने वैसे हर कंप्यूटर के बदले एक डॉलर लेने पर सहमति दी है जिनमें कि कंपनी के जाली सॉफ़्टवेयर इस्तेमाल किए गए हैं. इसके बदले में सरकार ने आगे से माइक्रोसॉफ़्ट के वैध सॉफ़्टवेयर ख़रीद कर इस्तेमाल करने का भरोसा दिलाया है. एक अनुमान के अनुसार इंडोनेशिया सरकार के 50, 000 कंप्यूटरों में माइक्रोसॉफ़्ट के जाली सॉफ़्टवेयर चल रहे हैं. ख़बरों के अनुसार राष्ट्रपति सुसिलो बाम्बांग युधोयोनो और माइक्रोसॉफ़्ट के मालिक बिल गेट्स की मुलाक़ात के दौरान ये सहमति बनी. ये मुलाक़ात पिछले महीने सिएटल स्थित कंपनी मुख्यालय में हुई थी. जकार्ता पोस्ट अख़बार के अनुसार सूचना मंत्री सोफ़याँ दियाली ने कहा, "माइक्रोसॉफ़्ट ने व्यावहारिक क़दम उठाया है. कंपनी इंडोनेशिया जैसे विकासशील देशों पर सिर्फ़ वैध सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने की शर्त नहीं लगा सकती. हम इतना पैसा ख़र्च नहीं कर सकते. अब उनका प्रयास है कि हम जाली सॉफ़्टवेयर का उपयोग धीरे-धीरे कम करते जाएँ." एशियाई देशों में जाली सॉफ़्टवेयर का उपयोग एक बड़ी समस्या है. बिज़नेस सॉफ़्टवेयर एलायंस नामक संस्था के एक अध्ययन के अनुसार 2004 में एशिया के लगभग आधे कंप्यूटरों में जाली सॉफ़्टवेयर चल रहे थे. |
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