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'तेल सब्सिडी धीरे-धीरे ख़त्म हो' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऊर्जा की सबसे ज़्यादा खपत करने वाले विश्व के पाँच बड़े देशों ने कहा है कि तेल की क़ीमतों में कमी लाने के लिए धीरे-धीरे तेल सब्सिडी ख़त्म करनी होगी. चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया और अमरीका के प्रतिनिधि ऊर्जा मसले पर जापान में बैठक कर रहे हैं. इन देशों ने कहा कि सब्सिडी की जगह ग़रीबों के लिए दूसरी योजनाएँ होनी चाहिए ताकि तेल बाज़ार में कोई त्रुटि न आए. लेकिन भारत और चीन ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द सब्सिडी ख़त्म नहीं करेंगे. अमरीकी ऊर्जा मंत्री सैमुअल बॉडमैन ने कहा कि शुक्रवार को एक बैरल कच्चे तेल की क़ीमत का 139 अमरीकी डॉलर तक पहुँच जाना एक झटका है. लेकिन कच्चे तेल के आसमान छूते दाम के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं के बीच उन्होंने इस बात से इनकार किया कि दुनिया के सामने कोई संकट आ गया है. बॉडमैन ने अपील की है कि उपभोक्ता देश अपने यहाँ तेल पर सब्सिडी (राजकोषीय सहायता) ख़त्म कर दें और उत्पादक देश अपना निवेश बढ़ाएँ. शुक्रवार को न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की क़ीमतों में 10 अमरीकी डॉलर से ज़्यादा की उछाल दर्ज की गई थी. ख़बरों में कहा जा रहा है कि बढ़ती माँग और राजनीतिक तनाव के कारण जुलाई महीने के अंत तक इसकी क़ीमत 150 अमरीकी डॉलर को भी पार कर सकती है. क़ीमतों का मुक़ाबला
तेल की क़ीमतों में यह ज़बर्दस्त उछाल उस समय आया है जब अमरीकी डॉलर कमज़ोर पड़ रहा है, वहाँ के शेयर बाज़ार वॉल स्ट्रीट में शेयरों के दाम गिर रहे हैं और बेरोज़गारों की संख्या अमरीका में 20 वर्ष के सबसे गंभीर स्तर पर पहुँच गई है. दुनिया के आठ महत्पूर्ण औद्योगिक देशों के साथ ही चीन, भारत और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि जापानी शहर अमरोही में दो दिनों तक चलने वाली बैठक में मिल रहे हैं. इस बैठक में ये देश रणनीति बनाएँगे कि किस तरह तेल, गैस और कोयला के बाज़ार में अस्थिरता का मुक़ाबला किया जाए. बॉडमैन ने बैठक शुरू होने से पहले कहा, "यह एक झटका है. लेकिन अगर आप दुनिया भर में तेल के उत्पादन की दर को देखें तो पिछले तीन साल से यह लगातार 8.50 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही है." उन्होंने कहा, "हम जानते हैं कि माँग बढ़ रही है क्योंकि कई देश अब भी तेल पर सब्सिडी दे रहे हैं जिसे बंद करने की ज़रूरत है." बॉडमैन को नहीं लगता कि तेल बाज़ार के क़ायदे-क़ानून को कड़ा करने की कोई ज़रूरत है. कुछ लोगों का कहना है कि बाज़ार अनुमान, आपूर्ति के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ती माँग और तेल भंडार के आकार या प्रकार की सही तस्वीर सामने नहीं आने के कारण भी तेल क़ीमतों में आग लगी हो सकती है. |
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