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क़र्ज़ माफ़ी का कितना मिलेगा लाभ! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपनी सुधारवादी छवि के एकदम उलट चुनावी बजट पेश करते हुए 2008-09 के बजट में देश के किसानों के लिए 60 हज़ार करोड़ रुपए की क़र्ज़ माफ़ी का पैकेज घोषित किया है. देश के क़रीब चार करोड़ किसानों को इस क़र्ज़ माफ़ी से फायदा मिलने का दावा वित्त मंत्री ने बजट में किया है. पिछले कुछ महीनों से सरकार की किसानों के प्रति हमदर्दी का जो माहौल बनाया जा रहा था, उस पर खरे उतरते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह क़दम उठाया है. किसानों पर मेहरबानी वाले बजट के रूप में पेश किए जा रहे इस बजट में पुराने को बोझ को कम करने की कोशिश तो है लेकिन आने वाले दिनों में उसकी आय में बढ़ोतरी का कोई ठोस उपाय नहीं दिख रहा है. दरअसल कर्ज़ माफ़ी की आंधी में बाकी बातों पर निगाह डालने की कोशिश ही नहीं हुई है. लेकिन आने वाले दिनों में किसान द्वारा लिए जाने वाले कर्ज़ पर ब्याज की दर में कोई कटौती नहीं की गई है जबकि राष्ट्रीय किसान आयोग ने किसानों के लिए चार फ़ीसदी पर कर्ज़ देने की सिफ़ारिश की है. इस कर्ज़ माफ़ी से चार करोड़ किसानों को फायदा मिलने की बात की गई है. लेकिन देश में कुल जोत 12 करोड़ से भी अधिक है और उसमें दस फ़ीसदी से भी कम किसान ऐसे हैं जो बड़े किसानों की श्रेणी में आते हैं. साहूकारों पर निर्भरता दूसरी बड़ी सचाई यह है कि रंगराजन समिति की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक केवल 27 फ़ीसदी किसान ही संस्थागत क्षेत्रों से कर्ज़ लेते हैं. 73 फ़ीसदी किसान साहूकारों और महाजनों पर निर्भर हैं, उनका क्या होगा इस पर बजट चुप है. यही नहीं देश में आत्महत्या करने वाले अधिकांश किसान महाजनों पर ही निर्भर हैं. कर्ज़ के पैकेज में एक हेक्टेयर वाले सीमांत किसानों और एक से दो हेक्टेयर वाले छोटे किसानों के 31 मार्च, 2007 तक बांटे गए, वे ऋण जिनका भुगतान 31 दिसंबर, 2007 तक किया जाना था उसको माफ़ कर दिया जाएगा. साथ ही जो कर्ज़ 29 फ़रवरी, 2008 तक वापस नहीं किए गए, वे कर्ज़ भी इसके तहत आएंगे. इसका बोझ 50 हज़ार करोड़ रुपए आएगा, वहीं बड़े किसानों के 29 फ़रवरी, 2008 तक बकाया कर्ज़ों के लिए एकमुश्त निपटान की योजना लागू की जाएगी. इसमें किसानों को 25 फी़सदी छूट दी जाएगी. इस तरह से यह पैकेज 60 हज़ार करोड़ रुपए बैठता है. पैकेज के तहत सरकारी बैंकों, सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से लिए गए सभी कर्ज़ शामिल होंगे. पैकेज के अलावा इस बजट में कृषि क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज़ का लक्ष्य आगामी साल के लिए दो लाख 80 हज़ार करोड़ रुपए कर दिया गया है. लेकिन निवेश में कमी का संकट झेल रही कृषि के लिए समग्र पूंजी निर्माण अभी मात्र 12 फ़ीसदी पर ही अटका हुआ है. परियोजना की कमी बजट में सिंचाई की कोई बड़ी योजना तो घोषित नहीं की गई लेकिन सिंचाई और जल संसाधन वित्त निगम स्थापित करने की घोषणा की गई है और वह भी मात्र 100 करोड़ रुपए के सरकारी अंशदान से.
हालांकि त्वरित सिंचाई सुविधा कार्यक्रम के तहत आवंटन को नौ हज़ार करोड़ रुपए बढ़ाकर 20 हज़ार करोड़ रुपए किया गया है. साथ ही वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए 348 करोड़ का मामूली आवंटन किया गया है. फसल बीमा योजना में बदलाव पर वित्त मंत्री ने ज्यादा कुछ नहीं कहा है. इसी तरह सहकारी ऋण संरचना में सुधार के लिए पुराने क़दमों को दोहराने के साथ राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के बारे में चर्चा उन्होंने की है. जहां तक खाद सब्सिडी की बात है तो उस पर उन्होंने ज्यादा कुछ न कहकर न्यूट्रीएंट आधारित प्रणाली पर विचार की बात कही है. कृषि विपणन सुधारों पर वह चुप रहे हैं क्योंकि कृषि उत्पादों की कीमतों पर अंकुश के लिए सरकार खुद सुधारों के रास्ते में रोड़ा अटका रही है. कुल मिलाकर कर्ज़ माफ़ी की आंधी में बाकी किसी मुद्दे पर कोई जोर नहीं दिया गया है और किसान को आगे कर्ज़ का इंतज़ाम तो कर दिया गया है लेकिन वह इसे लौटाएगा कैसे, इसका इंतज़ाम नहीं किया गया है. आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर घोषित इस पैकेज के साथ एक बात हमें याद रखनी होगी. 1990 में देवीलाल के कृषि मंत्री रहते हुए 12 हज़ार करोड़ रुपए का कर्ज़ माफ़ी पैकेज लागू किया गया था लेकिन वो तो सत्ता में वापस नहीं लौटे और उसके 18 साल बाद 60 हज़ार करोड़ रुपए के पैकेज की ज़रूरत पड़ी है. इस अनुभव के आधार पर तुरंत लाभ का यह क़दम सरकार को कितने वोट दिलाएगा ये देखना होगा. |
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