 | | | सर्वेक्षण में विकास दर घटने की आशंका जताई गई है |
वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2007-08 का आर्थिक सर्वेक्षण संसद के दोनों सदनों में पेश किया. इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था का भारत पर असर पड़ने और विकास की गति घटने की आशंका जताई गई है. मुख्य बातें - वित्त वर्ष 2007-08 में आर्थिक विकास दर 8.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद.
- महँगाई दर 5.6 फ़ीसदी से घट कर 4.1 फ़ीसदी होने की संभावना.
- कर वसूली में भारी वृद्धि.
- बुनियादी संरचना में आ जा रही अड़चनों और उपभोक्ता सामान के क्षेत्र में मंदी पर चिंता.
- मौजूदा वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था एक खरब डॉलर को पार कर सकती है.
- वित्तीय सेवाओं में लगभग 14 फ़ीसदी की वृद्धि.
- अमरीकी बैंकिंग कारोबार में अस्थिरता के असर का आकलन करना मुश्किल और इस पर अनिश्चितता की स्थिति.
- वर्ष 2006-07 में विदेशी निवेश 150 प्रतिशत बढ़ा.
- सड़क, बंदरगाह, बिजली जैसी बुनियादी संरचना को मज़बूत बनाने की ज़रूरत.
- निजी क्षेत्र के लिए सरल और ठोस नीति की आवश्यकता.
- सामाजिक क्षेत्र में सरकारी निवेश सात वर्षों में 16 प्रतिशत बढ़ा.
- कृषि पर संकट बरकरार. कृषि उत्पादन में कमी होने की आशंका.
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