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सोमवार, 25 फ़रवरी, 2008 को 10:11 GMT तक के समाचार
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यात्री किराया बढ़ने की संभावना नहीं

लालू यादव
रेलमंत्री ने पिछले साल किरायों में मामलू कमी की थी
अगले रेल बजट में किरायों में कमी किए बिना भी रेल मंत्री यात्रियों को रियायत दे सकते हैं. एसोचैम ने माल भाड़ा एक फ़ीसदी घटाने की माँग की है.

पिछले बजट में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने अलग-अलग श्रेणियों में यात्री किरायों में मामूली कमी करते हुए व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले सीजन के हिसाब से किरायों में बदलाव किए थे.

रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन अशोक भटनागर कहते हैं कि इस बार भी बजट में सीधे तौर पर यात्री किराया कम किए जाने की संभावना कम है लेकिन कई तरह के सरचार्ज कम किए जा सकते हैं.

उनका कहना है, "रेल मंत्री इस बजट में सुपरफ़ास्ट चार्ज और टर्मिनल चार्ज में कमी कर सकते हैं. यात्री किरायों में कोई बदलाव नहीं होने की उम्मीद है."

रेल यात्रियों की शिकायत है कि बजट में तो किराये में थोड़ी कमी की गई लेकिन दूसरे तरीके से लोगों पर बोझ बढ़ा दिया गया.

रेल यात्री विवेक चौधरी
रेलवे दूसरे रास्तों से यात्रियों पर बोझ डाल रहा है

कारोबार के सिलसिले में हमेशा रेल यात्रा करने वाले व्यवसायी विवेक चौधरी बताते हैं, "पहले अगर दिल्ली से लखनऊ का आने-जाने का टिकट कटाते थे तो किराया दोनों तरफ़ से बराबर था लेकिन अब वापसी का टिकट अगर दिल्ली से ही कटाएँ तो ज़्यादा पैसा देना पड़ता है."

उनकी शिकायत है, "रेल मंत्री ने बेहद चालाकी से सैंकड़ों ट्रेनों को सुपरफ़ास्ट का दर्जा दे दिया जिससे उन ट्रेनों के टिकट लेने पर बीस रूपया अतिरिक्त सुपरफ़ास्ट चार्ज देना पड़ता है जबकि ट्रेनों की रफ़्तार वही है."

जानकारों की राय

अशोक भटनागर कहते हैं कि यात्री किराया कम करने का मतलब है वित्तीय बोझ बढ़ना जबकि रेलवे की आय माल ढुलाई से बढ़ती है.

वो कहते हैं, "रेल मंत्री वित्त मंत्रालय से अधिक पैसा मांगेंगे लेकिन वो मिलना मुश्किल है. इसलिए अधिक से अधिक यही कर सकते हैं कि यात्रियों किरायों पर सरचार्ज कम कर दें."

रेलवे बोर्ड के पूर्व चेयरमैन
 रेल मंत्री वित्त मंत्रालय से अधिक पैसा मांगेंगे लेकिन वो मिलना मुश्किल है. इसलिए अधिक से अधिक यही कर सकते हैं कि यात्रियों किरायों पर सरचार्ज कम कर दें
अशोक भटनागर

उनका कहना है, "एक तर्क ये भी दिया जाता है कि सेकेंड एसी का किराया ज़्यादा होने से रेलवे को एयरलाइनों से टक्कर मिल रही है लेकिन ये बिल्कुल ग़लत है और सस्ते एयरलाइनों से रेलवे को कोई घाटा नहीं हो रहा है."

इस बीच उद्योग और वाणिज्य संगठन एसोचैम ने भारत की विभिन्न कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से बात कर रेल किरायों पर सर्वेक्षण कराया है.

इस सर्वेक्षण में शामिल 300 सीईओ में से 210 ने उम्मीद जताई है कि यात्री किराया स्थिर रहेगा क्योंकि रेल मंत्री मुनाफ़े का फ़ायदा उन तक पहुँचाना चाहेंगे.

लगभग 70 प्रतिशत सीईओ ने रेल मंत्री से माल भाड़ा एक फ़ीसदी कम करने की माँग की है.

उनका कहना है कि मालभाड़ा कम होने से सामानों के दाम घटेंगे और महँगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकेगी.

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