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राबड़ी देवी का नाम नहीं आया काम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रेल को अपने गाँव के बाहर रुकवाने के लिए अवैध हॉल्ट बनाने का सिलसिला बिहार में नया नहीं है, ऐसा ही एक हॉल्ट बनाने वालों ने सोचा होगा कि सबसे सुरक्षित नाम होगा रेल मंत्री की पत्नी का. सासाराम-विक्रमगंज रेल मार्ग पर लगभग हर इलाक़े में स्थानीय देवी देवताओं या जाति के नाम पर अवैध हॉल्ट बनाए गए थे. ‘पटेल हॉल्ट’, 'माँ भगवती हॉल्ट’ और ‘डीहवार बाबा हॉल्ट’ उन नौ हॉल्ट्स में से हैं जो पिछले एक साल में सासाराम–बिक्रमगंज लाइन पर अवैध तरीक़े से बनाए गए थे. इसी सिलसिले की आख़िरी कड़ी के रूप में रेल मंत्री लालू प्रसाद यादब की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के नाम पर बना ‘राबड़ी देवी हॉल्ट’ था. इस हॉल्ट को सिर्फ़ एक सप्ताह पहले यादव बहुल इलाक़े गोपालपुर के निकट बनाया गया था. रेलवे अधिकारियों ने राबड़ी देवी हॉल्ट सहित सभी अवैध हॉल्टों को तोड़ डाला है और स्थानीय लोगों को चेतावनी दी है कि वे रेलगाड़ी को अवैध रूप से रोकने की कोशिश न करें. अवैध तरीक़ा स्थानीय लोग बताते हैं कि जातीय या धार्मिक आधार पर अवैध स्टेशनों का निर्माण तब शुरू हुआ जब रेलवे ने 42 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर सिर्फ़ सात स्थानों पर ट्रेनों के रुकने की इजाज़त दी जबकि इस पैसेंजर रूट पर काफ़ी घनी आबादी वाले गाँव हैं.
लोगों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर मंशा बाबा हॉल्ट और शहीद पीर बाबा हॉल्ट को रेलवे ने मंज़ूरी दे दी जिसके बाद स्थानीय देवी-देवताओं के नाम पर स्थानीय लोगों ने अपने-अपने हॉल्ट बना डाले. सासाराम के स्टेशन प्रबंधक एसके वर्मा कहते हैं, "रेल मंत्री लालू प्रसाद ख़ुद अवैध हॉल्टों के ख़िलाफ़ अभियान चलाकर इसे हटाने का संकेत दे चुके थे". उनके अनुसार रेल मंत्री ने कहा था, "अगर मेरे नाम पर भी कोई हॉल्ट हो तो उसे भी हटा दो". इसके बाद पिछले दिनों रेल अधिकारियों का एक दल रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और रेल मज़दूरों के साथ एक विशेष रेलगाड़ी से सासाराम से रवाना हुआ और एक-एक करके सभी नौ अवैध हॉल्टों को उखाड़कर फेंक दिया. एक स्थानीय यात्री दिनेश कुमार बताते हैं, "जब लोग अपने देवी-देवताओं की आड़ में हॉल्टों का नाम रखकर ट्रेन रोकते हैं तो कुछ लोगों ने सोचा क्यों न ऐसे व्यक्ति के नाम पर हॉल्ट का नाम रखा जाए जिसे हटाने के पहले अधिकारियों को पाँच बार सोचना पड़े इसलिए रेल मंत्री की पत्नी के नाम पर ही हॉल्ट का नाम रख दिया गया." एक अन्य यात्री दिलीप राम कहते हैं, "रेल मंत्री लालू प्रसाद ने ख़ुद मंशा बाबा और शहीद पीर बाबा हॉल्टों पर रेल गाड़ियों के ठहराव की मंज़ूरी दी थी इसलिए लोगों ने सोचा कि अगर राबड़ी देवी के नाम पर हॉल्ट बनाया जाए तो इसे भी मंज़ूरी मिल जाएगी पर इसे मंज़ूरी तो दूर मात्र एक हफ़्ते में हटा दिया गया." दिनेश कहते हैं, "बात यहीं रुकने वाली नहीं है. अब हम अपनी आवाज़ सीधे रेल मंत्री तक पहुँचाएँगे. भले ही ‘राबड़ी देवी हॉल्ट’ को मंजूरी न मिले पर उसी हॉल्ट पर किसी अन्य नाम से हॉल्ट बनाने के लिए रेल मंत्री पर दबाव बनाया जाएगा." रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अब इस रेलमार्ग पर अगर अवैध तरीक़े से कहीं और ट्रेन रोकने की कोशिश की गई तो निकट के गाँव पर सामूहिक रूप से कार्रवाई की जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें रेल बजट: किरायों में कटौती की घोषणा26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस आम आदमी के लिए बढ़िया बजट: राना26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस रेल बजट का स्वागत भी, विरोध भी26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस तमिलनाडु में रेल दुर्घटना, 11 की मौत16 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस अब निहत्थे होगी रेलवे की सुरक्षा14 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नई रेलगाड़ियों की घोषणा24 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत की सबसे तेज़ ट्रेन शुरु 15 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारतीय रेल में ई-टिकट की शुरूआत24 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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