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भारतीय रेल में ई-टिकट की शुरूआत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आप महज़ दो एसएमएस करेंगे और रेलवे का आरक्षित टिकट आपके हाथ में होगा. मोबाइल फ़ोन करेंगे या अपने कंप्यूटर पर ही टिकट का प्रिंट निकाल रहे होंगे. यदि आपने स्लीपर का टिकट लिया है और उसमें स्थान नहीं हुआ तो स्थान रिक्त होने पर आपको वातानुकूलित बोगी में यात्रा करने की पेशकश की जाएगी. दरअसल भारतीय आसमान में उतरती नई-नई उड़ान कंपनियों और उनके घटते किराए ने भारतीय रेलवे को भी अपनी पैसेंजर आय बचाने के उपाय खोजने शुरू कर दिए हैं. जहाँ टिकट प्रणाली को ज़्यादा से ज़्यादा आसान बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं वायुसेवाओं की तर्ज़ पर ही ओपन टिकटिंग शुरू करने की भी तैयारी है. शुक्रवार, 26 अगस्त को उत्तर रेलवे में एसएमएस पर टिकट बुकिंग की शुरूआत की जा रही है. रेलवे टिकट प्रणाली में आधुनिक तकनीक को लाने का काम भारतीय रेलवे कैटरिंग व पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) कर रहा है. प्रयोग के तौर पर 12 अगस्त को उसने नई दिल्ली से कालका ट्रेन में ई-टिकटिंग शुरू की है. आईआरटीडीसी के संयुक्त महाप्रबंधक विनयन के मुताबिक महज़ दस दिन में ज़बरदस्त समर्थन मिला है और इंटरनेट के ज़रिए होने वाले आरक्षण में से क़रीब आधे ई-टिकटिंग के ज़रिए होने लगे हैं. क़रीब 25 टिकट रोजाना ई-टिकटिंग के ज़रिए होने लगे हैं, जबकि इसे दो ट्रेनों में ही उपलब्ध कराया गया है. इंटरनेट से आरक्षण इंटरनेट और मोबाइल के ज़रिए पहले ही आरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है जिसमें इंटरनेट बैंकिंग में लगी 16 बैंकों और मोबाइल कंपनियों के साथ अनुबंध किया गया है.
इंटरनेट के ज़रिए आरक्षण कराने वालों को यह सुविधा भी महज़ 40 रुपए (निम्न श्रेणी) के शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती है. फिलहाल आरक्षण उपलब्ध कराने वाली मोबाइल कंपनियों में हच व आइडिया जैसी कंपनियों को साथ लिया गया था. विजयन के मुताबिक शुक्रवार से दो एसएमएस पर आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें एक एसएमएस पर ट्रेन में सीट की उपलब्धता बताई जाएगी और दूसरे एसएमएस पर टिकट आरक्षित कर दिया जाएगा. अभी आईसीआईसीआई की इंटरनेट बैंकिंग सेवाओं को इसमें शरीक किया जा रहा है, लेकिन जल्दी ही दूसरी बैंकों को साथ लिया जाएगा. एसएमएस के लिए भी रिलायंस, आइडिया के अलावा एमटीएनएल मुंबई व दिल्ली इसमें शामिल होंगे. इन सेवाओं को धीरे धीरे कस्बाई इलाकों में ले जाया जाएगा. दो माह के भीतर ओपन टिकटिंग प्रणाली लागू करने की योजना है. रेल मंत्रालय के सूचना अधिकारी हरीश कंवर के मुताबिक फिलहाल जहाँ एसी-1 53 फ़ीसदी ख़ाली जाता है वहीं एसी-2 भी 38 फीसदी खाली रहता है. जबकि स्लीपर सौ फ़ीसदी भरे होते हैं. इसलिए रेल मंत्रालय हवाई कंपनियों की तरह ही पहले आरक्षण कराने वाले लोगों को आगे की श्रेणी में आरक्षण दिए जाने पर विचार कर रहा है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रेलवे हर साल जो 2800 करोड़ रुपए टिकट निरस्त होने से वापस करती है, वे रेलवे को मिलने लगेंगे. |
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