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आम आदमी के लिए बढ़िया बजट: राना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आम आदमी को चाहिए कि किराया नहीं बढ़े और रेल मंत्री लालू यादव ने सभी श्रेणी के किरायों में कमी की है. भले ही कुछ में ये कमी नाममात्र की ही है. कहा जाना चाहिए कि आम आदमी के नज़रिए से यह बजट बहुत बढ़िया है. दूसरा मुद्दा है सेवाओं और उनकी गुणवत्ता में सुधार का. गाड़ियों की आवाजाही और आरक्षण की सूचना भी एक अहम विषय है. रेल मंत्री ने देशभर में 139 टेलीफ़ोन नबंर से रेलगाड़ियों के बारे में सूचना देने की घोषणा की है जो यात्रियों की सहूलियत को और बढ़ाएगी. आम आदमी चाहता है कि रेलगाड़ियाँ खूब चलें और जो लोग बिना कार्यक्रम के ट्रेन पकड़ने आते हैं, उनके लिए भी सामान्य डिब्बे की सुविधा हो. रेल मंत्री लालू यादव ने सामान्य डिब्बों की संख्या बढ़ाकर छह करने की घोषणा की है. लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी कुछ अच्छा है. सेवाओं में सुधार की घोषणा एक बात है और उनको अमल में लाना दूसरी बात. माल ढुलाई के लिए एक अलग व्यवस्था करने की बात कही गई थी, लेकिन उस पर कोई अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है. रेल सेवाओं में सफ़ाई और ट्रेनों की समय से आवाजाही एक अन्य अहम मुद्दा है. इसे और पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. इसके लिए किसी स्वतंत्र एजेंसी की मदद लेनी चाहिए और हर तीन महीने पर इस दिशा में क्या काम हुआ, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए. सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है. लेकिन इस बारे में जो घोषणाएँ की गईं हैं, उन पर तत्काल अमल होना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें रेल बजट का स्वागत भी, विरोध भी26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस रेल बजट: किरायों में कटौती की घोषणा26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस ..देख तमाशा दरियादिल सौदागर का26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस रेल बजट: एक नज़र में 26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस हंगामे के बीच लालू का रेल बजट पेश 25 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस 'ग़रीब रथ' से एसी की यात्रा भी सस्ती05 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस रेल टिकटें महंगी होने की संभावना नहीं25 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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