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बुधवार, 05 अप्रैल, 2006 को 00:44 GMT तक के समाचार
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'ग़रीब रथ' से एसी की यात्रा भी सस्ती

ट्रेन
रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने 'ग़रीब रथ' की घोषणा रेल बजट में की थी
अब ऐसा लगता है कि रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव का ‘ग़रीब रथ’ ट्रेन महज राजनीतिक शिगूफ़ा नहीं है बल्कि सड़क एवं हवाई सेवाओं से मिल रही कड़ी चुनौती से निपटने का ‘मास्टर प्लान’ है.

‘ग़रीब रथ’ उस नई ट्रेन का नाम होगा जिसमें वातानुकूलित श्रेणी की टिकटें भी आम आदमी की पहुँच में रखने की कोशिश की जा रही है.

ये ट्रेन कुछ ही महीनों बाद यानी दुर्गा पूजा के समय शुरू होने वाली है और इसकी तैयारियाँ भी चल रही हैं.

नई डिज़ाइन

‘ग़रीब रथ’ ट्रेनों की डिज़ाइन नए सिरे से तैयार की गई है ताकि इसमें ज़्यादा यात्री सफ़र कर सकें.

पूर्ण वातानुकूलित ‘ग़रीब रथ’ में चेयरकार के कोच ज़्यादा रखे जा रहे हैं, जिससे कि एक कोच में 108 यात्री बैठकर सफर कर सकें.

आमतौर पर तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित कोच में 64 बर्थ होते हैं, लेकिन ‘ग़रीब रथ’ में 85 बर्थ डिज़ाइन किए गए हैं.

 दिल्ली-मुंबई के बीच तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित बर्थ की टिकट 1400 रुपए की होती है. वहीं स्लीपर श्रेणी के लिए एक यात्री 450 रुपए देता है. ऐसे में ‘ग़रीब रथ’ में चेयरकार का किराया दिल्ली-मुंबई के लिए 600 रुपए के आसपास हो सकता है और स्लीपर के लिए साढ़े सात सौ रुपए के आसपास
सुधीर कुमार

अब तक दो बर्थ होती रही हैं जिसे तीन बर्थ में परिवर्तित किया जा रहा है. साथ ही कोच की ऊँचाई और लंबाई भी थोड़ी बढ़ाई जा रही है.

‘ग़रीब रथ’ की डिज़ाइन कपूरथला और चेन्नई की कोच फ़ैक्ट्रियों ने तैयार की है जिसे पिछले दिनों रेलवे बोर्ड के तकनीकी सदस्य व सलाहकारों ने स्वीकृति दे दी.

कोच का निर्माण जल्द ही शुरू हो जाएगा और दुर्गा पूजा (दशहरा) अवकाश के दौरान देश का पहला वातानुकूलित ‘ग़रीब रथ’ रेल पटरियों पर दौड़ने लगेगा.

सबसे पहला ‘गरीब रथ’ दिल्ली से पटना चलेगा. इसके बाद दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-चेन्नई और सहरसा-अमृतसर के बीच इसकी शुरूआत होगी.

सुधार प्रक्रिया का हिस्सा

रेल बजट 2006-07 में घोषित इस नई किस्म की ट्रेन की अवधारणा रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के विशेष कार्याधिकारी सुधीर कुमार ने गढ़ी है.

सुधीर कुमार को रेलवे में चल रही सुधार प्रक्रिया का अगुवा माना जाता है.

वे बताते हैं कि ‘‘ग़रीब रथ’ रेल यात्रा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन होगा जो रेलवे को मिल रही चुनौतियों से निपटने में सहयोगी होगा.

ट्रेन
ग़रीब रथ के डिब्बों में साधारण ट्रेनों की तुलना में ज़्यादा यात्रियों के लिए जगह होगी

आईएएस अधिकारी सुधीर कुमार के अनुसार प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक यात्री रेलों से सफर करते हैं. इसमें 50 हज़ार यात्री वातानुकूलित श्रेणियों के हैं.

वे कहते हैं, "सस्ती हवाई सेवाओं से अब आम आदमी के लिए भी विमान यात्रा संभव हो गई है. लगभग 75 हज़ार यात्री विमान से सफर कर रहे हैं. ऐसे में रेलवे के पास वातानुकूलित श्रेणी के लंबी दूरी के यात्रा कम हुए हैं. सड़कों से भी रेलवे को चुनौती मिल रही है. ऐसे में रेल यात्रा में बुनियादी बदलाव जरूरी हो गया है."

सुधीर कुमार बताते हैं, "दिल्ली-मुंबई के बीच तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित बर्थ की टिकट 1400 रुपए की होती है. वहीं स्लीपर श्रेणी के लिए एक यात्री 450 रुपए देता है. ऐसे में ‘ग़रीब रथ’ में चेयरकार का किराया दिल्ली-मुंबई के लिए 600 रुपए के आसपास हो सकता है और स्लीपर के लिए साढ़े सात सौ रुपए के आसपास."

बेडिंग का भी किराया

ऐसा नहीं है कि ‘ग़रीब रथ’ के यात्रियों के लिए सभी ख़बरें अच्छी ही हैं.

रेलवे इस सेवा को सस्ता बनाने के लिए कुछ कटौती भी कर रहा है और इसमें से पहली कटौती है वातानुकूलित श्रेणी में मिलने वाले बेडिंग की कटौती.

फ़िलहाल यात्रियों को बेडिंग बिना किसी शुल्क मिलता है लेकिन ‘ग़रीब रथ’ में ऐसा नहीं होगा.

उन्हें बेडिंग (कंबल-चादर आदि) और पीने का पानी मुफ़्त नहीं मिलेगा. इसके लिए उन्हें अलग से भुगतान करना पड़ेगा.

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