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विक्रम पंडित के लिए बड़ी चुनौती | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विक्रम पंडित को चुनौतियां पसंद हैं. ये कहना है उनको नज़दीक से जानने वालों का लेकिन क्या समस्याओं से जूझ रहे सिटीग्रुप को एक बार फिर अमरीका की कॉर्पोरेट कंपनियों की क़तार में खड़ा करने की चुनौती का सामना कर पाएंगे भारतीय मूल के विक्रम पंडित. ये सवाल न केवल कंपनी के कर्मचारियों के सामने है बल्कि कई विश्लेषक और समीक्षक भी मानते हैं कि ये विक्रम के करियर की सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकती है. अमरीका के इस बैंक में तीन लाख से अधिक लोग काम करते हैं और इसकी संपत्ति ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के बराबर है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बैंक के शेयरों में चालीस प्रतिशत की गिरावट आई है. सिटीग्रुप के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ के कार्यभार के बारे में विक्रम पंडित कहते हैं, "बैंक के प्रदर्शन में सुधार करने के लिए सारे विकल्प खुले हैं. मैं एक निष्पक्ष और तटस्थ भाव से पूरे व्यवसाय का आकलन करुंगा." कुछ निवेशक मानते हैं कि चूँकि विक्रम को बड़ी सार्वजनिक कंपनियाँ चलाने का अनुभव नहीं है जबकि सिटीग्रुप एक विशालकाय कंपनी है, इसलिए उन्हें दिक्कतें हो सकती हैं. इतना ही नहीं 50 वर्षीय पंडित को कभी भी ग्राहकों से जुड़े बैंकिंग व्यवसाय का अनुभव नहीं रहा है जबकि सिटीग्रुप का आधे से अधिक राजस्व ग्राहक बैंकिंग सेवाओं से ही आता है. न्यूयॉर्क मे वित्तीय मामले देखने वाली कंपनी नॉर्थस्टार के अध्यक्ष हेनरी अशर कहते हैं कि डॉयच बैंक या रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड के प्रमुख जैसे लोग इस पद पर आ सकते थे लेकिन उन्होंने शायद रुचि नहीं दिखाई लेकिन इस पद के लिए उनकी रुचि क्यों नहीं रही, ये एक महत्वपूर्ण सवाल है. दूसरी तरफ कई लोग ये भी मानते हैं कि चार्ल्स प्रिंस के स्थान पर आए विक्रम पंडित बेहतर साबित होंगे क्योंकि वह स्वभाव से कर्मठ हैं. इतना ही नहीं, काम के अलावा विक्रम पंडित का कोई और जाना-माना शौक नहीं है जिससे लगता है कि वह बैंक के दैनन्दिन कार्यों में अत्यधिक रुचि लेंगे और बेहतर कर पाएंगे. पृष्ठभूमि विक्रम पंडित का जन्म भारत के राज्य महाराष्ट्र के नागपुर शहर में हुआ. क़रीब 16 वर्ष की उम्र में वे कॉलेज की पढ़ाई के लिए अमरीका आ गए. उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की. 1986 में विक्रम पंडित ने फ़ाइनेंस में पीएचडी पूरी की. वह क़रीब दो दशकों तक मॉर्गन स्टेनली में थे और बाद में सिटी ग्रुप से जुड़े. सिटी ग्रुप वित्तीय सेवा प्रदान करने वाली सबसे बड़ी अमरीकी कंपनियों में से एक है. इसका गठन 1998 में सिटीकॉर्प और ट्रेवलर्स ग्रुप के विलय के बाद हुआ था. दुनिया भर में सिटी ग्रुप के क़रीब तीन लाख कर्मचारी हैं और 100 से भी ज़्यादा देशों में 20 करोड़ उपभोक्ताओं के खाते इसमें हैं. एजेंसियों से मिलने वाली ख़बरों के मुताबिक न्यूयार्क स्थित सिटी ग्रुप में निवेश संबंधी बड़े घाटे के बाद चार्ल्स प्रिंस को अपना पद छोड़ना पड़ा था. 'बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स' यानी निदेशकों के समूह के सदस्य रहे 50 वर्षीय विक्रम पंडित अब तक कंपनी के चेयरमैन रहे रॉबर्ट इ रूबिन के क़रीबी माने जाते हैं. अमरीका के वित्त मंत्री रह चुके रॉबर्ट इ रूबिन की जगह कार्यवाहक सीईओ सर विन बिसशॉफ़ को कंपनी का चेयरमैन बनाया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें व्यापार प्रगति के लिए सीईओ फ़ोरम20 जुलाई, 2005 | कारोबार सिटीग्रुप बैंक के प्रमुख का इस्तीफ़ा05 नवंबर, 2007 | कारोबार मित्तल बने 'मित्तल-आर्सेलर' के नए सीईओ06 नवंबर, 2006 | कारोबार अडोबी का अगला सीईओ भारतीय13 नवंबर, 2007 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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