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'हर दूसरे के पास होगा मोबाइल' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोबाइल फ़ोन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी नोकिया का कहना है कि इस साल के अंत तक दुनिया की आधी आबादी के पास मोबाइल होगा. कंपनी की मोबाइल हैंडसेट इकाई के प्रमुख काई ओईस्तामो का मानना है कि मोबाइल की माँग सबसे अधिक उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाले देशों में होगी जिनमें चीन और अफ़्रीकी देश शामिल हैं. उन्होंने उम्मीद जताई की साल 2007 की विदाई से पहले दुनिया भर में तीन अरब लोगों के पास मोबाइल कनेक्शन होगा. ओईस्तामो का कहना था कि वर्ष 2010 तक यह संख्या बढ़ कर चार अरब हो सकती है. स्वीडन की समाचार एजेंसी 'टीटी' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मोबाइल बाज़ार बढ़ने के साथ-साथ इस धंधे में मुनाफ़ा कम होता जाएगा. फ़िनलैंड की कंपनी नोकिया का मोबाइल हैंडसेट के विश्व बाज़ार में 36 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. कंपनी ने इसे बढ़ा कर 40 फ़ीसदी करने का लक्ष्य बनाया है. भारत का बाज़ार भारत में मोबाइलधारकों की सख्या तेज़ी से बढ़ रही है और यहाँ बढ़ते बाज़ार पर दुनिया भर की कंपनियों की नज़र है. ब्रिटिश कंपनी वोदाफ़ोन ने इसी साल भारत में मोबाइल सेवा देने वाली कंपनी हचिसन-एस्सार में हच की हिस्सेदारी ख़रीदी है. भारत में सिर्फ़ पिछले 15 वर्षों में हुए टेलीकॉम सुधार कार्यक्रमों के चलते मोबाइल धारकों की संख्या लैंडलाइन कनेक्शन से अधिक हो चुकी है. आज भारत में लगभग 18 करोड़ टेलीफ़ोन सेट हैं. आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इनमें 76 प्रतिशत मोबाइल हैं. |
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