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ब्याज दर स्थिर रखने का फ़ैसला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी सालाना कर्ज़ नीति की घोषणा करते हुए पिछले एक साल से लगातार ब्याज दर बढ़ाने के सिलसिले को रोक दिया है. बैंक ने कुछ ऐसे उपायों की घोषणा की है जिससे विकास दर पर भी कोई असर नहीं पड़े और साथ-साथ महँगाई पर भी अंकुश लगाया जा सके. लेकिन चालू वित्त वर्ष 2007-08 के लिए विकास दर साढ़े आठ फ़ीसदी रहने की संभावना जताई गई है. पहले रिज़र्व बैंक ने नौ फ़ीसदी विकास दर की संभावना जताई थी. रिज़र्व बैंक के गवर्नर वाई रेड्डी ने मुंबई में कर्ज़ नीति की घोषणा करते हुए चालू वित्त वर्ष के दौरान महँगाई की दर पाँच फ़ीसदी रहने का भरोसा दिलाया. कर्ज़ नीति में कहा गया है, "हम मध्यावधि में मुद्रास्फ़ीति दर चार से साढ़े चार फ़ीसदी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं." भारतीय कंपनियों को विदेश में कारोबार फैलाने के लिए कई सहूलियतें दी गई हैं. अब भारतीय कंपनियाँ विदेश में अपनी निवल संपत्ति मूल्य के 300 फ़ीसदी तक पूँजीनिवेश कर सकती हैं. ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से घर खरीदने वालों को राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि अब होम लोन दरों में वृद्धि नहीं होगी. साथ ही और तरह के ग्राहक कर्ज़ों पर भी ब्याज़ दर स्थिर रहने की उम्मीद है. | इससे जुड़ी ख़बरें बढ़ती ब्याज दर और भारतीय अर्थव्यवस्था03 अप्रैल, 2007 | कारोबार तीन सरकारी बैंकों के ब्याज दरों में वृद्धि15 फ़रवरी, 2007 | कारोबार मँहगाई पर लगाम कसने की कोशिश31 जनवरी, 2007 | कारोबार अहम ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं 31 अक्तूबर, 2006 | कारोबार 'ब्याज दर नहीं बढ़ाने की अपील'02 अक्तूबर, 2006 | कारोबार भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई25 जुलाई, 2006 | कारोबार जापान ने ब्याज़ दर बढ़ाई14 जुलाई, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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