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सोमवार, 02 अक्तूबर, 2006 को 02:54 GMT तक के समाचार
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'ब्याज दर नहीं बढ़ाने की अपील'
रिजर्व बैंक
उद्योग जगत की राय में मँहगाई नियंत्रण में है, इसलिए ब्याज दर बढ़ाने का तुक नहीं है
भारतीय उद्योग परिसंघ यानी सीआईआई की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में अधिकतर कंपनियों ने रिजर्व बैंक से ब्याज दर नहीं बढ़ाने की अपील की है.

ग़ौरतलब है कि रिजर्व बैंक इसी माह के अंत में भारत की सालाना मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाला है.

सीआईआई के सर्वेक्षण में शामिल मुख्य कार्यकारी अधिकारियों यानी सीईओ में से 69 फ़ीसदी ने कहा कि बैंकों से कर्ज की माँग 30 फ़ीसदी से भी अधिक की दर से बढ़ रही है. इसलिए विकास की मौजूदा गति को बरकरार रखने के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखना ज़रुरी है.

उद्योग जगत के मुताबिक अभी मँहगाई यानी मुद्रास्फ़ीति की दर भी नियंत्रण में है और चालू वित्त वर्ष 2006-07 के दौरान इसके पाँच प्रतिशत से कम रहने की संभावना है.

आधे से अधिक सीईओ की राय में जब मँहगाई दर कम है तो ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है.

लगभग 35 प्रतिशत सीईओ ने कहा कि मुद्रास्फ़ीति साढ़े चार से पाँच प्रतिशत के बीच रहेगी जबकि 23 प्रतिशत का मानना है कि यह सिर्फ़ चार से साढ़े चार प्रतिशत के बीच रहेगी.

वित्त मंत्रालय के ताजा आँकड़ों के मुताबिक अभी मुद्रास्फ़ीति दर 4.6 प्रतिशत है.

बजट अनुमान

हालाँकि सर्वेक्षण में अधिकांश सीईओ ने कहा कि इस वर्ष राजकोषीय और राजस्व घाटे को निर्धारित लक्ष्य तक घटाना मुश्किल साबित होगा.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वित्तीय पुनर्गठन और बजट प्रबंधन अधिनियम यानी एफ़आरबीएम के तहत चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.8 प्रतिशत और राजस्व घाटा 2.1 प्रतिशत पर सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

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