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भारतीय रिज़र्व बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय रिज़र्व बैंक ने छोटी अवधि के लिए अन्य बैंकों के साथ होने वाले लेन-देन पर ब्याज़ दरें बढ़ाने की घोषणा की है. रिज़र्व बैंक ने मंगलवार को मौद्रिक और कर्ज़ नीति की तिमाही समीक्षा के बाद जारी बयान में कहा है कि वित्त वर्ष 2006-07 के दौरान मुद्रास्फ़ीति यानी महँगाई की दर पाँच से साढ़े पाँच प्रतिशत के बीच नियंत्रित रखने के लिए कुछ क़दम उठाना जरुरी हो गया था. इसी के मद्देनज़र रिवर्स रेपो दर एक चौथाई प्रतिशत बढ़ा कर छह प्रतिशत और रेपो दर भी इतना ही बढ़ा कर सात प्रतिशत कर दी गई है. बैंक दर को छह प्रतिशत और नकद आरक्षण अनुपात यानी सीआरआर को पाँच प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है. रेपो दर विभिन्न वाणिज्यिक बैंक अपना पैसा रिज़र्व बैंक के ख़जाने में जमा करते हैं. इस पर रिज़र्व बैंक जिस दर से ब्याज़ देता है उसे रेपो दर कहते हैं. जबकि रिवर्स रेपो दर ठीक इसके उलट होती है. जब रिज़र्व बैंक अन्य बैंकों को कम अवधि के लिए उधार देता है तो उस पर जिस दर से ब्याज लिया जाता है उसे रिवर्स रेपो दर कहते हैं. रेपो दर बढ़ने से खुदरा कारोबार करने वाले बैंक रिज़र्व बैंक में ही पैसा रखना फ़ायदेमंद समझते हैं क्योंकि उन्हें अधिक ब्याज मिलता है. दूसरी ओर रिवर्स रेपो दर बढ़ने से खुदरिया बैंकों को रिज़र्व बैंक से उधार लेने पर अधिक ब्याज का भुगतान करना पड़ता है. जब दोनों दरें बढ़ेंगी तो निश्चित रुप से मुद्रा बाज़ार में नकदी की कमी होगी. नकदी पैसा नहीं होने पर माँग घटती है जिससे सामानों या संपत्तियों की कीमत पर अंकुश लगता है. ग़ौरतलब है कि आठ जुलाई को ख़त्म सप्ताह में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फ़ीति की दर बढ़ कर 4.68 प्रतिशत हो गई है. उपभोक्ता जब बैंकों को रिज़र्व बैंक से उधार लेने में अधिक ब्याज देना पड़ता है तो वो इसकी भरपाई खुदरा ग्राहकों के दिए जाने वाले कर्ज़ या रिटेल लोन पर ब्याज़ दर बढ़ा कर करते हैं. इसलिए घर या कार खरीदने के लिए कर्ज़ लेने पर उपभोक्ताओं को बढ़े हुए ब्याज़ दर पर भुगतान करना पड़ सकता है. रिज़र्व बैंक ने लंबी अवधि के कर्ज़ों पर मुख़्य ब्याज दर यानी बैंक दर छह प्रतिशत पर स्थिर रखा है. इसका मतलब है कि रिटेल लोन पर ब्याज दरों में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं होगी. समीक्षकों के मुताबिक होम लोन या कार लोन पर रेपो दर की तरह ही चौथाई फ़ीसदी वृद्धि हो सकती है. आम आदमी बचत के लिए अपना पैसा बैंकों में रखता है. इस जमा राशि का एक हिस्सा इन बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखना पड़ता है जिसे नकद आरक्षण अनुपात या सीआरआर कहते हैं. रिज़र्व बैंक ने इस बार भी सीआरआर को पाँच प्रतिशत पर स्थिर रखा है यानी बैंकों को अपनी जमा राशि का पाँच प्रतिशत हिस्सा रिज़र्व बैंक के पास रखना होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें ब्याज दरों में मामूली वृद्धि25 अक्तूबर, 2005 | कारोबार भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो दर बढ़ाई24 जनवरी, 2006 | कारोबार गिरावट से छोटे निवेशक संकट में06 जून, 2006 | कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ24 जून, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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