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भारत में स्वास्थ्य पर्यटन का बढ़ता बाज़ार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रमुख अस्पताल समूह नए-नए तरीके अपना रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस और निजी टूयर ऑपरेटरों के साथ मिलकर अधिक से अधिक संख्या में मेडिकल टूरिस्ट या स्वास्थ पर्यटकों को भारत लाने की कोशिश की जा रही है. फ़ोर्टीस हेल्थकेयर तो विदेशों में टूयर ऑपरेटरों से संपर्क साध रहा है. फ़ोर्टीस हेल्थकेयर के निदेशक(मार्केटिंग) सुदर्शन मजुमदार कहते हैं, "हमारी रणनीति विदेशों में टयर ऑपरेटों और ट्रेवल एजेंटों के साथ संपर्क साधने की है, हम विभिन्न मुल्कों में ऑपरेटरों को चिन्हित कर रहे हैं." देश का बड़ा अस्पताल समूह अपोलो भी कुछ ऐसा ही कर सकता है. अपोलो अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. प्रताप रेड्डी कहते हैं, "कई लोग हमारे संपर्क में हैं, ख़ासकर खाड़ी के देशों से. निजी टूयर ऑपरेटर भी हम से बात कर रहे हैं, उन्हें हमें कुछ ख़ास सेवाएं देनी होगीं जो और कोई न दे रहा हो मसलन मरीज़ों के लिए विशेष सुविधाओं से लैस पूरा का पूरा जहाज़" तो क्यूं हो रही है इस क्षेत्र में इतनी हलचल? ये एक निश्चित बाज़ार है, इसका आभास तो था लेकिन अब जो कुछ होने जा रहा है वो उम्मीद से कहीं बढ़ कर है. बड़ा बाज़ार इस साल भारत में अब तक दो लाख विदेशी इलाज करवा चुके हैं. इन मेहमान मरीज़ो से भारतीय निजी अस्पतालों ने 33 करोड़ डॉलर कमाए हैं. मरीज़ों की ये संख्या 2005 के मुकाबले 35% ज़्यादा है और 2012 तक भारत अंतरराष्ट्रीय रोगियों से एक अरब डॉलर कमा सकता है. वोकहार्ड्ट हॉस्पिट्लस के प्रबंधक निदेशक विशाल बाली कहते हैं, "वर्ष 2012 के लिए ये अंदाज़ा तो है लेकिन मुझे लगता है कि हम 2010 में ही इस आंकड़े को पार कर लेंगे." तो क्यूं है इस क्षेत्र को इतनी बड़ी छलांग की आशा ? फ़ोर्टीस के निदेशक(मार्केटिंग) सुदर्शन मजुमदार का कहना है कि भारत के डॉक्टरों के हुनर की पहले से ही तारीफ़ होती रही है. वो पर्याप्त संख्या में पश्चिमी देशों में प्रेक्टिस करते आ रहे हैं और इसके चलते भारत आने वाले विदेशियों का भारतीय डॉक्टरों पर विश्वास है. प्रतिस्पर्द्धा और अवसर
विश्व भर में कई देश स्वास्थ्य पर्यटन को एक उद्योग बनाने की कोशिश कर रहे हैं. सबसे तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रहे हैं दक्षिण पूर्व एशिया के देश. स्वास्थ्य पर्यटन के मानचित्र पर निगाह दौड़ाएं तो दुनिया के इसी हिस्से का देश थाईलैंड चोटी पर है. थाईलैंड के बुमरुनग्रैंड अस्पताल में हर साल लगभग तीन लाख अंतरराष्ट्रीय मरीज़ इलाज करवाते हैं. इसके अलावा सिंगापुर, मलेशिया, जॉर्डन और दक्षिण अफ़्रीका से भी भारत को कड़ी टक्कर मिल रही है. वॉकहार्ड्ट हॉस्पिट्लस के विशाल बाली के शब्दों में ‘हिदुंस्तान एक ग्लोबल डाक्टर बन सकता है’. वह मानते हैं कि आईटी में दुनिया भर में भारत ने जो नाम कमाया है वही अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बन, स्वास्थ्य सेवाओं में भी कमा सकता है और इसके लिए अहम है कि भारत गुणवत्ता को और निखारें. पश्चिमी देशों के अलावा भारत के बड़े अस्पताल समूह अफ़्रीकी महाद्वीप पर नज़रें गढ़ाए हुए हैं. सुदर्शन मजुमदार मानते हैं कि भारत को अफ्रीका पर भी निगाह रखनी चाहिए क्योंकि वहाँ काफ़ी बड़ी संख्या में मरीज़ यूरोप का रुख़ करते हैं और भारत उन्हें कहीं सस्ती सेवाएं दे सकता है. चुनौतियां विदेशों से मरीज़ कॉस्मेटिक और लाइफ़ एनहांसिंग सर्जरी के लिए आते हैं. वोकहार्ड्ट के विशाल बाली कहते हैं इनमें दूसरी श्रेणी ज़्यादा अहम है. उनका कहना है," हम चाहते हैं हमारे पास लाइफ़ इनहांसिंग सर्जरी के मरीज़ आएँ, इसका फ़ायदा होता है, हृदय रोग वगैराह के इलाज के बाद जो मरीज़ वापस अपने देश जाते हैं तो उससे काफ़ी प्रसार होता है जिससे और अधिक मरीज़ भारत आते हैं." स्वास्थ्य पर्यटन में अपार संभावनाएँ हैं लेकिन कुछ दिक्कते भी हैं. सबसे पहली दिक्कत वही है जिसका रोना लगभग हर उद्योग रोता है - अंतरराष्ट्रीय स्तर के बुनियादी ढांचे का आभाव. विदेशी मरीज़ो की परेशानियां हवाईअड्डे से ही शुरु हो जातीं हैं. भारत में हवाईअड्डों के टेरमेक पर एंबुलेंस नहीं जा सकती. इसके अलावा साफ़-सफ़ाई का स्तर, हवाईअड्डों से अस्पताल तक का सफ़र और अन्य सब चीज़ों का काफ़ी असर पड़ता है मरीज़ों की सोच पर. | इससे जुड़ी ख़बरें डायबिटीज़ के बढ़ते ख़तरे पर चेतावनी13 नवंबर, 2006 | विज्ञान 'लाइट' सिगरेट के लिए कंपनियों पर मुक़दमा25 सितंबर, 2006 | विज्ञान 'हरी चाय से दिल की सेहत अच्छी'13 सितंबर, 2006 | विज्ञान 24/7 जीवन शैली के ख़तरनाक प्रभाव08 सितंबर, 2006 | विज्ञान डॉक्टरों, नर्सों के पलायन का बुरा असर11 मई, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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