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देश का चेहरा बदलने को तैयार हैं मित्तल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में दूरसंचार क्रांति का लाभ उठाने में सबसे आगे रहे भारती ग्रुप ने अब रिटेल क्षेत्र में उतरने का फ़ैसला किया है. कंपनी ने अमरीकी कंपनी वालमार्ट के साथ साझा कारोबार का समझौता किया है. भारती ग्रुप को ऊँचाइयों पर पहुँचाने वाला चेहरा है- सुनील मित्तल का. ऐसा चेहरा जिसे देखकर शायद आप उन्हें एक सख़्त और जिद्दी उद्योगपति मान बैठे. लेकिन सच्चाई ये है कि असल ज़िदगी में वे एक मिलनसार और नरम व्यक्ति हैं. वे उन गिने-चुने उद्योगपतियों में से हैं जो अब भी अपने फ़ोन का जवाब ख़ुद ही देते हैं. आइए आपको मिलवाते हैं सुनील मित्तल से. जो भारत में ढाई अरब डॉलर के औद्योगिक समूह के मालिक हैं. दूरसंचार और फुटकर उद्योग से नाता रखने वाले सुनील मित्तल ने अमरीका की खुदरा बाज़ार की प्रमुख कंपनी वालमॉर्ट के साथ साझा कारोबार के लिए क़रार किया है. वर्ष 1991 से भारतीय अर्थव्यवस्था को उदारवाद के रास्ते पर आने के बाद संभवत: सुनील मित्तल देश के सबसे सफल उद्योगपति रहे हैं. एक दशक तक मोबाइल क्रांति का नेतृत्व करने और भारत में दो करोड़ 70 लाख़ उपभोक्ताओं तक अपनी सेवाएँ पहुँचाने के बाद अब सुनील कृषि और फुटकर उद्योग में भी रुचि ले रहे हैं. अप्रैल में सुनील मित्तल ने एक अख़बार से कहा था, "हम अब दूरसंचार उद्योग के अंतिम चक्र में हैं. अब नए क्षेत्र मुझे आकर्षित करते हैं. मुझे कृषि और खुदरा उद्योग दोनों ही बहुत पसंद हैं. हमारे लिए ये दोनों अगली बड़ी संभावनाएँ हैं." फुटकर उद्योग की भारत में संभावनाओं पर सुनील मित्तल ने कहा था कि भारत में यूरोप के बड़े-बड़े फुटकर केंद्रो की बजाय थाईलैंड की तर्ज़ पर छोटे, वातानुकूलित और आरामदेह स्टोर खोले जाने चाहिए. उन्होंने कई बार कहा है कि भारत में ऐसा प्रयोग अवश्य सफल होगा. हमेशा आगे सुनील मित्तल की फुटकर व्यापार में शुरुआत संकेत देती है कि वे उभरते हुए व्यवसायों में मौजूद संभावनाओं को जल्द पहचान लेते हैं. सुनील मित्तल ने वर्ष 1970 में उत्तर भारतीय राज्य पंजाब में साइकिल के कलपुर्ज़ों का व्यवसाय शुरू किया था. वर्ष 1981 में वे यह सोचकर दिल्ली आ गए कि वे जापान से छोटे विद्युत जेनरेटरों का आयात कर बहुत पैसा कमा सकते हैं क्योंकि इस काम में 100 प्रतिशत तक का मुनाफ़ा होता है. इसके बाद 1980 के दशक में उन्होंने सरकार के अंदर इस बात के लिए समर्थन जुटाया कि निजी कंपनियों को टेलीफ़ोन सेट बनाने की इजाज़त दी जाए. इसके बाद उन्होंने तेज़ी से फैल रहे इस क्षेत्र में अपना क़िस्मत आज़माया. वे पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने इस फल-फूल रहे व्यवसाय में प्रवेश किया. जब भारत में 1990 के दशक के मध्य में वायरलेस फ़ोन सेवा क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोला तो सुनील मित्तल ने सबसे पहले इस क्षेत्र में जगह बनाई. सुनील ने एक समाचार पत्रिका से कहा था, "उस समय उपभोक्ताओं को चालीस हज़ार रुपए का फ़ोन हैंडसेट ख़रीदने, कॉल करने के लिए 16 रुपए प्रति मिनट और कॉल सुनने के लिए भी पैसे देने के लिए तैयार करना काफ़ी कठिन था."
लेकिन सुनील मित्तल जानते थे कि मोबाइल क्रांति के प्रसार के बाद ये समस्या नहीं रहेगी. नीतियों में हुए बदलावों से मोबाइल सेवा लगातार सस्ती होती चली गई. हाल ही में घोषित नई सरकारी नीतियों के बाद सुनील मित्तल ने अपने उपभोक्ताओं के लिए कॉल करने की दरें अधिकतम 1.20 रुपए प्रति मिनट कर दीं. आज सुनील मित्तल की कंपनी भारती एयरटेल से हर महीने दस लाख नए उपभोक्ता जुड़ते हैं. अब सुनील मित्तल को फुटकर उद्योग में असीम संभावनाएं नज़र आ रही हैं. फुटकर उद्योग की संभावनाओं का अंदाज़ा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि भारत का फुटकर बाज़ार 200 अरब डॉलर का है जिसमें से संगठित फुटकर व्यापार केवल छह अरब डॉलर का ही है. भारत के निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस के मुकेश अंबानी जैसे कई प्रमुख उद्योगपति निवेश से जुड़े सपनों को पूरा करने के लिए फुटकर उद्योग में ख़ूब पैसा लगा रहे हैं. निवेश योजना भारती समूह के लिए भी इस नई योजना के लिए वित्त जुटाना मुश्किल नहीं होगा क्योंकि सुनील मित्तल वित्तीय रुप से मज़बूत, एक सफल वार्ताकार और पैसा जुटाने में कुशल व्यवसायी के रूप में जाने जाते हैं. पहले भी सुनील मित्तल ने भारती की दूरसंचार योजनाओं में हिस्सेदारी को आकर्षक मूल्यों पर कुछ मह्त्वपूर्ण निवेशकों को बेची है. सुनील मित्तल की अपने विदेशी हिस्सेदारों के साथ सफलतापूर्वक काम करने की योग्यता भी इन नई योजनाओं में कंपनी के लिए लाभकारी सिद्ध होगी. सिंगटेल को अपनी टेलिकॉम योजना में निवेश के लिए तैयार कर सुनील मित्तल ने सभी को चकित कर दिया था. एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंदी वोडाफ़ोन को कंपनी में छोटी हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए तैयार कर सुनील ने सभी को झटका दे दिया.
अपने विदेशी हिस्सेदारों के बारे में सुनील ने कहा, "हमारे साथ एक एशियाई दिग्गज है और एक सफल अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है, इससे हमें दुनिया के दोनों हिस्सों के लाभ मिलेंगे." भारती एयरटेल अब विश्व बाज़ारों की उभरती हुई छोटी और मंझौली कंपनियों को ख़रीदने की योजना है. इसके अलावा भारती को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार लाइसेंस मिलने की उम्मीद है. हालाँकि निकट भविष्य में दूरसंचार क्षेत्र को सुनील मित्तल का एक-चौथाई समय ही मिल पाएगा. उनका ध्यान फुटकर उद्योग और साथ ही साथ कृषि पर प्रमुखता से रहेगा. ऐसा लगता है कि सुनील मित्तल भारत में दूसरी हरित क्रांति की शुरुआत करना चाहते हैं. भविष्य की संभावनाओं के बारे में हाल ही में सुनील मित्तल ने कहा, "बहुत साल पहले दूरसंचार एक संभावना की गाड़ी बनकर प्लेटफ़ॉर्म पर थी और भाग्य से मैं भी वहाँ था." उन्होंने कहा कि अब एक बार फिर गाड़ी स्टेशन पर है और उनके पास फिर से उसपर सवार होने का मौक़ा है और संगठित फुटकर उद्योग देश का चेहरा बदल देगा. | इससे जुड़ी ख़बरें भारती ग्रुप वालमार्ट के साथ आएगा रिटेल में27 नवंबर, 2006 | कारोबार टेस्को ने भारती के साथ बातचीत बंद की25 नवंबर, 2006 | कारोबार रिलायंस रिटेल बाज़ार में उतरा03 नवंबर, 2006 | कारोबार विदेश में पैर जमाती भारतीय कंपनियाँ20 अक्तूबर, 2006 | कारोबार अर्थव्यवस्था में उम्मीद से अधिक तेज़ी29 सितंबर, 2006 | कारोबार खुदरा और आईटी क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा26 सितंबर, 2006 | कारोबार भारत ने खुदरा क्षेत्र को और खोला24 जनवरी, 2006 | कारोबार टेस्को को भारत आने का न्योता10 अक्तूबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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