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'बैंकों की हड़ताल का देशव्यापी असर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में बैंक कर्मचारी संघों ने दावा किया है कि सरकार की आउटसोर्सिंग और निजीकरण की नीति के ख़िलाफ़ उनकी एक दिन की हड़ताल सफल रही है. अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी एसोसिएशन के संयुक्त सचिव विश्वास उतगी ने बीबीसी को बताया कि मुंबई में 50 हज़ार लोगों और बाक़ी देश में लाखों लोगों ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया. उन्होंने बताया कि हड़ताल के कारण भारतीय स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंकों में कामकाज प्रभावित हुआ. विश्वास उतगी के मुताबिक़ 18 विदेशी बैंकों के कर्मचारियों और यूनियन सदस्यों ने भी हड़ताल में हिस्सा लिया. मांग बैंक कर्मचारी संघों की मांग है कि सरकार आउटसोर्सिंग पर रोक लगाए, बैंक कर्मचारियों को पेंशन दे और पिछले साल से अधर में पड़ीं एक लाख रिक्तियों को भरे. इन्हीं मांगों को लेकर इस साल जुलाई में भी बैंक संगठनों ने एक दिन की हड़ताल की थी. अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी एसोसिएशन के विश्वास उतगी का कहना है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही. उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त मंत्रालय भी उनकी मांगों पर अड़ियल रवैया अपना रहा है. उन्होंने कहा कि सबको पता है कि क्या हो रहा है लेकिन कोई कुछ करना नहीं चाहता. विश्वास उतगी ने कहा कि इस कारण उनके पास बार-बार हड़ताल पर जाने के सिवा कोई चारा नहीं. | इससे जुड़ी ख़बरें सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर28 जुलाई, 2006 | कारोबार स्टेट बैंक कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म09 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस भारत में पेट्रोल पंपों की हड़ताल20 जून, 2005 | कारोबार वैट के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल30 मार्च, 2005 | कारोबार भारत में बैंक हड़ताल का व्यापक असर22 मार्च, 2005 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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