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वैट के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एक अप्रैल से मूल्य संवर्धित कर यानी वैट लागू किए जाने के विरोध में व्यापारियों के एक संगठन, भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने 72 घंटे की देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है. यह हड़ताल एक अप्रैल तक चलेगी. इसी दिन से 21 राज्यों में वैट लागू होना है. ऐसी ख़बरें हैं कि हड़ताल का आम कारोबार पर तो ख़ास असर नहीं पड़ेगा लेकिन मंडियाँ इससे प्रभावित हो सकती हैं. भाजपा शासित राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और झारखंड ने वैट लागू करने से इनकार कर दिया है. साथ ही उत्तर प्रदेश ने भी इसे एक अप्रैल से लागू करने में असमर्थता जता दी है. हालाँकि उत्तर प्रदेश को मनाने की कोशिशें जारी हैं. इसी सिलसिले में वैट संबंधित विशेषाधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष असीम दासगुप्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात की है. इधर वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सभी राज्यों के लिए ऐतिहासिक मौक़ा है कि वे वैट को लागू करें. चिदंबरम का कहना था कि केंद्र सरकार किसी पर कुछ थोपेगी नहीं लेकिन उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अधिकांश राज्य इसे लागू कर देंगे. नई प्रणाली इस नए वैट ढाँचे के लागू होने से बहुत से वे कर समाप्त हो जाएंगे जो राज्य लागू करते हैं और उनकी जगह एक ही वैट लागू होगा जिससे पूरे कर ढाँचे की पेचीदगियाँ समाप्त हो जाएंगी.
उम्मीद की जा रही है कि उद्योग निर्माण, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा कर ढाँचे के मुक़ाबले काफ़ी आसानी हो जाएंगी. पी चिदंबरम का कहना है कि स्वतंत्र भारत में ऐसा कर सुधार अभी तक लागू नहीं हुआ है इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है. इस ढाँचे के तहत दो कर रखे गए हैं - एक चार प्रतिशत और दूसरा 12.5 प्रतिशत. चार प्रतिशत कर दवाइयों, कृषि और औद्योगिक माल जैसी बुनियादी ज़रूरत की चीज़ों पर लगेगा जबकि बाक़ी उन सभी वस्तुओं पर 12.5 प्रतिशत कर लगेगा जो चार प्रतिशत के ढाँचे से बाहर हैं लेकिन कर के दायरे में आते हैं. हालाँकि शराब, लॉटरी टिकट, पैट्रोल, डीज़ल और कुछ अन्य वस्तुओं को वैट से बाहर रखा गया है. |
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