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नई टैक्स व्यवस्था लागू होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के राज्य अगले साल अप्रैल से एक नई व्यापार कर प्रणाली लागू करने पर सहमत हो गए हैं. 'वैट' नाम की इस प्रणाली में कर की दर 12.5 प्रतिशत होगी. सरकार का मानना है कि इससे कर प्रणाली तो सरल होगी ही, साथ ही माल को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने में आने वाली कठिनाइयाँ भी घटेंगी. पर्यवेक्षक ये भी मानते हैं कि इससे बहुत सारा वित्तीय घाटा पूरा किया जा सकेगा. केंद्र में सत्ता में रही भारतीय जनता पार्टी व्यवसायिक समुदाय को नाराज़ करने के डर से इस प्रणाली को लागू करने से बचती आई थी. 'वैट' लागू करने वाली समिति के अध्यक्ष असीम दासगुप्ता का कहना था, "हमें ख़ुशी है कि एक अप्रैल 2005 से इसे लागू करने पर सभी राज्यों में सहमति हो गई है." पर्यवेक्षक मानते हैं कि 'वैट' लागू होने से कर की चोरी भी घटेगी. सन 2001 से अब तक कई बार 'वैट' पर आम राय बनाने के लिए बैठकें हुई हैं लेकिन कई राज्यों को इस बारे में आपत्ति थी और इस विषय पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी. लेकिन व्यपारियों को इस विषय में कई आशंकाएँ हैं. व्यापारियों के एक बड़े संगठन - अखिल भारतीय व्यापार संघ ने वित्त मंत्री से समय माँगा है ताकि वे उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत करा सकें. |
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