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सोमवार, 05 जून, 2006 को 14:12 GMT तक के समाचार
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पेट्रोल-डीज़ल महंगे, वामपंथी नाराज़
पेट्रोल पंप
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं
भारत में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी कर दी है. लेकिन खाना पकाने वाले गैस (एलपीजी) और किरासन तेल की क़ीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं.

सरकार के फ़ैसले के बाद पेट्रोल की क़ीमत प्रति लीटर चार रुपए बढ़ जाएगी, जबकि डीज़ल की क़ीमतों में दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी की गई है.

केंद्र सरकार को समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने क़ीमतों में बढ़ोत्तरी का विरोध करने का फ़ैसला किया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की दिल्ली में हुई बैठक में यह फ़ैसला किया गया. बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी.

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की बढ़ती क़ीमतों के कारण ऐसा करना पड़ा है.

मुरली देवड़ा ने कहा कि सरकार के क़ीमतों में न्यूनतम बढ़ोत्तरी की है और उन्हें उम्मीद है कि सहयोगी पार्टियाँ सरकार के फ़ैसले का समर्थन करेंगी.

विरोध

लेकिन केंद्र सरकार को समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने कहा है क़ीमतों में बढ़ात्तरी का फ़ैसला न्यायसंगत नहीं.

फ़ैसले से नाराज़ हैं वामपंथी पार्टियाँ

पार्टी के वरिष्ठ नेता नीलोत्पल बसु ने कहा कि सरकार को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होगे. उन्होंने कहा कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अपने विचारों से उन्हें अवगत करा दिया था लेकिन कैबिनेट ने इसकी अनदेखी की.

नीलोत्पल बसु ने कहा कि सरकार समाज के धनी वर्ग पर भार देना नहीं चाहती और वह सिर्फ़ ग़रीबों को प्रताड़ित कर रही है.

विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने भी इस फ़ैसले का विरोध किया है. पार्टी ने कैबिनेट के फ़ैसले को जनविरोधी बताया है.

पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में हुई बढ़ोत्तरी के बाद तेल कंपनियों को अतिरिक्त 9200 करोड़ रुपए मिलेंगे.

लेकिन तेल कंपनियों का आकलन है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें बढ़ने से उन्हें वर्ष 2006-07 में क़रीब 73,500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुक़सान होगा.

पिछले साल सितंबर में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की थी. लेकिन मार्च 2002 से किरासन तेल की क़ीमतें नहीं बढ़ी हैं. जबकि नवंबर 2004 से एलपीजी की क़ीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेट्रोल और डीज़ल पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत करने का भी फ़ैसला किया है.

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