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शनिवार, 04 मार्च, 2006 को 15:25 GMT तक के समाचार
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जी-7 देशों को पीछे छोड़ देगा चीन
एक चीनी मज़दूर
चीन की अर्थव्यवस्था को सबसे अधिक लाभ उसके सस्ते श्रम के कारण हो रहा है
चीन की अर्थव्यवस्था जिस गति से बढ़ रही है उससे वर्ष 2050 तक चीन दुनिया के सबसे अमीर देशों को पीछे छोड़ देगा.

ये दावा किया गया है जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी संस्था प्राइसवाटरहाउस कूपर्स या पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट में.

रिपोर्ट कहती है कि 2005 से 2050 के बीच चीन की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना हो जाएगा.

साथ ही इसमें ये भी कहा गया है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

पीडब्ल्यूसी की रिपोर्ट कहती है कि 2050 तक भारत और ब्राज़ील, जापान और जर्मनी को पीछे छोड़कर दूसरे और तीसरे नंबर की अर्थव्यवस्था बन जाएँगे.

आधार

पीडब्ल्यूसी ने आर्थिक विकास के बारे में ये रिपोर्ट पर्चेज़िंग पावर पेरिटी(पीपीपी) के आधार पर तैयार की है जिसके तहत अर्थव्यवस्था का आकार स्थानीय लागत के आधार पर तय किया जाता है.

जैसे अभी डॉलर के हिसाब से तो चीन की अर्थव्यवस्था अमरीकी अर्थव्यवस्था की 18 प्रतिशत बैठती है.

मगर (पीपीपी) के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था अमरीकी अर्थव्यवस्था का 76 प्रतिशत है.

पीपीपी के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था 2050 में अमरीका से 43 प्रतिशत बड़ी होगी लेकिन इसे अगर डॉलर में आँका जाए तो तब भी चीन अमरीका से थोड़ा पीछे रहेगा.

रिपोर्ट के अनुसार पीपीपी के ही आधार पर एक समय जर्मनी, ब्रिटेन और फ़्रांस की अर्थव्यवस्था मेक्सिको से छोटी हो जाएगी और रूस के बराबर.

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