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'चीन सबसे बड़ा निर्यातक बन सकता है' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीनी अर्थव्यवस्था के विकास की गति के कमज़ोर पड़ने के कोई संकेत नहीं हैं और एक नए अध्ययन के अनुसार अगले पाँच साल में चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बन सकता है. पेरिस स्थित संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के अध्ययन में कहा गया है कि 2010 तक विश्व व्यापार में चीन का हिस्सा बढ़ कर 10 प्रतिशत हो जाने की संभावना है. उल्लेखनीय है कि पिछले दो दशकों से चीन की अर्थव्यस्था औसत 9.5 प्रतिशत के दर से बढ़ रही है. ओईसीडी ने पहली बार चीनी अर्थव्यवस्था का विश्लेषण किया है. इस अध्ययन में पाया गया कि कम्युनिस्ट शासित चीन की अर्थव्यवस्था पर निजी क्षेत्र का दबदबा है. चीन के सकल घरेलू उत्पाद का आधा हिस्सा निजी कंपनियों से आता है. इसी तरह नौकरी के नए अवसरों में से अधिकांश निजी क्षेत्र में सृजित हो रहे हैं. समस्याएँ ओईसीडी की रिपोर्ट के अनुसार चीन में आम आदमी की आय बढ़ती जा रही है और आर्थिक विकास के कारण ग़रीबी से निपटने में सहायता मिल रही है. कम से कम अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की पकड़ कमज़ोर पड़ती जा रही है. इन सारे सकारात्मक संकेतों के बीच ओईसीडी ने यह भी पाया कि वहाँ जनोन्मुखी शासन की प्रणाली भी नहीं रही है और सरकार को स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश बढ़ाने की दरकार है. ओईसीडी ने चीन में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या गहराते जाने का भी ज़िक्र किया है. उल्लेखनीय है कि दुनिया के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से पाँच चीन में हैं. |
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