|
सूअर का वीर्य अंतरिक्ष में भेजेगा चीन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन ने सुअरों के शुक्राणुओं के अंतरिक्ष यात्रा कराने का फ़ैसला किया है ताकि समझा जा सके कि अंतरिक्ष की भारशून्यता का उन पर क्या असर होता है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिनहुआ का कहना है कि ख़ास नस्ल के सुअरों का वीर्य अक्तूबर में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि शेनज़ोऊ नाम के अंतरिक्ष यान से लगभग 40 ग्राम वीर्य अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा. वीर्य के कुछ नमूने अंतरिक्ष यान के विशेष कक्ष में होंगे और कुछ अंतरिक्ष के सामान्य वातावरण में. कुछ समय बाद जीवित बचे शुक्राणुओं को धरती पर लाकर उनका परीक्षण किया जाएगा कि अंतरिक्ष की गुरूत्व के अभाव का उन पर क्या असर हुआ है. इस काम के लिए जिन सुअरों को चुना गया है उन्हें रॉन्गचांग कहते हैं और ये पूरे चीन में अपने माँस की गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं. कृषि विशेषज्ञ इन शुक्राणुओं का इस्तेमाल करके धरती पर मादा सुअरों का गर्भाधान करना चाहते हैं ताकि शुक्राणु की अंतरिक्ष यात्रा के असर को पूरी तरह समझा जा सके. चीन ने अब से दो वर्ष पूर्व अपने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजा था जिसके बाद वह ऐसा कर पाने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया था. अब तक सिर्फ़ अमरीका, रूस और चीन ही ऐसे देश हैं जिन्होंने अपने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में भेजा है. चीन के वैज्ञानिक जल्दी ही चांद पर जाने की भी योजना बना रहे हैं. चीन के अंतरिक्ष अभियान का अगला चरण काफ़ी महत्वाकांक्षी है, उसके अंतरिक्ष यात्री धरती के पाँच या छह चक्कर लगाकर वापस आना चाहते हैं. सुअरों के वीर्य को अंतरिक्ष भेजकर उसके परिणामों का अध्ययन करने से क्या वैज्ञानिक लाभ हो सकते हैं इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||