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महाराष्ट्र को विश्व बैंक से बड़ा कर्ज़ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक महाराष्ट्र के किसानों को सिंचाई के लिए साढ़े 32 करोड़ डॉलर का कर्ज़ देगा. दिल्ली में शुक्रवार को विश्व बैंक प्रमुख पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ और भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम की उपस्थिति में इस बारे में समझौते पर दस्तख़त हुए. समझौते के बाद वित्त मंत्रालय की ओर से जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि कर्ज़ की राशि से महाराष्ट्र में और 22 प्रतिशत कृषि भूमि को सिंचाई के दायरे में लाया जाएगा. बयान के अनुसार इससे खेती लायक भूमियों की औसत आय 49 प्रतिशत बढ़ जाएगी. और पूरी तरह खेती पर निर्भर 33,610 परिवारों को इस योजना के पूरे होने तक ग़रीबी की रेखा से ऊपर ले जाया जा सकेगा. इस अवसर पर पॉल वुल्फ़ोवित्ज़ ने कहा,"मुझे आशा है कि ये योजना जिसमें कि महाराष्ट्र में पानी की हर बूँद का महत्व होगा, इस बात का एक शानदार उदाहरण साबित होगी कि कैसे विकास के काम से संघर्ष कर रहे लोगों की ज़िंदगी बेहतर की जा सकती है". वहीं भारतीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा,"जल क्षेत्रों की मरम्मत, उनका नवीनीकरण और उनका बचाव हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकता है". चिदंबरम ने कहा कि महाराष्ट्र को विश्व बैंक से मिले कर्ज़ से राष्ट्रीय लक्ष्य की पूर्ति होती है क्योंकि इससे पुनर्वास और सिंचाई क्षेत्रों के नवीनीकरण के साथ-साथ बाँधों की सुरक्षा भी बेहतर होती है. |
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