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बच्चे ज़्यादा तो पानी कम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र में एक ऐसा क़ानून बनाने की प्रक्रिया जारी है जिसके तहत केला और गन्ना उगाने वाले उन किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पाएगा जिनके दो से ज़्यादा बच्चे होते हैं. इस क़ानून के तहत ड्रिप इरिगेशन यानि बूँद-बूँद पानी से सिंचाई और स्प्रिंकलर इरिगेशन यानि फ़वारे से सिंचाई करना ज़रूरी होगा. ये योजना महाराष्ट्र के जल-संसाधन मंत्री अजीत पवार की है जो मानते हैं कि बढ़ती आबादी और पानी की किल्लत को सुलझाने का यही सबसे बेहतर तरीका है. महाराष्ट्र के जल-संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी एसवी सोढल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी बढ़ रही है लेकिन पानी की सप्लाई सीमित है. केले और गन्ने की खेती के लिए काफ़ी मात्रा में पानी की ज़रूरत पड़ती है. लेकिन सरकार ने ये स्पष्ट किया है कि इस क़ानून का उन लोगों पर असर नहीं होगा जिन लोगों के पहले से दो से ज़्यादा बच्चे हैं. लेकिन क़ानून बनने के बाद यदि इन किसानों के दो से ज़्यादा बच्चे होते हैं तो वे इस क़ानून के दायरे में आ जाएँगे. किसानों के संगठन किसान समनवय समिति के संस्थापक शरद जोशी का कहना था कि यदि सरकार कृषि क्षेत्र पर प्रतिबंध लगा रही है और ड्रिप इरिगेशन इत्यादि की बात कर रही है तो उसे इसके लिए किसानों को कर्ज़ देना चाहिए और आर्थिक मदद करनी चाहिए. महाराष्ट्र की विधान परिषद ने तो ये विधेयक पारित कर दिया है लेकिन विधानसभा ने इसे पारित करना है. विधेयक विधानसभा में सोमवार को पेश होगा. |
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