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शुक्रवार, 13 मई, 2005 को 17:53 GMT तक के समाचार
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बुरी हालत में हैं केरल के किसान

काली मिर्च
काली मिर्च की कीमतें बाज़ार में लगातार घट रही हैं
काली मिर्च, इलायची, चाय, कॉफी और काजू के खेत बरसों से केरल को महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा दिलाते रहे है.

काली मिर्च वायनाड ज़िले की 70 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन पर उगाई जाती है और इसे अधिकतर छोटे किसान उगाते है. काली मिर्च की खेती कर रहे किसानों में केवल 10 प्रतिशत बड़े किसान हैं.

लेकिन पिछले वर्षों में विश्व बाज़ार में काली मिर्च का दाम पाँच हज़ार रुपए प्रति क्विंटल तक घट गया. साथ ही, वियतनाम जैसे देश काली मिर्च के बाज़ार में उतर गए जिससे केरल के किसानों की मुसीबतें और बढ़ गईं.

एक साल पहले वायनाड के क़रीब सौ किसानों ने आत्महत्या कर ली. कारण था काली मिर्च के गिरते दामों के कारण उन पर कर्ज़ का भार बढ़ना. लोकसभा चुनाव के बाद मनमोहन सिंह सरकार ने किसानों को मदद करने का एलान किया कि वो किसानों से काली मिर्च ख़रीदेगी.

लेकिन छह महीनों बाद राज्य सरकार केवल चार हज़ार टन ख़रीद पाई है. किसान अभी भी अच्छे दाम का इंतज़ार कर रहे है.

काली मिर्च के खेतों से गुज़रते हुए हमारी बीजू नाम के एक किसान से मुलाक़ात हुई. बीजू ने कहा "मैंने निजी बैंक से 25 हज़ार रुपए का ऋण लिया था. काली मिर्च के दाम न बढ़ने से शायद इसे समय से वापिस नहीं कर पाऊँगा."

बदलाव

पिछले वर्षों में विश्व व्यापार प्रणाली में बदलाव हुआ है. बदले हुए व्यापारिक माहौल में वियतनाम के बाज़ार में उतरने से भारतीय किसानों की हालत ख़राब हो रही है.

केरल के किसान
केरल के किसानों को वियतनाम से कड़ी चुनौती मिल रही है

भारतीय मसाला बोर्ड के अध्यक्ष सीके बोस, वियतनाम को भारतीय किसानों के लिए एक ख़तरा मानते है. उन्होंने कहा कि "इस समय वियतनाम वो सभी मसाले पैदा कर रहा है जिनके लिए भारत जाना जाता है. अब चाय और कॉफी भी वियतनाम में बड़ी मात्रा में पैदा किए जा रहा है."

काली मिर्च निर्यातकों के संगठन के अध्यक्ष किशोर शामजी, केरल के किसानों की ख़राब हालत के लिए किसानों की मुक्त व्यापार समझौतों को ज़िम्मेदार ठहराते है.

कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था का सीधा असर यहाँ के इसाई समुदाय पर दिखता है जो कि मुलानकोली और पुलपली में सर्वाधिक है. जिस समय काली मिर्च की खेती से सबकी आय अच्छी भी उस समय यहाँ बड़े-बड़े गिरजाघरों का निर्माण हुआ. आज चढ़ावा कम हो गया है.

चर्च की भी अपनी ज़मीन है और वो भी काली मिर्च की खेती में शामिल है. पहले मलानकारा कैथोलिक चर्च के केंद्रीय दफ़्तर में हर जगह से चढ़ावे का हिस्सा आता था. बदली परिस्थिति में यह सभी ज़िले के चर्च अभी केंद्रीय दफ़्तर की मदद चाहते हैं.

हमारी भेंट फादर जार्ज वेटिकल से हुई. जॉर्ज कहते हैं “चर्च और लोगों के नज़दीकी रिश्ते हैं. लोगों की परेशानियों का असर चर्च पर दिखता है. पूरे क्षेत्र में चढ़ावे में 10 प्रतिशत से अधिक की कमी हुई है और कई गिरजाधरों की मरम्मत का काम रूक गया है. हमारी समझ में आयात के बढ़ने से यहाँ की काली मिर्च की खेती पर प्रभाव पड़ा है.”

केरल सरकार किसानों की हालत में सुधार के लिए प्रयास तो कर रही है लेकिन किसान मानने को तैयार नहीं हैं कि सरकार की तरफ़ से पर्याप्त कोशिशें हो रही हैं.

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