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'गूगल' के भविष्य को लेकर गहरी चिंता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के सबसे मशहूर इंटरनेट सर्च इंजन गूगल के शेयर बाज़ार में उतरने के फ़ैसले के बाद अब उसके भविष्य को लेकर कुछ चिंता होने लगी है. विश्लेषकों का कहना है कि ऑनलाइन विज्ञापनों पर ख़र्च किए जाने वाली रक़म में गिरावट आने की आशंका है जिसका सीधा असर गूगल पर पड़ेगा. ज्यूपिटर रिसर्च के मुताबिक़, साल 2003 में ऑनलाइन विज्ञापनों से होने वाली बिक्री 65 प्रतिशत बढ़ी थी लेकिन पाँच साल बाद यानी 2009 में इसमें सिर्फ़ 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अंदाज़ा लगाया जा रहा है. नई रिपोर्ट गूगल के लिए अच्छी ख़बर नहीं है क्योंकि गूगल सबसे ज़्यादा पैसा इन्हीं विज्ञापनों के ज़रिए कमाता है. इससे गूगल के शेयर बाज़ार पर उतरने की योजना पर असमंजस के बादल छा जा छाने की संभावना है. जब किसी जानकारी की तलाश के लिए गूगल के सर्च बॉक्स में शब्द लिखा जाता है तो गूगल उससे जुड़े विज्ञापनों का पेज दिखाता है. पिछले कुछ वर्षों से गूगल शेयरों के बाज़ार में आने का बेसब्री से इंतज़ार किया जा रहा था. गूगल को आशा है कि शेयर बाज़ार में उतरने से कंपनी को क़रीब 3 अरब डॉलर का फ़ायदा होगा और कंपनी की कुल क़ीमत भी 36 अरब डॉलर हो जाएगी. संदेह कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ऑनलाइन के ज़रिए सीधे ग्राहकों शेयर बेचने की गूगल की योजना से शेयरों की क़ीमतों के साथ छेड़छाड़ भी हो सकती है. इससे पहले इस बात को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही थी कि कंपनी का मुनाफ़ा कमाने का जो रिकॉर्ड था, वो भी अब कमज़ोर पड़ता जा रहा है. गूगल 108 से 135 डॉलर प्रति शेयर से भाव की उम्मीद रखता है लेकिन विश्लेषकों को शक है कि अमरीकी बाज़ार में इस समय चल रही सुस्ती के दौर में शेयर इतने ऊँचे भाव पर बिक सकेंगे. |
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