विटामिन बी12 की कमी आपके शरीर के लिए घातक, खाने में इन चीज़ों को करें शामिल

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- Author, सुरभि गुप्ता
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मई 2025 में यूरोपियन जर्नल ऑफ़ कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन में भारत में विटामिन बी12 की कमी पर एक रिसर्च आर्टिकल छपा.
इसमें विटामिन बी12 की कमी पर की गई कई स्टडीज़ के आंकड़ों पर गौर किया गया है.
इस मेटा-एनालिसिस में जिन 20 स्टडीज़ को लिया गया, उनमें कुल 18,750 पार्टिसिपेंट्स शामिल थे. इसमें 51 प्रतिशत लोगों में विटामिन बी12 की कमी पाई गई. इस रिसर्च आर्टिकल के मुताबिक़ स्टडी में शामिल 65 प्रतिशत शाकाहारियों में इसकी कमी देखी गई.
विटामिन बी12 क्या है? इसकी कमी से क्या दिक्क़तें हो सकती हैं? इसकी कमी को पूरा करने के लिए क्या किया जा सकता है?
इन सवालों के जवाब के लिए हमने गुरुग्राम के फ़ोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की हेड क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति खाटूजा और 'दिल्ली डायट्स' की संस्थापक और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अमृता मिश्रा से बात की.
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हमें विटामिन बी12 की ज़रूरत क्यों होती है?

शरीर की कई प्रक्रियाओं के लिए विटामिन्स की ज़रूरत होती है. विटामिन्स दो तरह के होते हैं, एक फ़ैट में घुलने वाले विटामिन, जैसे विटामिन ए, विटामिन डी, विटामिन ई और विटामिन के.
दूसरे पानी में घुलने वाले विटामिन, जैसे- विटामिन सी, बी-कॉम्प्लेक्स. इन्हीं विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स में एक महत्वपूर्ण विटामिन है विटामिन बी12.
गुरुग्राम के फ़ोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की हेड क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति खाटूजा कहती हैं, "विटामिन बी-12 एक माइक्रोन्यूट्रिएंट यानी सूक्ष्म पोषक तत्व है. भले ही इसकी ज़रूरत कम मात्रा में हो, लेकिन हमारे शरीर में इसकी अहम भूमिका होती है."
विटामिन बी12 शरीर की हर कोशिका के लिए ज़रूरी है. दीप्ति खाटूजा के मुताबिक़ विटामिन बी12 की कोशिका के अंदर होने वाले ज़रूरी केमिकल रिएक्शन, जैसे खाने से एनर्जी और नए अणुओं के निर्माण जैसी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका होती है.
वह कहती हैं कि ये हमारे तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम के कामकाज़ के लिए भी अहम होता है. ये हमारे ब्लड सेल्स को हेल्दी रखने में मदद करता है. इसके अलावा इसका हमारे इम्यून सिस्टम पर भी असर पड़ता है.
अमृता मिश्रा कहती हैं कि विटामिन बी12 रेड ब्लड सेल्स बनाने के लिए ज़रूरी होता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं.
किन चीज़ों में पाया जाता है विटामिन बी12

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विटामिन बी12 मुख्य रूप से मांसाहार में पाया जाता है. प्लांट फ़ूड में विटामिन बी12 नहीं होता, जब तक कि उनमें ये विटामिन अलग से न मिलाया गया हो यानी फ़ोर्टिफ़ाइड चीज़ें.
मांस, मछली, अंडा, दूध और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स में विटामिन बी-12 होता है.
ये अंडा, चिकन, रेड मीट, मछली, सी फ़ूड और दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स में होता है.
इसके सप्लीमेंट्स भी आते हैं. अमृता मिश्रा बताती हैं कि विटामिन बी12 के कैप्सूल और इंजेक्शन भी आते हैं. हालांकि, किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूरी होती है.
दीप्ति खाटूजा कहती हैं, "विटामिन बी12 सप्लीमेंट्स डॉक्टर की गाइडेंस में निर्धारित समय तक लिए जा सकते हैं."
विटामिन बी12 की कमी

अमृता मिश्रा विटामिन बी12 की कमी की वजह ख़राब खानपान, प्रोसेस्ड फ़ूड, वीगन डाइट और पर्याप्त मात्रा में डेयरी प्रोडक्ट्स न लेना बताती हैं.
वहीं इसकी कमी उनमें भी हो सकती है, जो विटामिन बी12 वाली चीज़ें भले ही लेते हों लेकिन आपकी बॉडी उसे अब्ज़ॉर्ब नहीं कर पाती है. यानी आप खा तो रहे हैं लेकिन उस खाने से आपका शरीर विटामिन बी12 ठीक से ले नहीं पा रहा है.
विटामिन बी12 शरीर को कैसे मिल पाता है?
हमारे शरीर में विटामिन बी12 का पहुँचना एक जटिल प्रक्रिया है. खाने में, विटामिन बी12 प्रोटीन से बंधा होता है.
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ (एनआईएच) के मुताबिक़ शरीर में विटामिन बी12 का अवशोषण दो चरणों में होता है. पहले चरण में, पेट का हाइड्रोक्लोरिक एसिड खाने में मौजूद प्रोटीन से विटामिन बी12 को अलग करता है.
दूसरे चरण में, प्रोटीन से अलग हुआ विटामिन बी12 पेट में बनने वाले एक प्रोटीन, जिसे इंट्रिंसिक फ़ैक्टर कहा जाता है, से जुड़ता है और फिर शरीर में अवशोषण होता है.

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सप्लीमेंट्स में मौजूद विटामिन बी12 किसी प्रोटीन से नहीं जुड़ा होता है, इसलिए इसके अवशोषण के लिए पहले चरण की ज़रूरत नहीं होती है. हालांकि, शरीर में अवशोषण के लिए सप्लीमेंट्स के विटामिन बी12 का भी इंट्रिंसिक फ़ैक्टर से जुड़ना ज़रूरी होता है.
अगर विटामिन बी12 के अवशोषण की प्रक्रिया का कोई भी हिस्सा ठीक से नहीं होता, तो इसकी कमी होने का रिस्क बढ़ जाता है.
एनआईएच के मुताबिक़ विटामिन बी12 की कमी का रिस्क ऐसे लोगों को हो सकता है, जिन्हें पर्याप्त विटामिन बी12 नहीं मिल पाता हो या जिनके शरीर में इसका अवशोषण ठीक से नहीं हो पाता. जैसे,
उम्रदराज लोग: उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों के पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा पर्याप्त नहीं होती, जिससे खाने में मौजूद विटामिन बी-12 का अवशोषण कठिन हो जाता है. 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को विटामिन बी12 के लिए इस विटामिन से फ़ोर्टिफ़ाइड चीज़ें या सप्लीमेंट्स की ज़रूरत पड़ सकती है.
एट्रॉफ़िक गैस्ट्राइटिस वाले लोग: इस ऑटोइम्यून बीमारी में पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और इंट्रिंसिक फ़ैक्टर बनने में कमी आ जाती है, जिससे विटामिन बी12 का पर्याप्त अवशोषण नहीं हो पाता.
पर्निशियस एनीमिया वाले लोग: इस स्थिति में शरीर इंट्रिंसिक फैक्टर नहीं बना पाता, जो विटामिन बी12 के अवशोषण के लिए ज़रूरी होता है. ऐसे लोग खाने और सप्लीमेंट्स दोनों से विटामिन बी12 अवशोषित नहीं कर पाते. डॉक्टर आमतौर पर इस स्थिति का इलाज विटामिन बी12 के इंजेक्शन से करते हैं.
जिन लोगों की पेट या आंतों की सर्ज़री हुई हो: पेट के किसी हिस्से को निकालने जैसी सर्ज़री के बाद शरीर में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और इंट्रिंसिक फैक्टर का बनना कम हो सकता है, जिससे विटामिन बी12 का अवशोषण में मुश्किल होती है.
शाकाहारी और वीगन लोग: जो लोग बहुत कम या बिल्कुल भी एनिमल फ़ूड नहीं खाते, उन्हें खाने से पर्याप्त विटामिन बी12 नहीं मिल पाता.
विटामिन बी12 की कमी के लक्षण और शरीर पर असर

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विटामिन बी12 की कमी के लक्षण सामने आने में कई साल लग सकते हैं.
दीप्ति खाटूजा बताती हैं, "विटामिन बी12 की कमी विकसित होने में समय लगता है, जिससे इसके लक्षण भी धीरे-धीरे दिखाई देते हैं और समय के साथ तेज़ हो जाते हैं."
विटामिन बी12 की कमी के लक्षण-
- हाथों या पैरों में अजीब सा महसूस होना, सुन्न पड़ना या झुनझुनी जैसा एहसास होना
- चलने में मुश्किल होना (बैलेंस बनाने में समस्या)
- पर्निशियस एनीमिया
- जीभ में सूजन
- सोचने और समझने में कठिनाई या मेमोरी लॉस
- कमज़ोरी
- थकान
- स्किन का पीला पड़ना
- मूड स्विंग्स या चिड़चिड़ापन
- एकाग्रता में कमी
किसी को विटामिन बी12 की कमी है या नहीं, इसका पता विटामिन बी12 लेवल टेस्ट, जो कि एक ब्लड टेस्ट होता है, उससे चल सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित














