हिंदू महापंचायत: 'सख़्त पाबंदी' के बावजूद पलवल में 'हेट स्पीच', पुलिस क्या कह रही है?

हिंदू महापंचायत

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    • Author, प्रियंका झा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

हरियाणा के पलवल के पोंडरी गाँव में रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच हुई हिंदू महापंचायत में ये फै़सला लिया गया कि 28 अगस्त को नूंह में फिर से विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की बृज मंडल यात्रा निकाली जाएगी. 31 जुलाई को सांप्रदायिक हिंसा की वजह से ये यात्रा अधूरी रह गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस कार्यक्रम में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सैकड़ों हिंदूवादी संगठनों के नेता जुटे जिनमें से कइयों ने मुसलमानों पर सीधे या इशारों में निशाना साधते हुए 'नफ़रती बयान' दिए.

इस महापंचायत में नूंह को गो-हत्या मुक्त ज़िला घोषित करने जैसी मांगें भी रखी गईं.

'सर्व जातीय महापंचायत' में पलवल, गुरुग्राम और आसपास के अन्य इलाकों से लोग जुटे थे. इस दौरान ये फ़ैसला लिया गया कि यात्रा नूंह के नल्हड़ से फिर शुरू होगी और फ़िरोज़पुर झिरका के झिर और शिंगार मंदिरों से गुज़रेगी.

महापंचायत से पहले पुलिस ने ये कहा था कि कार्यक्रम को सशर्त मंज़ूरी दी गई है और इसमें किसी भी तरह के नफ़रती बयान पर सख्त पाबंदी है.

हालांकि, कार्यक्रम के जो वीडियो अब सामने आ रहे हैं उसमें हिंदू संगठनों के नेता मुस्लिम बहुल नूंह ज़िले में हुई हिंसा का 'बदला लेने', हिंदुओं को आत्मरक्षा के लिए हथियार रखने की इजाज़त देने और युवाओं से 'खून गर्म' रखने जैसी बातें करते नज़र आ रहे हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा गो-रक्षक दल के आचार्य आज़ाद शास्त्री ने मंच से युवाओं को कहा कि उन्हें "एफ़आईआर से डरना नहीं चाहिए और जल्द से जल्द मेवात में 100 राइफ़लों के लाइसेंस सुनिश्चित करने चाहिए."

नूंह की हिंसा के बाद हिंदू संगठनों की ये दूसरी महापंचायत थी. इससे पहले गुरुग्राम के तिगरी गाँव में भी हिंदू संगठन जुटे थे. पहले आयोजन में भी 'मुसलमानों के बहिष्कार' जैसे आह्वान किए गए थे.

अब सवाल ये उठ रहा है कि जिस कार्यक्रम को सशर्त मंज़ूरी दी गई थी, वहां पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में किसी एक समुदाय को निशाना बनाते हुए उकसाने वाले भाषण कैसे दिए गए और इन पर क्या कार्रवाई होगी.

नूंह हिंसा

हिंदू संगठनों ने रखी ये मांगें

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस महापंचायत में राज्य में बजरंग दल के संयोजक भारत भूषण, वीएचपी के सोशल मीडिया हेड अनुराग कुलश्रेष्ठ, सोहना से बीजेपी विधायक संजय सिंह, पलवल के पूर्व विधायक सुभाष चौधरी, नूंह में बीजेपी के पूर्व ज़िला अध्यक्ष सुरेंद्र आर्य के साथ ही वीएचपी, बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों के कई नेता मौजूद थे.

महापंचायत का संचालन एक खाप नेता अरुण जैलदर ने किया. महापंचायत के दौरान हिंदू संगठनों ने मुख्य रूप से प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं. जैसे:

  • नूंह ज़िले को ख़त्म कर के इसे पड़ोस के पलवल और गुरुग्राम ज़िले में मिलाना
  • हिंदुओं के घर और दुकानों को हुए नुकसान का सर्वे और उन्हें मुआवज़ा देना
  • नूंह को गो-तस्करी मुक्त घोषित करना
  • नूंह में रैपिड एक्शन फोर्स और केंद्रीय सुरक्षा बलों की चार बटालियनों की तैनाती
  • नूंह और पलवल में रहने वालों को आत्म रक्षा के लिए हथियारों के लाइसेंस मिले
  • नूंह हिंसा की नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) से जाँच
  • हिंसा में मरने वाले हिंदुओं के परिवारों को एक करोड़ रुपये और घायलों को 50 लाख का मुआवज़ा, परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी
  • नूंह हिंसा से जुड़े मामलों को गुरुग्राम या अन्य ज़िलों में ट्रांसफ़र किया जाए
  • दूसरी जगहों से नूंह में आकर रहने वाले रोहिंग्याओं को बाहर करना
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पाबंदी के बाद भी 'हेट स्पीच'

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नूंह हिंसा के बाद विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठनों के प्रदर्शन में नफ़रती बयान के मामले सामने आए. सुप्रीम कोर्ट ने नफ़रती बयानों को अस्वीकार्य बताते हुए इस पर रोक लगाने के लिए कहा था.

पलवल में हुई महापंचायत पहले नूंह ज़िले के किरा गाँव में होनी थी लेकिन क़ानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इसकी इजाज़त नहीं दी.

हालांकि, नूंह से करीब 30 किलोमीटर दूर पलवल ज़िला प्रशासन ने इसकी मंज़ूरी दी, लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी लगाई गईं.

आयोजन से पहले पलवल के एसपी लोकेंद्र सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा था, "आज हिंदू सर्वजातीय महापंचायत का आयोजन हो रहा है लेकिन इसके लिए शर्तों के साथ मंज़ूरी दी गई है. इसमें किसी भी प्रकार की हेट स्पीच सख्त मना है. जुटने वाले लोगों की संख्या सीमा तय की गई है. हथियार और हिंसा भड़काने वाली कोई प्रतीकात्मक चीज़ लाने से मना किया गया है ताकि ये पंचायत शांतिपूर्वक हो सके. किसी भी शरारती तत्व पर हमारी नज़र रहेगी और किसी को भी कानून व्यवस्था हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा."

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हालांकि, अब हरियाणा गौ रक्षक दल के नेता आचार्य आज़ाद शास्त्री का एक बयान खूब चर्चा में है, जिसे इसी महापंचायत के दौरान का बताया जा रहा है.

इस वीडियो में वो कहते हैं, "रिवॉल्वर नहीं राइफ़ल रखनी चाहिए सबको क्योंकि रिवॉल्वर दूर तक मार नहीं करती. मैं युवाओं से भी निवेदन करूंगा कि अपने ख़ून को गर्म रखना पड़ेगा, अभी नहीं तो कभी नहीं."

वीडियो में आचार्य आज़ाद ये भी कहते दिख रहे हैं, "किसी भी मुसलमान की हिंदुओं को आंख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं होनी चाहिए."

वहीं, इस आयोजन में मौजूद सोहना से बीजेपी विधायक संजय सिंह ने लोगों को आश्वासन दिया कि यात्रा किसी भी कीमत पर पूरी होगी और प्रशासन उनके साथ है.

'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार संजय सिंह ने महापंचायत में आए लोगों से कहा, "पहले भी गोहत्या, हत्या और अन्य दुखद घटनाएं हुई हैं, लेकिन ये पहली बार है जब मुख्यमंत्री (मनोहर लाल खट्टर) ने हरियाणा में बुलडोज़र एक्शन शुरू किया है. कोर्ट के हस्तक्षेप से ये (निर्माण ढहाना) कुछ समय के लिए रुक गया है लेकिन मैं आपको ये भरोसा दिला सकता हूं कि जैसे ही कोर्ट की रोक हटेगी, अपराधियों और उनके घरों को बख्शा नहीं जाएगा."

नूंह से विधायक और कांग्रेस नेता आफ़ताब अहमद महापंचायत के आयोजन को मंज़ूरी देने पर सरकार और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हैं.

आफ़ताब अहमद ने बीबीसी से कहा, "इस तरह की पंचायत को प्रशासन का इजाज़त देना ये दिखाता है कि किस तरह का माहौल ये सरकार रखना चाहती है. इस तरह की पंचायतों में जो अनाप-शनाप बातें होती हैं, उसका फ़ायदा कुछ नहीं होता. अब ज़रूरत है शांति बनाने की. ऐसी क्या ज़रूरत है जिसकी वजह से सरकार ऐसी पंचायतों को परमिशन देती है. जिन शर्तों पर परमिशन दी जाती है, वो तो मानी नहीं जाती."

"इस तरह के आयोजन का यही सही समय"

नूंह हिंसा

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हिंसा के बाद नूंह के तनावपूर्ण माहौल के बावजूद इस तरह की महापंचायत के आयोजन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

हालांकि, वीएचपी नेता देवेंद्र यादव का कहना है कि इस तरह के माहौल में ही ऐसे आयोजनों की ज़रूरत है.

वो कहते हैं, "अभी इस तरह के माहौल में ही तो ये सारी चीज़े ज़रूरी हैं. वहां (नूंह) हर बार श्रावण मास में यात्राएं चलती थीं. वो यात्रा अधूरी रह गई थी, अब आख़िरी सोमवार है श्रावण मास का (28 अगस्त) तो इसलिए ये सब ज़रूरी है."

नूंह में हिंदुओं को हथियार के लाइसेंस दिए जाने की मांग के पीछे तर्क देते हुए देवेंद्र यादव कहते हैं "अल्पसंख्यक होने के नाते हमें (हिंदुओं को) ज़्यादा ख़तरा है. हमारे पास अगर हथियार होते लाइसेंस वाले, तो शायद ये हिंसा होती नहीं. हमारे पास तो कुछ था ही नहीं, इसलिए हमारे लोगों की हत्या की गई. उस समुदाय के पास तो अवैध हथियारों का जखीरा रखा हुआ है, वो कहां से आया उनके पास?"

देवेंद्र यादव ने बताया कि महापंचायत में ड्यूटी मजिस्ट्रेट, एसपी, डिप्टी कमीश्नर के प्रतिनिधि थे. उनके माध्यम से हिंदू संगठनों ने अपनी मांगें सीएम और पीएम से की है.

इस तरह की महापंचायतें क्या पहले से बिगड़े माहौल को और बदतर बनाएंगी, इस पर वो कहते हैं, "बिगड़ेगा क्यों? अगर हमारी यात्रा नहीं होती, तो बिगड़ेगा. अंदर ही अंदर रहेगा फिर पता नहीं कब क्या हो जाए. बल्कि यात्रा होने से सद्भाव बढ़ेगा. यात्रा आप कैसे रोक सकते हो? न उनकी रुकेगी न हमारी रुकेगी."

वो कहते हैं, "षड्यंत्र यही था कि एक बार इस तरह का दंगा हो जाएगा तो इनकी यात्रा बंद होगी. ऐसे तो फिर अमरनाथ की यात्रा बंद करेंगे, वैष्णो देवी की बंद करेंगे और हरिद्वार भी नहीं जाने देंगे. ये यात्राएं बंद होगी तो देश में बहुत अलग तरह का माहौल बन जाएगा."

पुलिस का क्या कहना है?

नूंह हिंसा
इमेज कैप्शन, नूंह में हिंदू-मुसलमान सांप्रदायिक दंगों के बाद बहुत से मुसलमानों की दुकानों और घरों को तोड़ दिया गया.

आयोजन की मंज़ूरी ही इस शर्त पर दी गई थी कि कोई हेट स्पीच नहीं होगी.

लेकिन इसके बावजूद महापंचायत में भड़काऊ भाषण दिए गए और अब सरकार के साथ ही पुलिस भी सवालों के घेरे में आ गई है.

हालांकि, नूंह की एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) ममता सिंह ने बीबीसी को बताया कि पलवल के एसपी महापंचायत से जुड़े सारे वीडियो की जाँच कर रहे हैं.

वो कहती हैं, "जो आपकी चिंता है वही हमारी भी चिंता है. हम सारे वीडियो देख रहे हैं और अगर हेट स्पीच पाई जाती है तो एक्शन लिया जाएगा."

तनावपूर्ण माहौल में इस तरह की महापंचायत की मंज़ूरी देने की क्या ज़रूरत थी, ये पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "इसका जवाब पलवल के डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर से ही मिल सकता है. पुलिस का काम 'लॉ एंड ऑर्डर' मैनेज करना है. मुझे पूरा यकीन है कि कानून-व्यवस्था की जहाँ तक बात है तो पुलिस ने अपनी तैयारी पूरी की थी. कहीं कोई अप्रिय स्थिति देखने को नहीं मिली."

हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि हमने न सिर्फ़ आयोजकों के सामने नफ़रती बयान न देने की शर्त रखी थी बल्कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के साल 2022 में दिए उस आदेश की कॉपी भी दी थी, जिसमें पुलिस को बिना शिकायत के भी हेट स्पीच के मामलों में मुक़दमा दर्ज करने का अधिकार दिया गया था.

बीबीसी ने पलवल डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर से इस मामले में संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन ख़बर लिखे जाने तक उनसे बात नहीं हो सकी.

नूंह में हुआ क्या था?

नूंह हिंसा
इमेज कैप्शन, दंगों के बाद कई नौजवान गिरफ़्तारी के डर से इलाक़ा छोड़कर चले गए.

हरियाणा के नूंह ज़िले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन बजरंग दल की अगुआई में 31 जुलाई को बृजमंडल (मेवात) जलाभिषेक यात्रा रखी गई थी.

तय कार्यक्रम के अनुसार इस यात्रा को नल्हड़ के शिव मंदिर से क़रीब 35 किलोमीटर दूर फ़िरोज़पुर झिरका के झिर मंदिर और वहाँ से क़रीब 30 किलोमीटर दूर पुनहाना के कृष्ण मंदिर पहुँचना था. जैसे ही यात्रा मुख्य सड़क पर पहुँची, तो पथराव शुरू हो गया.

नूंह की सड़कों पर आगजनी होने लगी. यात्रा में शामिल जो लोग आगे थे, वे मुख्य सड़क पर फँस गए और सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने वापस मंदिर का रुख़ किया.

नल्हड़ शिव मंदिर के पुजारी ने बीबीसी को हिंसा के बाद बताया था कि करीब दो से ढाई हज़ार लोगों ने मंदिर में शरण ली थी.

नूंह से शुरू हुई ये हिंसा देर शाम हरियाणा के सोहना और गुरुग्राम तक पहुँच गई, जहाँ भीड़ ने तोड़फोड़ और आगजनी की और मस्जिद के 22 साल के नायब इमाम मोहम्मद साद की हत्या कर दी.

इस हिंसा में कुल छह लोगों की मौत हुई, जिसमें दो होमगार्ड शामिल हैं.

गुरुग्राम महापंचायत में पुलिस को दिया गया था अल्टीमेटम

नूंह हिंसा
इमेज कैप्शन, गुरुग्राम के तिगरी गांव में छह अगस्त को हुई थी हिंदू महापंचायत

नूंह हिंसा के कुछ दिनों बाद ही हिंदू संगठन गुरुग्राम के तिगरी गाँव में जुटे थे.

ये महापंचायत मस्जिद के नायब इमाम की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किए गए चार युवकों की रिहाई की मांग के लिए हुई थी.

इस दौरान पंचायत ने पुलिस को सात दिनों का अल्टीमेटम दिया था. साथ ही, गुरुग्राम के सेक्टर 57 से अंजुमन मस्जिद को हटाने की मांग की थी. इसके पीछे तर्क दिया गया कि इलाका हिंदू बहुल है.

मोहम्मद साद इसी मस्जिद के नायब इमाम थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पंचायत ने इस मामले की निगरानी के लिए 101 सदस्यीय समिति बनाई और कहा कि अगर गिरफ़्तार युवाओं को नहीं छोड़ा गया तो कोई 'बड़ा फ़ैसला' लिया जाएगा.

गुरुग्राम में धारा 144 लागू होने के बावजूद इस महापंचायत में आसपास के करीब 100 गाँवों से 700 लोग जुटे थे.

एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार महापंचायत में मुसलमानों को किराए पर दुकान और मकान न देने का निर्णय लिया गया था. हालांकि, सरकार की सख्ती के बाद कई खापों ने मुसलमानों के बहिष्कार का फरमान वापस भी लिया.

सीएम खट्टर के इस्तीफ़े की मांग

मनोहर लाल खट्टर

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इमेज कैप्शन, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर

गुरुग्राम और फिर पलवल, दोनों ही जगह की हिंदू महापंचायत में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफ़े की मांग उठाई गई.

तिगरी गाँव की महापंचायत में बार एसोसिएशन के पूर्व ज़िलाध्यक्ष कुलभूषण भारद्वाज ने खट्टर के इस्तीफ़े की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि सीएम को हिंसा की शाम तक भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

पीटीआई की रिपोर्ट में भारद्वाज के हवाले से लिखा गया, "हमें ऐसा मुख्यमंत्री नहीं चाहिए. उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. हमें ऐसे मौकों के लिए योगी आदित्यनाथ जैसे सीएम की ज़रूरत है या तो नूंह को उत्तर प्रदेश में शामिल कर दो. इस तरह की हिंसा आगे बर्दाश्त नहीं की जाएगी."

'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार तिगरी महापंचायत में हेट स्पीच के आरोप में कुलभूषण भारद्वाज पर केस भी दर्ज किया गया था.

वहीं, पलवल में आचार्य आज़ाद शास्त्री ने मनोहर लाल खट्टर को 'कमज़ोर मुख्यमंत्री' बताते हुए उनकी बजाय योगी आदित्यनाथ जैसे शख्स को सीएम बनाने की बात कही.

हरियाणा में बीजेपी की सरकार है. इसके बावजूद हिंदूवादी संगठनों की मनोहर लाल खट्टर से नाराज़गी की वजह क्या है और क्या हिंदुओं को लगता है कि मौजूदा सरकार उनकी सुरक्षा नहीं कर पा रही?

इस सवाल के जवाब में वीएचपी नेता देवेंद्र यादव कहते हैं, "आक्रोश में ऐसी मांगें (खट्टर का इस्तीफ़ा) होती हैं. प्रशासन की बात तो सीएम तक जाएगी ही, क्योंकि सारी एजेंसियां उनके ही अंतर्गत आती हैं. अब चाहे यही सीएम रहें या फिर कोई और करे, लेकिन सिस्टम ठीक कर ले सरकार."

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