रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए तेजपाल के परिवार को शव का इंतज़ार

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"हम पिछले डेढ़ महीने से परेशान हैं, कोई हमारी सुन नहीं रहा है. हमें नहीं मालूम कि उनका शव कहाँ है."
यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में रूसी सेना में शामिल होने के बाद लड़ाई में मारे गए तेजपाल की पत्नी परमिंदर कौर व्यथित होकर कहती हैं.
तेजपाल सिंह जून में रूसी सेना में शामिल हुए उन दो भारतीय नागरिकों में से एक थे, जो युद्ध के दौरान मारे गए थे. भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की है.
तेजपाल सिंह का परिवार अब उनके शव को भारत वापस लाने के लिए संघर्ष कर रहा है. रूसी अधिकारियों ने तेजपाल का शव भेजने से पहले पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए रिपोर्ट मांगी है.
अमृतसर से सांसद गुरजीत सिंह औजला ने तेजपाल के शव को पंजाब मंगाने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय को पत्र भी लिखा है. इसके बाद मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने भी मामले का संज्ञान लिया है.

औजला की चिट्ठी पर भारतीय राजदूत ने क्या कहा

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गुरजीत सिंह औजला के पत्र का जवाब देते हुए मॉस्को में भारतीय राजदूत विनय कुमार ने कहा है, ''हमने तेजपाल सिंह का मुद्दा रूसी अधिकारियों के सामने उठाया है. उनके शव को लाने का प्रयास किया जा रहा है. इस संबंध में हमलोग तेजपाल के रिश्तेदार हरजिंदर सिंह सहित परिवार के संपर्क में हैं.''
"युद्ध की स्थिति और क़ानूनी कठिनाइयों के बावजूद, हम तेजपाल सिंह के शव को जल्द से जल्द देश लाने की कोशिश कर रहे हैं."
भारत के विदेश मंत्रालय ने रूसी सरकार से मृत भारतीय नागरिकों के शव वापस भेजने का अनुरोध किया है.

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तेजपाल का शव पाने के लिए संघर्ष

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तेजपाल का परिवार शव लाने के लिए कई दफ़्तरों के चक्कर काट रहा है. परिवार का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ये डीएनए रिपोर्ट उन्हें कहाँ और कैसे मिलेगी. बीबीसी पंजाबी के सहयोगी पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन ने तेजपाल के परिवार से बात की.
परमिंदर कौर कहती हैं, ''उन्होंने (रूसी अधिकारियों ने) डीएनए रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि उसके बाद ही पुष्टि होगी कि तेजपाल का शव उनके पास है या नहीं. कोई हमारी मदद नहीं कर रहा है और हमें यह रिपोर्ट प्राप्त करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है."
वे कहते हैं, ''मेरे दो बच्चे हैं. मुझे उन्हें हर दिन छोड़कर दफ़्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. बहुत परेशानी होती है.''
तेजपाल सिंह की पत्नी का आरोप है कि उनका आवेदन भी किसी ने मंजूर नहीं किया. उन्होंने कहा, “सरकार ने हमसे संपर्क नहीं किया है. लेकिन यहां के स्थानीय सांसद गुरजीत सिंह औजला निश्चित रूप से मदद कर रहे हैं."
परिवार की परेशानी

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वहीं तेजपाल की मां सरबजीत कौर का कहना है कि दूतावास ने उनसे पांच दिन पहले डीएनए टेस्ट रिपोर्ट मांगी थी लेकिन उन्हें इसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है.
वे कहते हैं, ''गुरु नानक अस्पताल गए, वहां से हमें संसद सदस्य के कार्यालय और फिर सदर पुलिस स्टेशन भेजा गया. दस्तखत करने के बाद एसएचओ ने कहा कि सैंपल लिया जाएगा, साथ ही कहा कि ड्राफ्ट भी लेना पड़ सकता है.''
अपने बेटे का शव घर लाने के लिए सरकार से मदद की गुहार लगाते-लगाते तेजपाल सिंह की मां की आंखें बातें करते हुए नम हो जाती हैं.
वे चाहती हैं कि सरकार डीएनए टेस्ट कराने और रिपोर्ट हासिल करने में उनकी मदद करे. बीबीसी पंजाबी ने इस मुद्दे पर स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
नौकरी नहीं मिली तो तेजपाल रूस चले गये

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जून में तेजपाल सिंह की मौत की ख़बर आने के बाद भी बीबीसी पंजाबी की टीम ने अमृतसर के रहने वाले तेजपाल सिंह के परिवार से बात की थी.
उस दौरान घर पर तेजपाल की पत्नी परमिंदर कौर को अपने पति के फ़ोन का इंतज़ार था. तेजपाल का छह साल का बेटा और तीन साल की बेटी थी.
तेजपाल सिंह की पत्नी परमिंदर कौर ने बताया था, "वह परिवार की मर्जी के ख़िलाफ़ पिछले साल 20 दिसंबर को थाईलैंड गए थे. वहां वे अपने दोस्तों से मिले और उसके बाद 12 जनवरी को रूस चले गए."
परमिंदर कौर ने बताया था कि तेजपाल थाईलैंड से सीधे मॉस्को गए और रूसी सेना के भर्ती अभियान में शामिल हो गए.
इसके बाद वह हर 15 दिन में परिवार से फोन पर बात करते थे. लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनके फ़ोन आने बंद हो गए और परिवार चिंतित हो उठा.
परमिंदर ने बताया था, ''तीन महीने तक कोई फोन नहीं आया, फिर मैंने उन लोगों से संपर्क किया जो उनके साथ गए थे. उसमें से एक ने बताया कि तेजपाल की 12 मार्च को मौत हो गई. आख़िरी बार मेरी उनसे तीन मार्च को बात हुई थी.”
परमिंदर ने तब बीबीसी पंजाबी को बताया था कि, ''शुरुआत में तो रोज़ बात होती थी. फिर तीन मार्च को जब बात हुई तो तेजपाल ने कहा कि वह फ्रंटलाइन पर जा रहे हैं और अब हम कुछ दिनों तक बात नहीं कर सकते.''
परमिंदर कहते हैं कि सेना में भर्ती होने के दो महीने बाद फ़रवरी में पहली सैलरी आई और तेजपाल ने परिवार को दो लाख रुपये भेजे.
परिवार वालों के मुताबिक तेजपाल ने भारत में नौकरी के लिए भी प्रयास किया था. सेना और पुलिस में भर्ती की कोशिश भी की लेकिन जब कोई नौकरी नहीं मिली तो वे बाहर गए.
विदेश मंत्रालय की भारतीयों से अपील
भारतीय विदेश मंत्रालय ने देश के नागरिकों से रूस में रोज़गार के अवसर तलाशते समय सतर्क रहने की एडवाइजरी भी जारी की थी.
मई में पुलिस ने मानव तस्करों के एक नेटवर्क से जुड़े चार लोगों को गिरफ़्तार किया था, जिन्होंने रूस में रोज़गार या शिक्षा के बहाने बुलाया और बाद में उन्हें यूक्रेन के साथ युद्ध में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया.
इस बीच, नेपाल और श्रीलंका की सरकारों ने भी अपने नागरिकों को मानव तस्करों के शिकार न बनने की चेतावनी दी है. कुछ समय पहले ख़बरें आई थीं कि रूस-यूक्रेन युद्ध में इन देशों के हज़ारों नागरिक विदेशी सैनिकों के तौर पर हिस्सा ले रहे हैं.
नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अब तक रूस के लिए लड़ते हुए कम से कम 20 नेपाली मारे गए हैं जबकि श्रीलंकाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 16 श्रीलंकाई की मौत हुई है.
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