रोहित शर्मा ने 16 महीने बाद ऐसा क्या किया, जिसकी हर कोई कर रहा है तारीफ़

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का बल्ला चमका तो सारे आलोचकों के मुंह बंद हो गए. बल्ले की इस चमक ने भारत को कटक में खेले गए दूसरे वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच में इंग्लैंड पर चार विकेट से जीत दिलाकर सिरीज़ जीतना पक्का कर दिया है.

पहले वनडे मैच की तरह भले ही जीत का रन रविंद्र जडेजा के बल्ले से चौके के रूप में निकला पर इस मैच के हीरो रोहित शर्मा ही रहे. उन्होंने अपनी आतिशी पारी के दम पर इंग्लैंड द्वारा रखे 305 रनों के लक्ष्य को बेहद आसान बना दिया.

रोहित शर्मा पिछले कुछ समय से टेस्ट मैचों में खेलते समय बिलकुल भी रंगत में नहीं थे. लगातार दो टेस्ट सिरीज़ हारने की वजह से उनकी खासी आलोचना होने लगी थी.

यही नहीं कप्तानी में उनकी जगह कौन ले, चर्चा का विषय यह भी बन गया था. पर उन्होंने दूसरे वनडे में अपनी शतकीय पारी से अपनी आलोचनाओं पर विराम लगाने के साथ चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारतीय उम्मीदों को भी बढ़ा दिया है.

रोहित शर्मा ने खेल की शुरुआत से ही छक्के लगाना शुरू किया. एक बार अपनी आंखें जम जाने के बाद उन्होंने चौकों और छक्कों की बोछार करके इंग्लैंड के गेंदबाजों को एकदम से असहाय बना दिया.

रोहित ने 90 गेंदों की अपनी पारी में 12 चौके और सात छक्के लगाकर 119 रन की पारी खेली. वह 132 से ऊपर के स्ट्राइक रेट से रन बटोरने में सफल रहे.

भारतीय कप्तान के बल्ले से 16 महीने बाद शतक बना है. रोहित ने इससे पहले 2023 में वनडे विश्व कप के दौरान 11 अक्टूबर कोअफगानिस्तान के खिलाफ शतक लगाया था. इसके बाद से वह 13 पारियों में कोई शतक नहीं लगा सके थे. यह उनका 32 वां वनडे शतक है.

रोहित शर्मा के वनडे करियर का यह दूसरा सबसे तेज शतक है. उन्होंने कटक में 76 गेंदों में शतक पूरा किया. वहीं 2023 विश्व कप में अफगानिस्तान के खिलाफ 63 गेंदों में अपने करियर का सबसे तेज शतक लगाया था.

रोहित पर थी गेंदबाजों से निपटने की योजना

रोहित शर्मा ने मैच में प्लेयर ऑफ द मैच बनने पर कहा, "मेरे मैदान में उतरते ही इंग्लैंड के गेंदबाजों की योजना समझ में आ गई. वह मेरे शरीर पर गेंदबाजी करके मुझे कोई रूम नहीं देने की योजना बनाकर आए थे. पर मेरे पास इस तरह से की जाने वाली गेंदबाजी से निपटने की योजना थी."

रोहित ने कहा, "मुझे बल्लेबाजी करने और टीम के लिए रन बनाने में मजा आया. यह एक अहम सिरीज़ है. वनडे में कैसे बल्लेबाजी करनी है, इसकी मैं योजना बनाकर उतरा. इस प्रयास में मुझे शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर का अच्छा सहयोग मिला."

वह इस शतक से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए सर्वाधिक शतक लगाने वालों के मामले में तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं. उन्होंने करियर का 49वां शतक लगाकर राहुल द्रविड़ (48) को पीछे छोड़ा है. अब उनसे ज्यादा शतक लगाने वाले सचिन तेंदुलकर (100) और विराट कोहली (81) हैं.

भारतीय टीम प्रबंधन इसी माह दुबई और पाकिस्तान में होने वाली आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए इस सिरीज़ से ओपनिंग जोड़ी पर फैसला करना चाह रही थी. पहले मैच में रोहित के जोड़ीदार के रूप में यशस्वी जायसवाल को मौका दिया गया. पर वह अपने पदार्पण मैच में प्रभावित करने में असफल रहे.

पहले वनडे में शुभमन गिल भले ही वन डाउन खेले पर अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने में सफल रहे थे. पर इस मैच में उन्हें पुरानी पोजिशन रोहित के जोड़ीदार के तौर पर उतारा गया. यह जोड़ी फिर से क्लिक कर गई और उन्होंने 136 रन की साझेदारी निभाकर चैंपियंस ट्रॉफी के ओपनरों के लिए सारी अटकलों पर विराम लगा दिया है.

शुभमन ने इस सीरीज में लगातार दूसरा अर्धशतक लगाया. उन्होंने 52 गेंदों में 60 रन की पारी खेलकर सभी को प्रभावित किया है. इसमें उन्होंने नौ चौके और एक छक्का लगाया.

शुभमन इस सिरीज़ में उप कप्तान के तौर पर खेल रहे हैं. उन्होंने दोनों पारियों में जिस विश्वास के साथ पारी खेली, उससे उनका भविष्य में कप्तान का दावा और मजबूत होता जा रहा है.

विराट को फिर नहीं मिला भाग्य का साथ

विराट कोहली भी काफी समय से अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने आते ही जिस तरह का कवर ड्राइव लगाकर चौका लगाया, उससे तो यह कतई नहीं लगा कि वह रंगत में नहीं हैं.

वह जिस तरह से आदिल राशिद की गेंद पर विकेट के पीछे लपके गए, उसे वह बेहद निराश नजर आए.

अंपायर ने अपील पर आउट नहीं दिया, तो रेफरल लेने पर मालूम पड़ा कि गेंद बहुत मामूली बल्ले का किनारा लेकर पीछे गई थी. रोहित की ही तरह विराट को भी चैंपियंस ट्रॉफी से पहले एक पारी का इंतजार रहेगा.

भारत के लिए श्रेयस अय्यर का रंगत में होना एक और खुशखबरी है. इससे बल्लेबाजी में बहुत मजबूती दिखने लगी है. बल्लेबाजी में गहराई की वजह से मध्य में लगे कुछ झटकों के बाद भी भारतीय पारी कभी पटरी से उतरती नजर नहीं आई.

रविंद्र जडेजा ने सफेद गेंद की क्रिकेट में हमेशा ही जलवा बिखेरा है. भारत के लिए मोहम्मद शमी और हर्षित राणा ने गेंदबाजी की शुरुआत की. दोनों नों ने ही ऑफ स्टंप के बाहर गेंद रखने की रणनीति अपनाई. इंग्लैंड के ओपनरों फिल साल्ट और बेन डकेट ऐसी गेंदें खेलने के माहिर हैं, इसलिए उन्होंने आक्रामक अंदाज में रन बटोरे.

भारतीय कप्तान को रनों की रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए रविंद्र जडेजा को जल्द आक्रमण पर लाना पड़ा. उन्होंने अपने दस ओवरों के स्पैल में 50 प्रतिशत गेंदें डॉट रखीं. यही नहीं उन्होंने महत्वपूर्ण मौकों पर बेन डकेट और जो रूट के विकेट निकाले. इसका ही परिणाम था कि इंग्लैंड का स्कोर 25-30 रन कम रह गया.

रविंद्र जडेजा ने अपने 10 ओवरों की गेंदबाजी में 35 रन देकर 3 विकेट निकाले. भारतीय कोच गौतम गंभीर और कप्तान रोहित शर्मा ने इस मैच में कुलदीप यादव की जगह वरुण चक्रवर्ती को मौका दिया. वह अपनी छवि के अनुरूप तो गेंदबाजी नहीं कर सके. उन्हें यदि टीम में कुलदीप यादव की जगह लेनी है तो और विकेट लेना सीखना होगा.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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