बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले में परिवार का आरोप - पुलिस ने 12 घंटे थाने के बाहर करवाया इंतज़ार

    • Author, दीपाली जगताप
    • पदनाम, बीबीसी मराठी संवाददाता

महाराष्ट्र के ठाणे ज़िले के बदलापुर में दो मासूम बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आने के बाद से शहर में अव्यवस्था देखी जा रही है.

गुस्साए स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस की लापरवाही और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद उनका गुस्सा और भी बढ़ गया है.

पीड़ित बच्ची के परिजनों ने अधिकारियों पर एफ़आईआर दर्ज करने में देरी का आरोप लगाया है. इसके कारण भी लोगों का गुस्सा बढ़ा है.

परिजनों के मुताबिक़, साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ हुए यौन उत्पीड़न को लेकर उसकी मां शिकायत करने पुलिस स्टेशन पहुंची. पुलिस ने तत्काल शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें स्टेशन के बाहर 12 घंटे तक बैठाए रखा.

इस देरी की लोगों ने कड़ी निंदा की और पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल भी उठे.

अधिकारियों ने देरी के लिए ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों पर त्वरित कार्रवाई करने का वादा किया है. इसी बीच यह मामला राजनीतिक जंग के मैदान में तब्दील हो गया.

विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया. विपक्ष का दावा है कि स्कूल के निदेशक मंडल के एक सदस्य सत्ता पक्ष से जुड़े हुए हैं, जिसकी वजह से देरी की गई.

सत्ताधारी गठबंधन महायुति ने इन आरोपों को नकार दिया और इसे राजनीति से प्रेरित बताया.

इस घटना की खबर जैसे ही फैली, सैकड़ों चिंतित परिजन न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतर आए.

20 अगस्त को बदलापुर रेलवे स्टेशन में विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां पत्थरबाज़ी की घटनाएं सामने आईं. पुलिस ने अब तक 1500 से अधिक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है, जबकि 60 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

तनाव बढ़ने की वजह से सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए बदलापुर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है.

पीड़ित परिवार ने क्या कहा ?

बदलापुर मामले में बीबीसी मराठी ने पीड़ित बच्ची के परिवार से बात की. परिजनों ने इस घटना का भयावह क्रम बताया.

परिजनों के मुताबिक़, जब बच्ची ने अपने माता-पिता को इस घटना के बारे में बताया तो वे तुरंत पुलिस स्टेशन गए. हालांकि, उनकी परेशानी यहां खत्म नहीं हुई थी.

परिवार के एक सदस्य ने कहा, "पहले तो पुलिस ने शिकायत दर्ज करने में अहम समय बर्बाद किया. उन्होंने पीड़ित बच्ची, उसकी मां और उसके दादा को पुलिस स्टेशन के बाहर 12 घंटे तक इंतज़ार कराया."

उन्होंने कहा, "हम सुबह 11:30 बजे पुलिस स्टेशन पहुंच गए थे और वहां देर रात तक थे. हम स्कूल भी गए, लेकिन वहां हमें किसी ने गंभीरता से नहीं लिया."

इसी बीच महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री शंभूराज देसाई ने शिकायत दर्ज करने में देरी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए. इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने जिन पुलिस अधिकारियों पर देरी के आरोप लगाए थे, उन्हें निलंबित कर दिया गया.

पीड़ित परिवार ने बच्ची की मेडिकल जांच एक निजी अस्पताल में कराई, जहां डॉक्टर ने उत्पीड़न की विस्तृत रिपोर्ट दी. पुलिस पर आरोप है कि उसने इन सबूतों को नज़रअंदाज़ किया.

परिवार ने आरोप लगाया कि स्कूल बोर्ड के ट्रस्टी सत्तारूढ़ दल भाजपा से जुड़े हुए हैं, उन्होंने शिकायत दर्ज करने में देरी करने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया.

परिवार ने कहा, "हमें भरोसा है कि स्कूल प्रशासन और पुलिस के बीच बातचीत हुई है और तुरंत शिकायत दर्ज करने से रोकने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया गया."

जनता के आक्रोश की वजह से पुलिस ने कार्रवाई की और पुलिस आयुक्त ने शिकायत दर्ज करने के लिए हस्तक्षेप किया.

परिवार को अब डर है कि कानूनी कार्यवाही में देरी की वजह से अभियुक्त को फ़ायदा मिल सकता है. प्रदर्शनकारी अभियुक्त को मौत की सज़ा देने की मांग कर रहे हैं. पीड़ित बच्ची के परिवार ने भी यही मांग की है.

परिवार ने कहा, "इस जघन्य अपराध के लिए अभियुक्त को फांसी की सज़ा मिलनी चाहिए. उम्रकैद की सज़ा पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उसे अंततः रिहा किया जाएगा."

उन्होंने कहा, "स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मौत की सज़ा एकमात्र सही कदम होगा."

इस घटना का सदमा पीड़ित परिवार पर भारी पड़ रहा है.

पीड़ित बच्ची के दर्द के बारे में बताते हुए परिवार के एक सदस्य ने कहा, "हमारी बच्ची अब कुछ हद तक शांत हो गई है, लेकिन अब वह बहुत ज़्यादा डरी हुई है और किसी के पास जाने से इनकार कर रही है."

उन्होंने कहा, "शुरुआत में तो वह चलने में भी बहुत डरती थी."

स्कूल के ट्रस्टी बोर्ड ने क्या कहा?

जिस स्कूल पर सवाल उठ रहे हैं वह बदलापुर का जाना-माना स्कूल है. यह स्कूल 62 साल पुराना है और यहां 5500 से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं.

स्कूल के ट्रस्टी बोर्ड के सचिव तुषार आप्टे ने पुष्टि की है कि बोर्ड का एक सदस्य बीजेपी से जुड़ा हुआ है. हालांकि, उन्होंने पुलिस या स्कूल पर राजनीतिक दबाव डाले जाने के किसी भी दावे से इनकार किया.

आप्टे ने कहा, "राजनीतिक दबाव की बातें पूरी तरह झूठी हैं. इसके विपरीत हमने पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया और माता-पिता को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया."

आप्टे ने यह भी बताया कि अभियुक्त की पहचान कैसे की गई और उसे कैसे पकड़ा गया.

उन्होंने बताया, "पीड़ित बच्ची ने कुछ सुराग दिए, हालांकि वह बहुत छोटी है इसलिए ये ज्यादा स्पष्ट नहीं थे. बच्ची ने अभियुक्त को 'दादा' कहा और बताया कि वो ऊपर से आया था."

"इस विवरण के आधार पर हमें संदेह था कि वह पहले या दूसरे फ्लोर पर सफाई करने वाला व्यक्ति हो सकता है. हमने उसी दिशा में जांच की और हम सुबह 4 बजे तक सब इंस्पेक्टर के साथ थे, जब आरोपी को आखिरकार ढूंढ लिया गया और गिरफ्तार कर लिया गया."

सुरक्षा खामियां और प्रशासनिक विफलताएं

बाल संरक्षण समिति की जांच में स्कूल में कई सुरक्षा खामियां सामने आईं. परिजनों ने आरोप लगाया कि प्री-प्राइमरी कक्षाओं में लड़कियों के लिए महिला सहायकों की नियुक्ति नहीं की गई है.

इन आरोपों के जवाब में सचिव तुषार आप्टे ने घटना के दिन सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्डिंग नहीं होने की बात स्वीकार की.

आप्टे ने कहा, "हमने सीसीटीवी कैमरे लगाए हुए हैं, इसकी देखरेख के लिए एक व्यक्ति को रखा गया है. हालांकि, घटना के दिन वह रिकॉर्डिंग चालू करना भूल गया."

आप्टे ने महिला सहयोगी और शिक्षक नहीं रखने की लापरवाही भी स्वीकार की. उन्होंने कहा कि वे छात्राओं की पर्याप्त निगरानी करने में नाकाम रहे, विशेष रूप से शौचालय का इस्तेमाल करते समय लड़कियों की सुरक्षा में विफल रहे.

आप्टे ने सफाई देते हुए कहा, "इस विफलताओं के चलते हमने महिला सहयोगियों, प्रधान अध्यापक और संबंधित क्लास टीचर्स को निलंबित कर दिया है."

उन्होंने कहा कि स्कूल ने सार्वजनिक माफ़ी मांगी है और अगले कुछ दिनों के लिए स्कूल बंद है.

राज्य सरकार ने इस अवधि के दौरान स्कूल के संचालन की देखरेख के लिए एक प्रशासक नियुक्त किया है.

मामले में अब तक क्या हुआ और राज्य सरकार ने क्या कहा?

अब तक इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोपों में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है, जिनमें बदलापुर पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर, असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) और एक हेड कॉन्स्टेबल शामिल हैं.

आईपीएस आरती सिंह की देखरेख में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की नियुक्ति की गई है.

कल्याण कोर्ट में वीडियो कॉल के ज़रिए सुनवाई के बाद अभियुक्त को 26 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम को सरकारी वकील के रूप में पैरवी के लिए नियुक्त किया है.

हालांकि, विपक्ष ने निकम की नियुक्ति को लेकर चिंता ज़ाहिर किया है और कहा है कि भाजपा के साथ उनके पिछले जुड़ाव के कारण हितों का टकराव हो सकता है.

इस घटना के बाद से राज्यभर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी ने 24 अगस्त को पूरे महाराष्ट्र में हड़ताल का आह्वान किया है.

गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (ठाकरे गुट) ने महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ़ अपराधों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार की आलोचना की है.

विपक्षी नेता विजय वडेट्टीवारल ने स्कूल ट्रस्टी और सरकारी वकील के भाजपा से जुड़े होने के चलते निष्पक्ष जांच को लेकर चिंता ज़ाहिर की है.

वडेट्टीवारल ने कहा, "इसकी बहुत ज्यादा संभावना है कि राजनीतिक दबाव के कारण मामले को दबाने की कोशिश की जा सकती है. सरकार को निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करना चाहिए."

शिवसेना नेता अंबादास दानवे ने महाराष्ट्र में महिला सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं पर चर्चा करने के लिए राज्य पुलिस आयुक्त से मुलाकात की है.

दानवे ने कहा, "महाराष्ट्र की महिलाएं खतरे में हैं. "बदलापुर, उरण, कोपरखैराने, अकोला और अन्य स्थानों पर यौन उत्पीड़न की बढ़ती घटनाएं इसका प्रमाण हैं."

इसके जवाब में राज्य सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कड़े उपायों की घोषणा की है.

उन्होंने सभी स्कूलों में सखी सावित्री समिति, शिकायत पेटी लगाने और सीसीटीवी निगरानी को सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं.

इसके साथ ही स्कूलों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा. इन उपायों में कमी पाए जाने पर स्कूल को बंद करने समेत गंभीर जुर्माना लगाया जाएगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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