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यूक्रेन युद्ध पर रूस के मामले में चीन का रवैया क्या बदल रहा है?
इंडोनेशिया के बाली शहर में जी-20 सम्मेलन के दौरान सबकी नज़रें दो बातों पर टिकी थीं.
यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर विश्व के नेता क्या कहेंगे और अमेरिका और चीन के नेता एक-दूसरे से कैसे मिलेंगे.
रूस को लेकर सम्मेलन में फ़ैसला लिया जाता है इसका पता घोषणापत्र में लगेगा, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाक़ात अच्छी रही. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे मुल्क के लिए सकारात्मक बातें कहीं.
राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन से टकराव को लेकर संयत बयान दिया. उन्होंने कहा कि एक और शीत युद्ध की ज़रूरत नहीं है.
वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की नज़र चीन और अमेरिका पर है.
उन्होंने कहा, "दुनिया उम्मीद कर रही है कि अमेरिका और चीन अपने संबंधों को ठीक तरह से संभालें. हमारी मुलाक़ात पर लोगों की नज़रें टिकी हुई हैं. दुनिया में शांति कायम करने के लिए हमें दूसरे सभी देशों के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है."
ऐसी ख़बरें हैं कि सम्मेलन के आख़िर में जारी होने वाले घोषणापत्र का जो मसौदा तैयार हुआ है उसमें विश्व के नेता यूक्रेन पर रूस के हमले की कड़ी निंदा करने वाले हैं.
साथ ही उसमें युद्ध को लेकर चीन के रुख़ में भी बदलाव नज़र आ सकता है. जर्मन न्यूज़ एजेंसी डीपीए ने ऐसी ख़बरें दी हैं.
एजेंसी में चल रही ख़बरें अगर सही हैं तो ऐसे संकेत मिलते हैं कि रूस को यूक्रेन युद्ध पर शायद अब पहले जैसा समर्थन नहीं मिल पाएगा.
डीपीए ने ख़बर दी है कि बीते शुक्रवार तक चीन के राजनयिक रूस के साथ थे और ऐसा माना जा रहा था कि घोषणापत्र में युद्ध की आलोचना की किसी भी बात का चीन विरोध कर सकता है.
हालांकि घोषणापत्र में क्या-क्या बातें होंगी और चीन का असल में रवैया क्या रहेगा इसके लिए हमें अभी इंतज़ार करना होगा, लेकिन ये संकेत ज़रूर मिलने लगे हैं कि संभवत: चीन पश्चिम के साथ अपने संबंधों पर अब गंभीरता से विचार कर रहा है.
शी जिनपिंग और ऑस्ट्रेलियाई पीएम की मुलाक़ात
रूस के मामले में सम्मेलन में शामिल देश बंटे हुए नज़र आए. पश्चिमी देशों की ओर से रूस की आलोचना करने के प्रस्ताव को ज़्यादा समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है.
भारत के अलावा चीन, रूस, ब्राज़ील, सऊदी अरब और ख़ुद मेजबान इंडोनेशिया ने भी कथित तौर पर इससे दूरी रखी है.
हालांकि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के हमले की निंदा के लिए जी-20 के प्रस्ताव का जो मसौदा तैयार किया गया है, उससे संकेत मिलता है कि चीन के रुख़ में बदलाव आ सकता है.
न्यूज़ एजेंसी डीपीए के मुताबिक़ रूस के ख़िलाफ़ निंदा प्रस्ताव को लेकर चीन का रुख़ बदलने के संकेत मिले हैं, लेकिन इस बारे में अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता.
सम्मेलन में इस वक्त सबसे ज़्यादा चर्चा ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज़ और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर हो रही है.
अल्बनीज़ ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापार, महा वाणिज्य दूतावासों और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर बातचीत की है.
सम्मेलन में रूस-यूक्रेन भिड़े
इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा था कि रूस का युद्ध अब समाप्त होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने मिन्स्क-3 समझौते से इनकार किया था.
लेकिन मिन्स्क-3 को लेकर दिए इस बयान पर रूस ने भी जवाब दिया है. उसने कहा है इससे ऐसा लगता है कि यूक्रेन शांति वार्ता में दिलचस्पी नहीं रखता.
पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थक विद्रोहियों और यूक्रेन की सेना के बीच ख़ूनी संघर्ष के बाद पहले 2014 में मिन्स्क-1 और 2015 में मिन्स्क-2 समझौता हुआ था.
जी-20 सम्मेलन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने युद्ध बंद करने की अपील करते हुए कहा था कि तीसरे मिन्स्क समझौते की गुंजाइश नहीं है.
उन्होंने कहा था, ''हम रूस को अपनी सेनाओं को फिर से खड़ा करने की इजाजत नहीं दे सकते. ऐसा हुआ तो फिर आतंक और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का नया दौर शुरू हो जाएगा.''
ब्रिटेन ने रूस को लेकर क्या कहा?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक रिकार्डेड वीडियो में यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के युद्ध को बर्बर क़रार दिया. उनके वीडियो को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ भी देख रहे थे.
सुनक से पूछा गया कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन यहां आते तो वो उनसे क्या कहते. इस पर सुनक ने कहा, ''सुबह हमने देखा कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के हमले की अंतरराष्ट्रीय समुदाय निंदा कर रहा है. रूस के विदेश मंत्री ये देख रहे थे.
हमने इस हमले की अवैध प्रकृति और इसकी क्रूरता के बारे में बात की. हमने बताया कि किस तरह इस युद्ध ने लोगों पर भयावह असर डाला है. पूरी दुनिया में ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं की क़ीमतें बढ़ गई है.''
उन्होंने कहा, ''वैश्विक अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जी-20 देशों के साथ मिलकर काम करना हमारी ज़िम्मेदारी है ताकि महंगाई पर क़ाबू पाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पटरी पर आ सके. हम यही करने जा रहे हैं.''
ब्रिटेन के इस वीडियो के बाद रूसी विदेश मंत्री लावरोफ़ ने पश्चिमी देशों की निंदा करते हुए कहा कि 'ये जी-20 की घोषणा का राजनीतिकरण कर रहे हैं.'
लावरोफ़ ने कहा कि इस युद्ध के लिए रूस पर सारा दोष मढ़ने की कोशिश हो रही है. घोषणापत्र में इस मुद्दे पर विचारों के आदान-प्रदान की बात हुई है. उन्होंने कहा कि घोषणापत्र कल तक (बुधवार) बन जाना चाहिए.
न्यूज़ एजेंसियों की ओर देखे गए मसौदा घोषणापत्र में ज़्यादातर सदस्य देशों ने यूक्रेन युद्ध की निंदा की है और कहा है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था कमज़ोर हो रही है.
मोदी ने कहा, यूक्रेन में युद्धविराम का तरीका तलाशना होगा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस सम्मेलन में खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सत्र में हिस्सा लिया.
सत्र में अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “कोविड के बाद एक नई विश्व व्यवस्था बनाने की ज़िम्मेदारी हमारे ऊपर है. इस वक़्त की ज़रूरत है कि हम एक साथ मिल कर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए ठोस संकल्प दिखाएँ.”
“मुझे यक़ीन है कि बुद्ध और गांधी की धरती पर पर जी-20 के नेता मिलेंगे तो हम दुनिया में शांति का एक मज़बूत पैगाम देंगे.”
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर पीएम ने कहा, “मैं दोहराता रहा हूँ कि हमें यूक्रेन में युद्धविराम और कूटनीति वापस लाने का तरीक़ा तलाशना होगा. दूसरे विश्वयुद्ध ने दुनिया में तबाही ला दी थी, उस समय नेताओं ने जिस तरह शांति स्थापित करने की गंभीर कोशिशें की थीं, आज हमें भी वो करने की ज़रूरत है.”
पीएम मोदी ने कहा, “वैश्विक विकास के लिए भारत की ऊर्जा-सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है.
हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी प्रतिबंध को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता सुनिश्चित की जानी चाहिए. भारत स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के लिए प्रतिबद्ध है.''
मोदी-सुनक मुलाकात
नरेंद्र मोदी ने जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन भारतीय मूल के ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से मुलाकात की.
सुनक के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी से उनकी ये पहली मुलाकात है. सुनक का भारत से ख़ास संबध है. उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति इन्फ़ोसिस के फ़ाउंडर एन आर नारायणमूर्त की बेटी हैं.
पीएम बनने पर मोदी ने सुनक को फ़ोन कर बधाई दी थी. जल्द ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े समझौते को पूरा करने का इरादा जताया था.
दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को दोगुना करना चाहते हैं.
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